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एक ही गेट से आ-जा सकेंगे मरीज, मुख्यद्वार पर बनेगा फ्लू क्लीनिक, यहां रोगियों की होगी जांच और छंटनी

एक वर्ष पहले
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बदलते मौसम और फिजा में ठंडक बरकरार रहने के चलते कोरोना वायरस से बचाव एवं रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग और सतर्क हो गया है। सिविल अस्पताल के अंदर आने-जाने के लिए एक ही गेट खुला रहेगा। बाकी गेट बंद रखे जाएंगे, ताकि कोई संक्रमित व्यक्ति इधर-उधर घूमकर अन्य रोगियों व लोगों को संक्रमित न कर पाए। इसलिए सिविल अस्पताल के अंदर बनाए फ्लू क्लीनिक को अब मुख्यद्वार पर बने कमरे में शिफ्ट किया जाएगा। यहां पर स्टाफ नर्स तैनात रहेगी जोकि फ्लू ग्रस्त मरीजों के स्वास्थ्य की जांच करके उनकी छंटनी की जाएगी।

ट्रेवल हिस्ट्री व संपर्क में आए लोगों की जानकारी ली जाएगी। बुखार 100 डिग्री से ज्यादा है, खांसी, जुकाम, गले में दर्द सहित सांस लेने में दिक्कत है तो उन्हें आइसोलेशन वार्ड में भेजा जाएगा। वहां पर रेपिड रिस्पोंस टीम उनकी स्वास्थ्य की जांच करके तय करेगी कि कोरोना वायरस संदिग्ध है या नहीं। अगर लक्षण लगे तो सैंपल लेकर लैब में भिजवाया जाएगा। अगर सामान्य रोगी हैं तो ओपीडी में डॉक्टर की सलाह से दवा का सेवन करते हुए घर पर आराम करें। कोरोना संदिग्ध रोगियों को लाने-लेकर जाने के लिए 24 घंटे एक एंबुलेंस व स्टाफ की नियुक्ति की है। इन्हें खुद को वायरस से बचाव के उपाय भी बताए हैं। स्वास्थ्य मुख्यालय से प्रशिक्षण लेकर आए डॉक्टर, माइक्रो बायोलॉजिस्ट सहित अन्य विशेषज्ञों ने अस्पताल के सोसायटी ऑफिस में डॉक्टर्स, स्टाफ नर्साें, पैरा मेडिकल स्टाफ और लैब टैक्निशियनस को ट्रेंड किया। सबसे ज्यादा हैंडवॉश पर ध्यान देने के लिए कहा है, क्योंकि हाथ संक्रमित होंगे तो उससे बीमार होने की संभावना ज्यादा रहती है।

रिटेल केमिस्ट का फैसला : डॉक्टर लिखेगा तभी मिलेगा मास्क और सेनिटाइजर, दवाइयों पर छूट 15 फीसद तक

हिसार होलसेल एंड रिटेल केमिस्ट एसाेसिएशन के प्रधान सतीश आहुजा की अध्यक्षता में केमिस्टों की बैठक हुई। इसमें नागोरी गेट एरिया के करीब 15 केमिस्ट मौजूद थे। सभी ने फैसला लिया कि मास्क और सेनिटाइजर कालाबाजारी रोकने के लिए इनके गैर जरूरी इस्तेमाल पर अंकुश लगाना होगा। उन्होंने फैसला लिया कि डॉक्टर अगर मरीज को मास्क व सेनिटाइजर के प्रयोग की सलाह लिखित में पर्ची पर देता है तो उन्होंने मुहैया करवाए जाएंगे। जिनके पास डॉक्टर की प्रिसक्राइब पर्ची नहीं हाेगी, उन्हें न मास्क बेचेंगे और न सेनिटाइजर। एसोसिएशन ने फैसला लिया कि दवा कंपनियों ने मार्जन काफी कम दिया है। केमिस्ट 15 फीसद से ज्यादा किसी दवा पर छूट नहीं देंगे।

