फोटो ऑफ द डे. ट्रेन से करनाल फिर साइकिल से बूथ पर पहुंचे मनोहर

Hisar News - करनाल| सीएम मनोहर लाल खट्टर सोमवार सुबह चंडीगढ़ से जनशताब्दी एक्सप्रेस में सवार होकर मतदान के लिए करनाल पहुंचे।...

Oct 22, 2019, 07:21 AM IST
करनाल| सीएम मनोहर लाल खट्टर सोमवार सुबह चंडीगढ़ से जनशताब्दी एक्सप्रेस में सवार होकर मतदान के लिए करनाल पहुंचे। करनाल स्टेशन से वे ई-रिक्शा पर सवार होकर अपने घर पहुंचे, जहां उन्होंने चुनाव कार्यालय बना रखा था। यहां से वे साइकिल पर सवार होकर पोलिंग बूथ नंबर 173 पर मतदान करने पहुंचे।

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तीन दशक में सबसे कम वोटिंग के बीच...

‘मनो 2’ का ट्रेलर आउट

इस बार 66.77% मतदान, 65.86% था 1991 में, सबसे कम 57.26% वोटिंग हुई थी 1968 में


भास्कर न्यूज | राजधानी हरियाणा

छिटपुट घटनाओं के बीच सोमवार को विधानसभा चुनाव में 66.77 फीसदी वोटिंग हुई है। पिछली बार 2014 में रिकॉर्ड 76.13 से यह 9.36 फीसदी कम है। साथ ही यह राज्य के इतिहास में अब तक हुए 13 चुनावों में यह दूसरा मौका है, जब इतना कम मतदान हुआ है। यह करीब तीन दशक का सबसे कम मतदान है। जबकि 1968 में सबसे कम 57.26 फीसदी मतदान हुआ था। इस बार पानीपत सिटी और बादशाहपुर में सबसे कम 45 और टोहाना में सर्वाधिक 80.56 फीसदी वोटिंग हुई। इसके बाद शाम में आए विभिन्न एजेंसियों व चैनलों के एग्जिट पोल में भाजपा को औसतन 70 सीटें मिलती दिखीं, जिसे ‘मनो 2’ यानी इसे मनोहर लाल सरकार की वापसी का ट्रेलर कहा जा सकता है। मतदान में रोचक ट्रेंड यह भी रहा कि भाजपा ने जिन 12 मौजूदा विधायकों की टिकट काटी, उनमें 7 सीटें ऐसी हैं जिन पर औसत से कम वोटिंग हुई है। इनमें पानीपत सिटी में 45, रेवाड़ी में 62.67, गुरुग्राम में 51.20, फरीदाबाद में 49.63, बादशाहपुर में 45, अटेली में 60, पटौदी में 50 फीसदी मतदान हुआ है, जो प्रदेश के औसत मतदान से कम है। वहीं कुल 5 सीटें रादौर में 68.20, गुहला में 73.23, सोहना में 70, कोसली में 65.78 और मुलाना सीट पर 72.20 फीसदी मतदान हुआ जो प्रदेश के औसत मतदान से ज्यादा है। मंत्रियों, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और स्पीकर की 13 में से 8 सीटों पर मतदान प्रदेश के औसत वोटिंग से ज्यादा हुआ है।

एनालिसिस . ना लहर, ना एंटी इन्कम्बेंसी, ना मजबूत विकल्प, इसलिए कम मतदान

लहर फैक्टर इसलिए: 2014 में देश में जबरदस्त मोदी लहर थी। लिहाजा हरियाणा ने रिकॉर्डतोड़ 76% मतदान किया। इस बार ना लहर थी, ना एंटी इन्कम्बेंसी।

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जीटी बेल्ट: 27 में भाजपा की 22 सीटें, 11% कम वोट


पश्चिमी हरियाणा: पिछले चुनाव में 81.76 प्रतिशत, इस बार 70 प्रतिशत वाेटिंग


...और यहां बड़े चेहरों का हाल

करनाल: यहां से मुख्यमंत्री मनोहर लाल चुनाव मैदान में हैं। वे भाजपा के सीएम चेहरा हैं। पिछले चुनाव में इस सीट पर 67.84 फीसदी लोगों ने वोटिंग की थी। इस बार यहां वोट देने को 18 फीसदी कम लोग घरों से निकले। यहां 49.30% वोटिंग हुई है। उनके सामने कांग्रेस के त्रिलोचन सिंह ने चुनाव लड़ा।

