अब बागवानी किसान समूह को भी यंत्र खरीदने पर मिलेगा 80% तक अनुदान
}अभी तक खेती-बाड़ी करने वाले किसानों को ही मिलता था अनुदान का लाभ
13 को गुजरात के राज्यपाल, 14 को सीएम और 15 को केंद्रीय पशुपालन मंत्री होंगे मुख्यातिथि
पशु पालन विभाग हरियाणा की ओर से शहर के एनडीआरआई परिसर में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय पशु एक्सपो को लेकर तैयारियां जोरों पर है। यह मेला आगामी 13,14 व 15 मार्च को होगा। मेले के सफल आयोजन के लिए बुधवार को डीसी निशांत कुमार यादव ने पशुपालन सहित विभिन्न विभाग के अधिकारियों के साथ किए जा रहे प्रबंधों की समीक्षा की। एडीसी अनीश यादव व एसीयूटी अशीष सिन्हा भी मौजूद रहे। डीसी ने बताया कि मेलेेे के प्रथम दिन यानी 13 मार्च को सुबह कार्यक्रम स्थल पर राज्य स्तरीय पशुधन प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत इसका शुभारभ करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जयप्रकाश दलाल करेंगे। 14 मार्च को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल आयोजित कार्यक्रम में मुख्यातिथि रहेंगे। इस दिन एनडीआरआई के प्रदर्शनी मैदान में कैटल शो रहेगा। शो में उन्नत नस्ल के दुधारू पशु रेंप से गुजरेंगे और इस तरह की प्रतियोगिता में श्रेष्ठ रहने वाले पशुओं के मालिकों को ईनामों से सम्मानित करेंगे। प्रथम ईनाम 2 लाख 50 हजार रुपए ,जबकि रनर अप को 1 लाख रुपए मिलेंगे। सांत्वना पुरस्कार 31, 21 व 11 हजार रुपए के होंगे।
अप्रैल में होगा बड़ा आयोजन
फिलहाल सरकार इस पर नई रणनीति आज बनाएगी। कुरूक्षेत्र की एतिहासिक धरती से नया निर्णय सरकार आज लेगी। वहीं अप्रैल में यहीं पर बड़ा आयोजन करने की तैयारी अभी से चल रही है। सूत्रों का कहना है कि अप्रैल में सुभाष पालेकर प्रदेश के करीब 6800 किसानों को प्रशिक्षण देने आएंगे। सरकार पहले ही यह निर्णय ले चुकी है कि सभी गांवों में एक मास्टर ट्रेनर तैयार किया जाएगा। जो कि दूसरे किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे प्रशिक्षण देगा।
1 लाख एकड़ से अधिक बढ़ सकता है एरिया
पिछले दिनों सरकार ने बजट के दौरान यह ऐलान किया था कि प्रदेश में अगले तीन साल में एक लाख एकड़ में प्राकृतिक खेती की जाएगी। अब योजना बनाई जा रही है कि यह एरिया बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए सीएम मनोहर लाल आज नया ऐलान भी कर सकते हैं। कृषि विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. सुरेश गहलावत की अध्यक्षता में पिछले दिनों गुजरात में कृषि विभाग का दल गया था, जो प्राकृतिक खेती के गुर सीखकर आया था।
ये होगा लाभ
सरकार का लक्ष्य है कि एनसीआर इलाकों में प्राकृतिक कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए बकायदा बाजार विकसित किया जाए, ताकि आमजन को जहर मुक्त उत्पादों से मुक्ति मिल सके।
गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आज सरकार की पाठशाला
भास्कर न्यूज | राजधानी हरियाणा
हरियाणा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आज हरियाणा सरकार कुरूक्षेत्र में जुटेगी। गुरूकुल में तीन घंटे की पाठशाला का आयोजन किया जाएगा। इसमें सभी विधायकों, मंत्रियों सहित करीब 200 गणमान्य लोगों के भाग लेने की संभावना है।