हेड कैशियर को मुंह को छूने से पहले सेनिटाइजर से धोने होंगे हाथ

आरबीआई की तरफ से बैंक प्रबंधकों को दिशा-निर्देश जारी हुए हैं। यहां पर बायोमीट्रिक हाजिरी की जगह मैन्युअल रजिस्टर में हाजिरी लगवाने के लिए कहा है। इसके अलावा हेड कैशियर ही नोटों का लेन-देन करता है। ऐसे में नोटों के जरिए संक्रमण हाथों में पहुंचता है। ऐसे में हेड कैशियर को हिदायत दी है कि अगर जब मुंह को छूना हो तो सेनिटाइजर से हाथ धोएं। हर आधे घंटे में यह प्रक्रिया अपनाए, ताकि संक्रमण से बचाव रहे।

एंबुलेंस और गेट हैंडल की होगी सफाई

कोरोना वायरस संदिग्ध व पॉजिटिव रोगी को लाने-लेने जाने वाली एंबुलेंस में संक्रमण खत्म करने के लिए 0.5 फीसद हाइपो क्लोराइट से सफाई होगी। उक्त केस आने पर एंबुलेंस ड्राइवर, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन को पर्सनल प्रोटेक्टिव किट पहनने होगी। इसके साथ ही अस्पताल के सभी गेट के हैंडल्स की कैमिकल से नियमित सफाई होगी, ताकि कोई अन्य व्यक्ति संक्रमण की चपेट में न आए।

केरल से आया निजी अस्पताल का कर्मी, जांच में मिला फिट

सिविल अस्पताल में बुधवार को निजी अस्पताल का कर्मी स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंचा। उसने डॉक्टर्स को बताया कि मैं केरल गया था। वहां कोरोना वायरस रोगियों के संपर्क में आया था। जिस सिनेमा हॉल में फिल्म देखी थी, वहीं सबसे पहले रोगी के होने की पुष्टि हुई थी। थोड़ी तबीयत बिगड़ी तो वायरस संक्रमित का अंदेशा हुआ जिसके चलते आइसोलेशन वार्ड में दाखिल हुआ। फिजिशियन डॉ. अजीत लाठर ने जांच करके बताया कि वह फिट है। वायरस ग्रस्त या संदिग्ध नहीं है। फ्लू है जिसके तहत दवा का सेवन और आराम करने की सलाह दी है। इसके अलावा कुम्हारन मोहल्ला, डोगरान मोहल्ला और चीन से आए तीन लोगों ने स्वास्थ्य की जांच करवाई है मगर वे भी फिट मिले। करीब 10 से ज्यादा संदिग्ध आ चुके हैं मगर सभी स्वस्थ हैं।

चीन के वुहान जैसे हालात पैदा होने से रोकने के लिए इंडिया अब स्थानीय रोगियों की पहचान करके इलाज पर दे रहा ज्यादा ध्यान

चीन की वुहान सिटी जैसे हालात पैदा होने से रोकने के लिए इंडिया अब दूसरी स्टेज पर काम करके वायरस से बचाव एवं रोकथाम का प्रयास कर रहा है। पहली स्टेज विदेशों से आए लोगों की ट्रेवल हिस्ट्री जानकर उनका ट्रीटमेंट करना था, लेकिन अब दूसरी स्टेज यानी स्थानीय रोगियों पर ज्यादा फोकस है। इन्हें वायरस से बचाना जरूरी है ताकि ये फैले नहीं। अगर वायरस फैलेगा तो तीसरी स्टेज यानी कम्युनिटी ट्रांसमिशन की नौबत आ जाएगी। तब वुहान की तरह पूरा एरिया सील करना पड़ेगा। वहां कोई नहीं जा सकेगा। इसके अलावा कोई बाहर भी नहीं जा सकेगा। हेल्थ टीम की निगरानी में वहीं आइसोलेशन वार्ड स्थापित करके इलाज शुरू होगी। तब पुलिस की मदद भी लेनी पड़ेगी ताकि कोई विरोध न हो। फूड सेफ्टी, ट्रांसपोर्ट इत्यादि विभागों का सहयोग लिया जाएगा। 3 से 7 किलोमीटर के दायरे में स्पेशल जागरूकता व स्क्रीनिंग का अभियान चलाया जाएगा।

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