गढ़ी-सांपला-किलोई: भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा को भाजपा के सतीश नांदल ने कड़ी टक्कर दी है। मतदान 73.81% से गिरकर 67.10% हुआ। यहां मतदान गिरा है, लेकिन प्रदेश के आैसत मतदान से ज्यादा है।

मंत्रियों और बड़े नेताओं के गढ़ में भी गिरा मतदान का ग्राफ | पढ़िए साथ वाले पेज पर

जाटलैंड: हुड्‌डा के गढ़ में 8% कम मतदान


उचाना कलां: पिछली बार की तरह इस बार भी मुकाबला बीरेंद्र सिंह की प|ी प्रेमलता व दुष्यंत चौटाला में है। अंतर इतना है कि पिछली बार दुष्यंत इनेलो से थे। इस बार खुद की जजपा से हैं। पिछली बार यहां 85.12% हुआ था, जो इस बार गिरकर 67% पर आ गया है।

ऐलनाबाद: इनेलो की कमान संभाले अभय चौटाला अपना गढ़ बचाने को यहां से बाहर नहीं निकले। उनके सामने इस बार फिर से भाजपा के पवन बैनीवाल रहे। पिछली बार 89.30% मतदान हुआ था, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा था। परंतु इस बार यहां 19% से ज्यादा गिरकर 70% मतदान हुआ है।

विकल्प ना होना वजह इसलिए: चुनाव से पहले ही कांग्रेस बुरी तरह बिखर गई। अशोक तंवर प्रकरण ने पार्टी की छवि गिराई, फिर टिकट वितरण से हुई बगावत से प्रदेश में गलत संदेश गया।

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मायने. यहां वोटिंग प्रतिशत से स्पष्ट नहीं होता सरकार रिपीट होगी या नहीं

हरियाणा में कम-ज्यादा वोटिंग से यह स्पष्ट नहीं होता कि सत्ताधारी पार्टी दोबारा सरकार बनाएगी या नहीं। 1966 के बाद 1967 में पहले ही चुनाव में 72.75%वोटिंग हुई और कांग्रेस दोबारा सत्ता में आई। जबकि 1968 में हुए मध्यावधि चुनाव में वोटिंग 57.26% वोटिंग हुई, लेकिन सरकार नहीं बदली। 1977 में 64.46% वोटिंग में भी हरियाणा ने सरकार बदल दी और एक ही जनता पार्टी को 90 में 77 सीटें भी दे दी थी। 1987 में 71.24 तो 1991 में 65.86% वोटिंग हुई। दोनों ही दफा सत्ता परिवर्तन हुआ। 2014 में हरियाणा में रिकॉर्ड 76.13% वोटिंग हुई और सरकार बदल गई।

रोचक : भाजपा सत्ता में आई तो दोबारा सरकार बनाने वाली पहली गैरकांग्रेस पार्टी होगी

यहां आम चुनाव में कोई भी गैर कांग्रेसी पार्टी पूर्ण बहुमत से दोबारा सत्ता में नहीं आई है। भाजपा सत्ता में आती है तो वह पहली ऐसी गैर कांग्रेसी पार्टी होगी, जो दूसरी बार सरकार बनाएगी। 1977 में जनता पार्टी, 1987 में लोक दल, 1996 में हविपा ने सरकार बनाई। 1998 में भाजपा के सहयोग से इनेलो ने सरकार बनाई और इसके बाद आम चुनाव में दोबारा सत्ता तक पहुंची, लेकिन आम चुनाव में जीतकर वह 2000 में ही आई थी।

एक अन्य बात : इनेलो सबसे कम 29% वोट लेकर सरकार बनाने वाली पार्टी है। 1991 में कांग्रेस ने 33.73 व 2014 में भाजपा ने 33.20% मत लेकर सरकार बना चुकी है।

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