कृषि अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में अगले तीन साल में एक लाख एकड़ में प्राकृतिक खेती की योजना है, इसे बढ़ाया भी जा सकता है। इस कार्यशाला में भविष्य की रणनीति को लेकर गहन मंथन किया जाएगा। इस दौरान गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत प्राकृतिक कृषि मॉडल की विधि से अवगत कराएंगे। जबकि सुभाष पालेकर इस कार्यशाला में नहीं आ पाएंगे। वे अप्रैल में किसानों को प्रशिक्षण देंगे। सरकार अप्रैल में बड़े स्तर पर एक आयोजन करने की तैयारी कर रही है। इसमें प्रदेशभर के सभी गांवों के करीब 6800 किसान भाग लेंगे। इन्हें मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा। ताकि ये दूसरे किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति प्रशििक्षत कर सकें।
पशु डेयरी से दूध के अलावा बनाए जा रहे डेयरी प्रोडक्ट, व्यवसाय काे मिल रहा बढ़ावा
देवेंद्र शुक्ला | झज्जर
पशु पालन काे बढ़ावा िमलने के साथ-साथ अब पशुअाें के तबेलाें से डेयरी प्रोडक्ट के रूप में झज्जर अपना स्थान बना रहा है। दूध, दही, पनीर, खोया समेत तमाम तरह की िमठाई झज्जर में बनकर दूर-दराज के शहरों में सप्लाई हो रही हैं। झज्जर के िसलानी व माच्छराैली के डेयरी प्लांट से िनकले उत्पाद झज्जर की पहचान बनते जा रहे हैं। झज्जर पशु पालन िवभाग के िडप्टी डायरेक्टर डाॅ. मनीष डबास ने कहा िक पशु पालन बिज़नेस की खास बात यह है की इसे करने के लिए आपको किसी खास क्वालिफिकेशन की भी ज़रूरत नहीं है।
हर िलहाज से है मुनाफा
डेयरी से कच्चे दूध के अलावा कई तरह के प्रोडक्ट्स जैसे मिल्क पाउडर, घी, पनीर, दही िमठाई की िबक्री हाेती है वहीं फार्म का वेस्ट तक बहुत उपयोगी है और इसका मार्केट में डिमांड भी अच्छी है। गोबर या काऊ डंग आर्गेनिक कम्पोस्ट या वर्मीकम्पोस्ट में उपयोग होने वाला पदार्थ है। गौमूत्रपंचगव्य बनाने के लिए होता है जो की आर्गेनिक फार्मिंग मे नेचुरल कीटनाशक के रूप में प्रयोग होता है। िवभाग के द्वारा अनुसूिचत जाित के िलए 50% सब्सिडी की छूट है। ये छूट दुधारु पशुअाें की खरीद पर है।
ये हैं पशुओं की अच्छी नस्ल
गाय की प्रमुख नस्लों में हरियाणा ब्रीड, गिर व सहीवाल नस्ल है। इसके अलावा फॉरेन ब्रीड्स होलस्टीन फ्रेज़ियन, जर्सी गाय से भी डेयरी शुरू कर सकते हैं। सामान्यतया एक गौशाला के लिए 40 वर्ग फुट जगह शेड के अंदर चाहिए और 80 वर्ग फुट की खुली जगह चाहिए। छोटे स्केल पे प्रोडक्शन के लिए आपको 20 गाय,भैंस चाहिए जिसमें 3000 वर्ग फुट लैंड एरिया की उपलब्धता जरूरी है।
ऐसे करें डेयरी फार्मिंग
डेयरी फार्मिंग एक बहुत ही बड़ा और प्रॉफिटेबल बिज़नेस है जिसे अगर आप मेहनत के साथ करे तो आप इसमें काफी मुनाफा कमा सकते है। इसलिए आपको अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करने की चिंता करने की ज़रुरत नहीं है। आप अपना प्रोडक्ट इंडिया में किसी भी जगह पे बेच सकते हैं और तो और डेयरी प्रोडक्ट का मार्केट साल भर एक्टिव रहता है। डेयरी फार्म बिज़नेस शुरू करने से पहले आपको पूरी मार्केट रिसर्च करनी होगी।
दूध देने वाले पशुअाें का मेडिकल सुपरविजन जरूरी
