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निकू में दाखिल शिशु की स्टाफ नर्स से ज्यादा मां करेगी देखभाल, तेजी से स्वस्थ होगा नवजात

Hisar News - काफी समय से यह धारणा बनी हुई है कि समय से पूर्व पैदा होने वाला शिशु बीमार होता है इसलिए उसे स्पेशल न्यू बोर्न केयर...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:45 AM IST
Hisar News - haryana news niru39s infant39s staff will do more than nurses care will be faster newborn
काफी समय से यह धारणा बनी हुई है कि समय से पूर्व पैदा होने वाला शिशु बीमार होता है इसलिए उसे स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट या निकू में रखा जाता है। पर, यह सच नहीं है। बच्चे में रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाया जा सके इसलिए उसे निकू में रखा जाता है। इस दौरान शिशु की देखभाल उसकी मां करे, तो वह न सिर्फ जल्दी स्वस्थ होगा बल्कि एंटी बायोटिक दवाइयों की जरूरत भी कम पड़ेगी। इसलिए प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में फैमिली पार्टिसिपेटरी केयर प्रोग्राम शुरू किया है। बता दें कि प्रोग्राम का वैज्ञानिक फायदा हे कि जच्चा का बच्चे के ज्यादा करीब रहना स्वास्थ्य में क्विक रिकवरी करवाता है।

दवा के मुकाबले मां का अहसास उसे रोगों से लड़ने की ताकत देता है। हिसार सिविल अस्पताल में सीएमओ डॉ. संजय दहिया और पीएमओ डॉ. दयानंद ने एसएनसीयू में उक्त प्रोग्राम की शुरूआत की। इस दौरान कंसल्टेंट डॉ. निधि ने 2-2 स्टाफ नर्स व एक-एक बाल रोग विशेषज्ञों को प्रोग्राम को लेकर प्रशिक्षित किया है।

दवाओं के ज्यादा प्रभावी है मां का अहसास

प्री मेच्योर बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए है प्रशिक्षण

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र ने बताया कि फैमिली पार्टिसिपेटरी केयर का मतलब बच्चे की देखभाल में पेरेंट्स की ज्यादा से ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके तहत प्री मेच्योर डिलीवरी के बाद बच्चों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए डॉक्टर्स या स्टाफ नर्सों के अलावा जच्चा को देखभाल में ज्यादा शामिल करना है। एसएनसीयू में स्टाफ नर्स की बजाए जच्चा को बच्चे के नजदीक रखा जाएगा। वैज्ञानिक सत्य है कि मां की गोद व छाती से लगने पर वह जल्दी रिकवर करेगा। जितना मां के दूध का सेवन करेगा, उसमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता तेजी से बढ़ेगी। इतना ही नहीं अगर उसका वजन कम है, सांस लेने में दिक्कत है या फिर दूसरे बच्चों की तुलना में कम एक्टिव है तो वह जल्दी स्वस्थ होगा और एंटी बायोटिक दवाइयों की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ेगी। जच्चा को बताया जाएगा कि बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। उन्हें कितना दूध पिलाना चाहिए और कितनी देर तक अपने से सटाकर रखें। डॉ. रविंद्र ने बताया कि हिसार सिविल अस्पताल-अग्रोहा मेडिकल कॉलेज, सिरसा, फतेहाबाद, जींद, भिवानी में उक्त कार्यक्रम शुरू करके प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

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