हिसार में अब कोई कोरोना पॉजिटिव नहीं, सात दिन बाद ठीक होकर घर लौटी 59 वर्षीय महिला

Hisar News - कोरोना को हराने वालीं सेक्टर 16-17 वासी महिला स्वस्थ होकर सोमवार को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज होने के बाद...

Apr 07, 2020, 07:41 AM IST

कोरोना को हराने वालीं सेक्टर 16-17 वासी महिला स्वस्थ होकर सोमवार को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज होने के बाद अपने पति के साथ आवास पर पहुंची। इस दौरान जनप्रतिनिधियों, पड़ोसियों और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनका स्वागत कर चेहरे पर नई मुस्कान लौटाई। आगामी 28 दिन तक दंपति को अपने घर में क्वारेंटाइन रहना होगा। दंपति ने क्वारेंटाइन और अस्पताल में भर्ती होने तक के दौरान अपने शारीरिक-मानसिक पीड़ा की दास्तां को बयां किया। बता दें कि दंपति अपने बेटे से मिलने अमेरिका गया था। वहां से लौटने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ी थी। 30 मार्च को सैंपल रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद इनके पति व गुरुग्राम के वजीराबाद में रहने वाले पांच रिश्तेदारों को क्वारेंटाइन करके उनके सैंपल लिए थे जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इनके घर किराये पर रहने वाले मां-बेटा भी क्वारेंटाइन हैं। सुखद बात यह कि सोमवार को 9 संदिग्ध लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। एक केस एक्टिव था जोकि स्वस्थ्य हो चुका है। जिला कोराना मुक्त है। इन्हें आइसोलेशन वार्ड से क्वारेंटाइन कर दिया है।

पार्षद व जीव वैज्ञानिक बोले-किसी चीज की जरूरत होगी तो पहुंचाएंगे घर

दंपति के घर पहुंचने पर पार्षद अमित ग्रोवर, आरडब्लूए प्रधान जितेंद्र श्योराण, स्वास्थ्य विभाग से जीव वैज्ञानिक डॉ. रमेश पूनिया, एमपीएचडब्लू नूर मोहम्मद, जनवादी महिला समिति पदाधिकारी शकुंतला जाखड़ और पड़ोसियों ने तालियां बजाकर व दंपति के ऊपर फूल बरसाकर स्वागत किया। भारत माता की जय और जोश भर देने वाले नारे लगाए। पार्षद ग्रोवर और डॉ. रमेश पूनिया ने दंपति से कहा कि आपको किसी भी वक्त कुछ भी चाहिए, हम उपलब्ध करवाएंगे। दूध, पानी, फल, सब्जियाें सहित अन्य खाद्य पदार्थों की असुविधा नहीं होगी।

पड़ोसियों, हेल्थ टीम और पार्षद ने तालियों और फूलों से किया स्वागत, दंपति 28 दिन तक होम क्वारेंटाइन रहेगा

शुक्रिया! हेल्थ टीम... मुझे लगा मेरी प|ी टूट जाएगी, पर वह ब्रेव निकली और कोराेना हारा

“ क्वारेंटाइन के वक्त सोशल मीडिया पर हमारे लिए जो अफवाहें फैलीं वह काफी दुखदायी थीं। एक तरह से इमोशनल ब्रेकडाउन हुआ जोकि गलत है। आप मदद नहीं कर सकते पर मानवता का रिश्ता न तोड़ें। ’’

क्वारेंटाइन में सोशल डिस्टेंस रखा, पौष्टिक आहार से मिली ताकत तो म्यूजिक ने दिया सुकून और पति ने बढ़ाई हिम्मत

“दुर्भाग्य था कि मैं शहर की पहली कोरोना पॉजिटिव थी लेकिन इस बात से खुश हूं कि इस बीमारी को हराने वाली भी मैं हूं।’’

राहत ... सेल्फ क्वारेंटाइन का रखा ध्यान इसलिए संपर्क में आए लोग संक्रमित नहीं

सीख... घबराएं नहीं, एहतियात बरतें, सेफ्टी के लिए सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी

पीड़ा के दौर से हम गुजर रहे थे तब जीव वैज्ञानिक डॉ. रमेश पूनिया ने सपोर्ट दिया, क्वारेंटाइन के वक्त अपने घर से खाना लाकर खिलाया