डेयरी में बेहतर मुनाफे के िलए गाय भैंस के लिए मेडिकल सुपरविजन का भी इंतजाम करना पड़ेगा जिससे की उनकी देखभाल अच्छे से होती रहे और वह दूध देने के लिए स्वस्थ रहे। गाय, भैंस के खाने के लिए भूसा का इंतजाम भी करना होगा, और इसके लिए आपको ऐसी मशीन भी खरीदनी पड़ेंगी जो घास को भूसा बनाने में आपकी मदद करेगी। गाय, भैंस से दूध निकालने के िलए एक स्पेशल मशीन खरीद सकते हैं जो की आपकी मेहनत और समय दोनों बचाएगी। पशु पालक अलग अलग डेयरी प्रोडक्ट्स को बेच सकते हैं। इन सब प्रोडक्ट्स के लिए एक ऐसा प्राइस तय करेंगे जो की आपके सारे खर्चे को भी कवर करले और साथ ही साथ मार्केट में जो प्राइस है उसके आसपास ही हो।
आवेदन के लिए यह दस्तावेज भी जरूरी
{किसान समूह द्वारा स्व-हस्ताक्षरित किये गए बिल की प्रति। {आधार कार्ड की प्रति। {अनुदान क्लेम विभाग के स्थानीय कर्मियों या अधिकारियों के द्वारा प्रमाणित हुआ सब्सिडी के योग्य प्रमाण पत्र। { बैंक पास बुक। {किसानो की खुद की पासपोर्ट साइज़ फोटो और अन्य आवश्यक दस्तावेज।
ऐसे मिलेगा लाभ
{ योजना का लाभ सरकार द्वारा निर्धारित मानको का पालन करने वाले बागवानी किसान ही ले सकते हैं।
{ इसके लिए अलग अलग जिलों के किसान को कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर सरकार द्वारा निर्धारित समय के आधार पर आवेदन करना होगा। हालांकि अभी आवेदन की तारीख निर्धारित नही की गई।
{ उसके बाद अपने जिला के उद्यान अधिकारीयों के पास जाकर अनुदान राशि की पात्रता की एप्लीकेशन देनी होगी।
{ डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट हॉर्ट हरियाणा डॉट जीओवी डॉट इन पर ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते है।
{ जिला उद्यान अधिकारियो के कार्यालय में फार्म भरकर भी दे सकते है।
{ समूह बना है या नही उसकी जांच करने कर बाद जिला उद्धान अधिकारी की संस्तुति पर अनुदान राशि मिल सकेगी।
ये किसान समूह होंगे पात्र
{पहले आओ पहले पाओ वरीयता के आधार पर सभी श्रेणी के किसान समूह को उचित अनुदान प्रदान किया जाएगा।
{एससी/एसटी बीपीएल, महिलाओं, सीमांत, छोटे और मध्यम वर्गीय किसान समूह को वरीयता प्रदान की जायेगी।
{ऐसे समूह को सबसे पहले लाभ मिलेगा जिन्होंने अभी तक किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं लिया।
{ टैक्टर चालित यंत्रों पर अनुदान लेने के लिए टैक्टर का रजिस्ट्रेशन आवेदक के नाम होना चाहिए।
अनुदान योग्य कृषि यंत्र
कई यंत्रों पर अनुदान मिलता है. जिनमें कल्टीवेटर, अहरू, ड्रिल मशीन, थ्रेसर, टैक्टर, दवाई छिडकने की मशीन, फ़र्टिलाइज़र ड्रिल, पैडी राइस ट्रांसप्लांटर, रेज्डबेड प्लांटर, हैप्पी सीडर, श्रेडर, स्वचालित रीपर, स्ट्रॉ रीपर, पंप, स्प्रिंकलर , ड्रिप सिस्टम, पाइपलाइन, रेनगन, फंवारा, रेज्डबेड प्लांटर विथ इंक्लिनेड प्लेट एंड शेपर, रोटावेटर, मल्चर, ट्रेक्टर चलित रीपर कम बाइंडर और लेज़र लैंड लेवलर जैसे और भी कई उपकरण शामिल हैं।
अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकते हैं
1. उन्नत शंकर किस्म का चयन : हरी मिर्च की वीएनआर 75, वीएनआर 603 एरमौर, सोल्जर, एन एनएस 1701, मिनम 74, जुगनी और दीपिका अति महत्वपूर्ण शंकर प्रजातियां है जिन की खेती करने के लिए किसान आजकल के समय में पौध तैयार करने के पश्चात रोपाई कर सकते हैं। वहीं बैंगन की उन्नत शंकर प्रजातियां जिनमें बैंगन की नवकिरण, काला मोती, प्रगति, बैंगन नंबर 39 (चो-चो बैंगन), निशांत, शांति, शारापव्वुआ, श्वेता आदि प्रमुख प्रजातियां हैं। इनकी पौध की रोपाई मार्च-अप्रैल महीनों में कर सकते हैं जिस की फसल वर्षा ऋतु काल में तैयार हो जाती है।
