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इंटरनेट युग में साेशल मीडिया में स्क्रीन पर मिलते हैं ग्रुप्स लेकिन 1930 के दाैर में होते थे चरखा समूह

Hisar News - इंटरनेट के युग में सोशल मीडिया में ग्रुप्स बनाए जा रहे हैं। जहां लाेग अपने विचार साझा करते हैं। पर अाजादी से पहले...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:51 AM IST
Hisar News - haryana news in the internet era in the social media the groups were found on the screen but in the 1930s there were charkha group
इंटरनेट के युग में सोशल मीडिया में ग्रुप्स बनाए जा रहे हैं। जहां लाेग अपने विचार साझा करते हैं। पर अाजादी से पहले अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जन अांदाेलन खड़ा करने के लिए चरखा ग्रुप्स खासे सक्रिय रहते थे। इसमें महिलाएं बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थीं। इन ग्रुपाें में चरखा चलाते हुए गीताें के जरिये महिलाएं स्वदेशी अपनाअाें के अभियान काे भी मजबूती देती थीं।

दरअसल, अभिलेखागार विभाग की तरफ से ठाकुरदास भार्गव सीनियर सेकंडरी स्कूल में दूसरे दिन शुक्रवार काे भी एेतिहासिक और दुर्लभ दस्तावेजों की प्रदर्शनी अायाेजित की गई। इसी प्रदर्शनी में एक एेसी तस्वीर लोगों को अट्रेक्ट करती नजर आई। 1930 के स्वदेशी अांदाेलन के दौरान यह तस्वीर हिसार के ढाणा गांव की है। इसमें महिलाएं चरखा कातती नजर आ रही हैं। जिसमें विदेशी कपड़ों का बहिष्कार किया गया। अभिलेखागार विभाग के अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि विदेशी कपड़ों के बहिष्कार में गधे को विदेशी कपड़े पहनाकर जुलूस निकाला गया था। तब महिलाएं इसी तरह ग्रुप्स बनाकर चरखा कातती थी और खादी का प्रचार करती थी।

हिसार के गांव ढाणा में महिला समूह का चरखा दंगल। यह तस्वीर अभिलेखागार विभाग की प्रदर्शनी में दिखाई।

क्विज कम्पीटिशन के विनर सम्मानित

प्रदर्शनी के समापन पर विद्यालय में एक प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें प्रदर्शनी देखने आए विद्यार्थियों से प्रदर्शनी में लगाए गए दस्तावेजों से संबंधित प्रश्न पूछे गए तथा सही उत्तर देने वाले स्टूडेंट्स काे पुरस्कृत भी किया गया। इस दाैरान स्टूडेंट्स ने देशभक्ति से अाेत-प्राेत कविताओं के माध्यम से देश के एेतिहासिक स्थलाें का वर्णन किया।

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