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सामाजिक बहिष्कार के मामले में दलितों के बाल काटने, सामान देने से इनकार करने पर सैलून संचालक और किरयाणा स्टोर मालिक गिरफ्तार

एक वर्ष पहले
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भाटला के बहुचर्चित सामाजिक बहिष्कार प्रकरण में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार है। गिरफ्तार लोगों में एक सैलून संचालक और दूसरा किरयाणा स्टोर मालिक है। आरोप है कि सामाजिक बहिष्कार के चलते सैलून संचालक ने बाल काटने और किरयाणा स्टोर मालिक ने सामान बेचने से इनकार कर दिया था। भाटला के युवक विकास ने दोनों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कराया था। भाईचारा कमेटी के सदस्यों को भी आरोपी बनाया गया। पुलिस ने अब दो आरोपियों सैलून संचालक सुभाष और स्टोर मालिक रामनिवास को गिरफ्तार किया। दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। भाटला में सामाजिक बहिष्कार में सैलून संचालक सुभाष और किरयाणा स्टोर मालिक रामनिवास का इनकार शिकायतकर्ता विकास के मोबाइल फोन में रिकॉर्ड हो गया। इसी रिकॉर्डिंग के आधार पर विकास ने बहिष्कार प्रकरण में पुलिस को शिकायत दी थी। मामले की तफ्तीश के लिए शिकायतकर्ता और दुकानदारों के वॉयस सैंपल लिए गए थे। मधुबन लैब में जांच के दौरान वॉयस सैंपल में तीनों की आवाज मैच हुई।

विकास के अधिवक्ता रजत कलसन ने बताया कि सामाजिक बहिष्कार की घोषणा के बाद विकास ने रामनिवास को किरयाणा का सामान देने और सुभाष को बच्चों के बाल काटने के बारे में फोन किया था। उन्होंने सामाजिक बहिष्कार होने के चलते सामान देने व बाल काटने से मना कर दिया। यह बातचीत विकास के मोबाइल फोन में रिकॉर्ड हो गई। जिसके बाद उसने इस बातचीत की सीडी बनाकर पुलिस को सौंप दी। विकास ने शिकायत में यह आरोप भी लगाया था कि इन दुकानदारों ने भाईचारा कमेटी के सदस्यों संबंधित बिजेंद्र, सतवीर, नरेश, जगदीप, हवा सिंह के दलितों के सामाजिक बहिष्कार के आह्वान पर उसे किराने का सामान देने व बाल काटने से मना किया था। कलसन के अनुसार विकास ने तत्कालीन एसपी हांसी और सेशन जज को शिकायत दी थी। शिकायत को हिसार के तत्कालीन सेशन जज ने एसपी को कार्रवाई के लिए फॉरवर्ड कर दिया था। परंतु तत्कालीन डीएसपी, थाना सदर प्रभारी ने सेशन जज के नाम का झूठा इस्तेमाल कर विकास की शिकायत को खारिज कर दिया था। जिस पर विकास ने फिर हिसार की अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत स्थापित विशेष अदालत में 27 दिसंबर 2018 को याचिका दायर कर हांसी पुलिस को मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने की मांग की थी। जिस पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया ने हांसी पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही है सुनवाई

सामाजिक बहिष्कार प्रकरण में जय भगवान सोढ़ी, विकास, राजेश, अजय भाटला, अमिताभ दाहिया व सुनील ने सुप्रीम कोर्ट में सामाजिक बहिष्कार प्रकरण की जांच हांसी पुलिस से लेकर सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच टीम से करवाने बारे याचिका दायर की थी। जिसमें कोर्ट ने मामले को गंभीर बताया था। हरियाणा सरकार के विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच हरियाणा से बाहर गुजरात तथा उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों से करने की बात कही थी। इसके बाद हांसी पुलिस पर सामाजिक बहिष्कार के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बना हुआ था।

लिए थे आरोपियों के वॉयस सैंपल

अधिवक्ता रजत कलसन ने बताया कि आदेश के बाद हांसी पुलिस ने 1 नवंबर 2018 को विकास की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद 1 साल से अधिक समय तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। फिर अदालत के निर्देश पर पुलिस ने आरोपी रामनिवास, सुभाष तथा शिकायतकर्ता विकास के वॉयस सैंपल लिए।

सामाजिक बहिष्कार प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट लाई पुलिस।
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