हरी मिर्च और बीज रहित बैंगन की वैज्ञानिक ढंग से खेती कर अधिक उत्पादन ले सकते हैं किसान
राकेश कुमार | गढ़ी बीरबल
प्रदेश में व्यवसायिक स्तर पर सब्जी उत्पादन में हरी मिर्च और बैंगन का महत्वपूर्ण स्थान है। राज्य में हरी मिर्च और बैंगन की काश्त पूरे वर्ष भर में अधिकतम क्षेत्र में की जाती है। हरियाणा प्रांत का जलवायु इन दोनों फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। पूर्व अध्यक्ष सब्जी विज्ञान विभाग हिसार प्रोफेसर सुरेश कुमार अरोड़ा ने बताया कि हरी मिर्च एवं बैंगन की पौध की रोपाई के बाद संयंत्रों या खुले खेत में कीटों के आक्रमण से बचाव के लिए निंबीसिडीन 1500 पीपीएम दवा का 2 से 3 एमएल प्रति लीटर पानी में मिलाकर पौधों को घोल में पूरी तरह से भिगो दें। इस घोल में बैक्ट्रिमाइसीन और बेसिलस सबटिलिस जैविक फफूंद नाशक दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए।
फसल का ऑनलाइन पंजीकरण करवाना जरूरी
प्रोत्साहन प्रक्रिया के अंतर्गत सब्जी उत्पादक किसान सीएससी सेंटर, हरियाणा ई सेवा, मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय के अलावा बागवानी विभाग के कार्यालयों में पंजीकरण करा सकते हैं। किसान पंजीकरण केवल निर्धारित अवधि के दौरान ही कर सकते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए किसान को बिजाई अवधि के दौरान मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना जरूरी है।
यह है प्रोत्साहन प्रक्रिया
{ प्रोत्साहन के लिए जे-फार्म पर बिक्री जरूरी। {जे-फार्म पर बिक्री के बाद बिक्री विवरण पोर्टल पर अपलोड होगा। {बिक्री की अवधि के दौरान यदि फसल उत्पादन संरक्षित मूल्य से कम भाव में बिकता है तो किसान पात्र होगा। {जे-फार्म पर बिक्री तथा निर्धारित उत्पादन प्रति एकड़ (जो भी कम होगा) को भाव के अंतर पर नियमानुसार देय होगा। {प्रोत्साहन की राशि किसान के आधार लिंक बैंक खाते में जारी कर दी जाएगी।
प्याज व टमाटर के लिए 15 मार्च और 6 अन्य सब्जियों के भावांतर भरपाई मूल्य लेने को 31 तक करें आवेदन
भास्कर न्यूज | रेवाड़ी
बागवानी फसलों के लिए शुरू की गई भावांतर भरपाई योजना के तहत किसान भावांतर मूल्य लेने के लिए अब 8 सब्जियों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। टमाटर व प्याज के संरक्षित मूल्य लेने के लिए 15 मार्च अंतिम तिथि निर्धारित है। इनके आवेदन 15 दिसंबर से शुरू हुए थे। वहीं, भिंडी, घीया, करेला, मिर्च, बैंगन व शिमला मिर्च के लिए सब्जी उत्पादक किसान 31 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। इन सब्जियों के लिए आवेदन फरवरी में शुरू हो गए थे। भावांतर भरपाई से संबंधित ज्यादा जानकारी के लिए किसान जिला स्तर पर बागवानी विभाग के जिला उद्यान अधिकारी या मार्केटिंग बाेर्ड के डीएमईओ से भी संपर्क किया जा सकता है।
फसलों को खराब होने से बचा सकेंगे किसान