इस त्रासदी के बाद हमारी घर वापसी पर जिस तरह तालियां बजाई हैं इससे हमारा हौसला और बढ़ गया है। हाल में अचानक हम पर आफत आई थी। इस बीमारी से हम ही नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान और विश्व में हाहाकार मचा हुआ है। पर, मैं मानता हूं कि इस बीमारी से कहीं अधिक इमोशनल प्रॉब्लम है। जिस तरह इमोशनल ब्रेकडाउन हुआ उससे ठेस पहुंची। हमारे क्वारेंटाइन के वक्त सोशल मीडिया पर हमारे लिए जो अफवाहें फैलीं वह काफी दुखदायी थीं। आप मदद नहीं कर सकते, कोई बात नहीं। दूर रहना है कोई बात नहीं लेकिन भावनात्मक और मानवता का रिश्ता न तोड़ें। इस मुसीबत में कोई भी फंस सकता है। इस पीड़ा के दौर से हम गुजर रहे थे तब जीव वैज्ञानिक डॉ. रमेश पूनिया ने सपोर्ट दिया। मेरे क्वारेंटाइन के वक्त अपने घर से खाना लाकर खिलाया, जिन्होंने भावनात्मक रिश्ता जोड़ा। मुझे लगता था कि मेरी प|ी टूट जाएगी। वह हार सकती है लेकिन वह ब्रेव निकली और कोरोना को हरा दिया। स्वास्थ्य विभाग ने हर वक्त सहयोग दिया। कितने भी व्यस्त थे लेकिन किसी अधिकारी ने फोन करने पर मुझे अनसुना नहीं किया। हमारी वजह से सेक्टवासियों को परेशानी हुई है तो क्षमा चाहता हूं।''
-जैसा कि महिला के पति ने बताया।

छह माह अमेरिका में रहे थे। खान-पान बदलने के कारण इम्युनिटी कमजोर हो गई थी। अगर हिसार में होती तो कोरोना नहीं होता। वहां से लौटने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने क्वारेंटाइन कर दिया था। इस दौरान हमने सोशल डिस्टेंस रखा। खुद को मानसिक तौर पर स्वस्थ रखने के लिए म्यूजिक सुनती थी, जिससे सुकून मिलता था। पौष्टिक आहार से ताकत मिलती थी। टीवी देखकर मनोरंजन करती थी और पति की सकारात्मक सोच मेरी हिम्मत बढ़ाती। अचानक से तबीयत थाेड़ी बहुत ढीली रहने लगी थी। डॉक्टर की सलाह से दवाई का सेवन करती रही। खुद पर विश्वास था। घबराना क्या। करीब सात दिन तक बुखार ठीक नहीं हुआ तो शक हुआ कुछ तो गड़बड़ है। तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचना देकर आइसोलेट हुई। सैंपल जांच के लिए लैब में भिजवाया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। घबराहट नहीं हुई मगर बॉडी में कमजोरी महसूस होने लगी। सांस की दिक्कत न हो इसलिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। वहां डॉक्टर्स ने दवाइयां, पौष्टिक आहार का सेवन करवाने के साथ मनोबल टूटने नहीं दिया। दो दिन बाद ही रिपोर्ट निगेटिव आई तो हौसला और बढ़ गया। आखिरकार कोरोना को हराकर घर वापस आई हूं। दुर्भाग्य था कि मैं शहर की पहली कोरोना पॉजिटिव थी लेकिन इस बात से खुश हूं कि इस बीमारी को हराने वाली भी मैं हूं। पति नियमित योग करते हैं इसलिए कोरोना उन पर हावी नहीं हो पाया। उनकी रिपोर्ट भी निगेटिव आई थी। हमारी वजह से रिश्तेदार या कोई अन्य बीमारी की चपेट में नहीं आया, यह राहत की बात है।'' - जैसा कि अस्पताल से स्वस्थ होकर घर लौटी 59 वर्षीय महिला ने भूपेश मथुरिया को बताया।

डॉक्टर्स ने दवाइयां, पौष्टिक आहार का सेवन करवाने के साथ मनोबल टूटने नहीं दिया, दो दिन बाद ही रिपोर्ट निगेटिव आई तो हौसला और बढ़ गया

हिसार | अस्पताल से स्वस्थ्य होकर लौटी महिला और उनके पति का लोगों ने तालियां बजाकर स्वागत किया। इस दौरान दंपति ने लोगों से कहा कि आपके सहयोग हमारा हौसला और बढ़ा है।

हिसार | अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से स्वस्थ होने के बाद लौटी महिला और उनके पति का तालियां बजाकर व फूल बरसाकर स्वागत करते हुए। इस दौरान दंपति ने सेक्टरवासियों, मेडिकल स्टाफ, पुलिस और तमाम शुभ चिंतकों का सहयोग के लिए धन्यवाद किया।

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