मेघदूत मोबाइल एप पर पांच दिन के लिए परामर्श की जानकारी दी जाएगी। सप्ताह के प्रति मंगलवार व शुक्रवार को एप बताएगा कि आगामी दिनों में मौसम कैसा रहेगा। बारिश, तेज हवा व कोहरे के दौरान किसानों को क्या करना चाहिए। किसान मेघदूत एप के जरिए बारिश से पहले जानकारी लेकर फसलों में पानी देना या नहीं की जानकारी लेकर अपनी फसल को सुरक्षित रख सकेगा। इसके इलावा पशुओं में भैंस, गाय, मछली उत्पादन की जानकारी मिलेगी। भैंस व गाय की देखभाल के आहार क्या खिलाना है। बीमारी के आने से पहले कौन सा टीकाकरण करवाना है। किस सीजन में पशुअाें काे काैन से टीके लगवाने हैं,इसकी भी विस्तार से जानकारी मिलेगी।
मेघदूत एप से किसान मोबाइल से ले सकेंगे मौसम की जानकारी
राेहित ग्राक | करनाल
अब किसान घर बैठे ही मोबाइल से मौसम का हाल जान सकेंगे। इसके लिए हाल ही में मौसम विभाग व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली ने मेघदूत एप लाॅन्च किया है। इसके द्वारा किसान मौसम के साथ-साथ कृषि की भी जानकारी ले सकेंगे। एप के अंदर तापमान, बारिश, आर्द्रता, हवा की गति अाैर हवा की दिशा से संबंधित पूर्वानमान संबंधी जानकारियां समय-समय पर मिलेंगी। इस एप से किसान अपने पशुओं व फसलों की देखभाल आसानी से कर सकेगा।
किसानों को मेघदूत एप पर स्थान, फसल और पशुधन, विशिष्ट मौसम अधारित जानकारी मिलेगी। मौसम का पूर्वानुमान पता चलने से लेकर बारिश की स्थति स्पष्ट होगी। किसान समय अनुसार ही फसलों में बीमारी आने से पहले दवाई की छिड़काव व पानी दे सकेंगे। इससे किसानों के पैसे की बचत होगी। कृषि की फसल की जानकारी देने के लिए ये एप किसानों की अहम भूमिका निभाएगा। इस एप के जरिए किसानों को मौसम व पशुओं की देखभाल के लिए डॉक्टरों से परामर्श लेना नहीं पड़ेगा। ये मेघदूत एप को बनाने का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल परामर्श व मौसम की जानकारी के लिए भटकना न पड़े।
बारिश के पानी को गेहूूं की फसल से निकाल दें
करनाल | भरतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के निदेशक डाॅ. जीपी सिंह ने कहा कि अगले 3 दिन बरसात होने के आसार है। फिलहाल गेहूं की फसल में कोई नुकसान नहीं हुआ है। ज्यादा बारिश होने पर गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है। जब तक मौसम खराब चल रहा है किसान गेहूं में सिंचाई न करें। मौसम साफ होने के बाद जरुरत के अनुसार पानी लगाएं। बरसात के कारण जहां पर ज्यादा पानी भर जाए, उसे तुरंत निकाल दें। 15 मार्च तक गेहूं में कोई स्प्रे भी न करें। वातावरण में नमी की अधिकता के कारण गेहूं की फसल में पीला रतुआ का प्रकोप हो सकता है। इसको देखने के लिए किसान खेत में पत्तों को हाथ से रगड़ने पर हाथ पीला हो जाता है तो यह यह पीले रतुआ के लक्षण हैं।
एनडीआरआई में 3 दिवसीय पशुपालन मेला 13 से
प्राकृतिक होगा खानाप्राकृतिक खेती से खाना भी प्राकृतिक ही होगा। सुबह नास्ता, फिर लंच दिया जाएगा। इसमें खीर गन्ने के रस से बनी शक्कर वाली खीर विशेष रूप से तैयार कराई जाएगी। प्रतिभागियों को जूट के थैले, शक्कर व गुड़ भी दिया जाएगा।
इनको दिया है न्योता
कार्यक्रम में सभी 90 विधायकों, मंत्रियों, जिला परिषद चेयरमैन, ब्लाक समति चेयरमैन के अलावा हरियाणा के तीनों विश्वविद्यालयों के वीसी, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एसीएस पीके दास, कृषि एवं कल्याण विभाग के एसीएस संजीव कौशल के अलावा दो अन्य विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, एचओडी कृषि विभाग, बागवानी विभाग, सीए मार्केटिंग बोर्ड, एमडी हैफेड के अलावा अन्य अधिकारियों को भी न्योता भेजा गया है।
ये होगा शेड्यूल
आज कुरुक्षेत्र में होने वाली एक दिवसीय कार्यशाला सुबह 10 बजे शुरू होगी। यह एक बजे तक चलेगी। इसमें हिमाचल प्रदेश व एचएयू हिसार के वैज्ञानिक प्राकृतिक खेती को लेकर अपनी प्रेजेंटेेशन पेश करेंगे। यही नहीं इस दौरान गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत प्राकृतिक कृषि मॉडल के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। दोपहर एक से दो बजे तक लंच होगा। दो बजे के बाद कृषि फार्म का भ्रमण कराया जाएगा।
{घी-शक्कर, गन्ने के रस की खीर का स्वाद चखेंगे विधायक एवं मंत्री
गुजरात के राज्यपाल सिखाएंगे प्राकृतिक कृषि के गुर
हिसार में 5 किसान समूह ने अनुदान के लिए किया आवेदन
सीधे खाते में होगा अनुदान राशि का भुगतान: किसान समूह को कृषि यंत्रों पर मिलने वाली अनुदान राशि का भुगतान सीधा उनके बैंक खाते में किया जाएगा. ताकि भुगतान की पारदर्शिता बनी रहे।
उद्यान विभाग ने बागवानी किसान समूह के लिए भी निकाली नई योजना
पौधों को सहारा (स्टेकिंग)
प्लास्टिक के संयंत्र हो या खुला क्षेत्र हो उनमें प्लास्टिक मल्च का प्रयोग किया जाना अति आवश्यक है। जिससे पानी की बचत होती है और खरपतवारों को रोकने के लिए किसी भी प्रकार का विषैली खरपतवार नाशक दवाइयों का प्रयोग निषेध है। और उसके उपरांत पौधों को सहारा देने के लिए पतले-पतले बांसों को गाड़कर उनमें 3- टायर विधि द्वारा नायलॉन की रस्सी बांधकर इन पौधों की टहनियों को रस्सी पर गिरा दिया जाता है जिससे फल भूमि को नहीं छूते और गुणवत्ता से भरपूर रहते हैं। कभी खराब नहीं होते। डॉ सुरेश कुमार अरोड़ा ने बताया कि बागवानी विभाग, हरियाणा सरकार द्वारा इन बांसों पर भी अनुदान की राशि प्रदान करवाती है।
7 जोन में बांटा प्रदेश : जोन अनुसार प्रदेश को 7 भागों में बांटा गया है। जिनमें जोन एक में अंबाला, यमुनानगर, कुरूक्षेत्र, पंचकूला, जोन दो में करनाल, सोनीपत व पानीपत, जोन तीन में रोहतक, जींद, कैथल व झज्जर, जोन चार में गुड़गांव व नूंह, जोन पांच में हिसार, फतेहाबाद व सिरसा, जोन-6 में भिवानी, चरखी दादरी, रेवाड़ी व नारनौल के अलावा जोन सात में फरीदाबाद व पलवल जिले की मंडियां शामिल हैं।
मोबाइल प्ले स्टोर से करें डाउनलोड, 10 भाषाओं में मिलेगी जानकारी
मेघदूत एप्लीकेशन सभी किसान व सामान्य व्यक्ति मोबाइल में प्ले स्टोर से अंग्रेजी, हिंदी सहित अन्य 10 भाषाओं में आसानी से डाउनलोड कर सकेगा। एप्लीकेशन में अपना नाम, स्थान भरकर अपने नंबर का पंजिकृत करना होगा । जिसके बाद किसान मेघदूत की सुविधाओं का फायदा उठा सकेंगे। किसानों को दूसरे व्यक्तियों से मौसम का हाल जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।
{हर सप्ताह किसानों काे मिलेगी अपडेट जानकारी
मौसम विभाग व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली ने मेघदूत एप लाॅन्च किया
महबूब अली | हिसार
बागवानी किसान समूह के लिए एक और खुशखबरी है। कृषि किसानों की तरह बागवानी किसान समूह भी कृषि यंत्र खरीदने पर 80% तक का अनुदान प्राप्त कर सकेंगे। बागवानी किसान समूह की लगातार चली आ रही मांग पर उद्यान विभाग हरियाणा ने बागवानी किसानों को भी अनुदान देने का निर्णय लिया है। हालांकि अनुदान लेने वालों में बागवानी किसान समूह से जुड़े लोग ही शामिल रहेंगे। जिला उद्यान अधिकारी सुरेंद्र कुमार सिहाग ने बताया कि अभी तक खेती-बाड़ी करने वाले किसानों को कृषि यंत्र खरीदने पर 50 से लेकर 80% तक अनुदान दिया जाता था। बागवानी किसान समूह से जुड़े किसानों को अनुदान नहीं मिलता था । कुछ किसानों ने सरकार से बागवानी किसान समूह को भी अनुदान दिलाने की मांग की थी। मांग को नमान लिया है। बागवानी किसान समूह को 80% तक अनुदान मिल सकेगा। इसके लिए किसानों को रजिस्ट्रार ऑफिस में बागवानी किसान समुह के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। इसके बाद जिला उद्यान विभाग की टीम जांच करेगी। जांच के बाद यंत्र पर किसानों को 80% तक अनुदान दिया जाएगा। अनुदान मिलने के बाद बागवानी किसान समूह भी जहां सही से उत्पादन कर सकेंगे। साथ ही आय में भी बढ़ोतरी कर सकेंगे। उन पर अधिक भार भी नही पड़ेगा। किसानों की आय बढ़ाने और उनकी आर्थिक मदद के उद्देश्य से ही उक्त योजना चलाई गई है।
डीसी निशांत कुमार यादव ने अधिकारियों की बैठक लेकर प्रबंधों की समीक्षा की।
हिसार | राजली गांव में जांच करने पहुंची जिला उद्यान विभाग की टीम।
3. पौध की रोपाई संयंत्रों एवं खुले क्षेत्र में दोपहर के पश्चात की जानी चाहिए। ताकि गर्मी के कारण पौध को कोई नुकसान न हो। रोपाई के तुरंत बाद टपका सिंचाई विधि द्वारा जिसमें सूड़ोमोनाश एवं ट्राइकोड्रमा मिश्रित होता है उसे देना चाहिए। हाल के समय में किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि वे प्रतिदिन दिन में दो बार सुबह और शाम के समय सिंचाई करें।
2. पॉलीहाउस हाउस/ नेट हाउस में हरी मिर्च एवं बैंगन की रोपाईः पॉलीहाउस हाउस नेट हाउस में वीर जी, क्रांति 341, सोल्जर एवं नामधारी 1701 जोकि मिर्च की बहुत तीखी शंकर प्रजातियां हैं और इन संयंत्रों में 15 मार्च से मई महीने तक किसान इनकी रोपाई कर सकते हैं। पौध की रोपाई बैड तैयार करके उनके ऊपर की जाती है।
किसान के आधार लिंक बैंक खाते में दी जाएगी प्रोत्साहन की राशि
आलू/बैंगन/भिंडी/लहसुन/बरबटी : फसलों में रसचूसक कीट के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 180 मिली या थायोमिथाक्सम 25 डब्ल्यूजी 100 ग्राम या एसिटामिप्रिड 20 एसपी 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
 काम की**
पानीपत | सब्जी व फल के व्यापारी बैरागी ज्ञान सिंग सीतामाई के अनुसार मंडी में मटर 40 से 45 रुपए, बैंगन 18 से 20 रुपए किलो, धनिया 15 से 18 रुपए, लहसुन 70 से 80 रुपए, हरी मिर्च 50 से 55 रुपए किलो, पेठा 30 से 35 रुपए किलो, आलू 18 से 20 रुपए किलो और प्याज 30 से 35 रुपए किलो, खीरा 28-30 रुपए, घीया 15 से 18 रुपए, टमाटर 15 से 18 रुपए किलो, अदरक 75 से 80 रुपए किलो, पत्ता गोभी 20-22 रुपए, शिमला मिर्च 50 से 55 रुपए किलो, तोरी 55 से 60 रुपए, मैथी 35 से 40 रुपए, करेला 65-70, भिंडी 60-65 रुपए किलो मंडी में बिक रहा है।
मंडी समीक्षा**
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सेक्टर-29, हुडा,
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हिसार, गुरुवार 12 मार्च, 2020
खेत से खुशहाली तक आपके साथ