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गृहस्थी ही नहीं चलातीं, ये रेलगाड़ी को जोड़ती और दौड़ाती भी हैं

एक वर्ष पहले
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हर दिन 15 से ज्यादा गाड़ियों को इंजन से जोड़ती हैं शकुंतला औैर कमलेश

मन में कुछ करने की ठान ली जाएं ताे किसी भी लक्ष्य काे आसानी से पाया जा सकता है। पड़ाेसियाें के तानाें का जवाब देने के लिए कुछ महिलाओं ने ट्रेन चलाने के लिए लाेकाे पायलट से लेकर डिप्टी एसएस का सफर तय करने की ठानी। यहीं नहीं कड़ी मेहनत के बलबूते बी टैक करने के बाद भी महाबीर कालाेनी की रहने वाली इंदू सैनी सहायक लाेकाे पायलट के पद पर तैनात हुई।

तीन साल से लगातार हिसार से भिवानी, सिरसा काे जाने वाली ट्रेन काे ले जा रही हैं। यही नहीं भाेपाल की रहने वाली कामिनी सिंह चाैहान भिवानी रेलवे स्टेशन पर डिप्टी एसएस के पद पर तैनात हाेकर महिला सशक्तिकरण की मिसाल कायम कर रही हैं। दोनों पुरुषाें के कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही हैं। वाटर कैनन के पद पर तैनात हाेने के बाद अब प्वाइंट मैन के रूप में हिसार रेलवे स्टेशन पर शकुंतला औैर कमलेश ट्रेनों के इंजनाें काे अलग करने का कार्य कर रही है। महिला दिवस पर सशक्तिकरण की मिसाल कायम करने वाली महिलाओं से भास्कर ने बातचीत की। महिलाओं ने संघर्ष की कहानी कुछ इस तरह से बताई।

 काम वो जो नहीं आसान

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हिसार रेलवे स्टेशन पर रेवाड़ी की रहने वाली शकुंतला औैर कमलेश प्वाइंट मैन के रूप में तैनात हंै। प्रतिदिन 15 से अधिक ट्रेनाें औैर मालगाड़ी में इंजन जाेड़ने का कार्य कर रही है। शकुंतला ने बताया कि करीब 27 साल पूर्व ही उसके पति हरि सिंह की बीमारी के कारण माैत हाे गई थी। जिस पर वह पति के स्थान पर वाटरकैनन के पद पर तैनात हाे गई। कुछ समय बाद ही रेलवे ने वाटर कैनन के पद खत्म कर िदए। जिस पर उसे तथा कमलेश काे खलासी के पद पर तैनात कर दिया गया। बताया कि शुरूआत में थाेड़ी बहुत दिक्कत जरूर अाई। मगर स्टाफ के सहयाेग के कारण परेशानी दूर हाेती चली गई। अब वह दाेनाें बखूबी कार्य कर रही है। पिछले करीब दस साल से वह दाेनाें प्वाइंट मैन के पद पर तैनात है।

हिसार रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी के इंजन काे बाेगी से अलग करती शकुंतला।

महाबीर कालाेनी की रहने वाली इंदू सैनी प्रतिदिन हिसार से भिवानी, सिरसा काे जाने वाली ट्रेन काे चलाती हैं। बताया कि उसके पिता सुभाष सैनी मिलिट्री इंजीनियरिंग विभाग में तैनात हैं। बताया कि उसका सपना पहले से ही लाेकाे पायलट बनने का था। हालांकि उसने बी टैक किया ताे परिवार के सदस्य किसी मल्टीनेशनल कंपनी में नाैकरी करने कराना चाहते थे। रेलवे मे लाेकाे पायलट बनने की चर्चा की ताे पड़ोसी भी ताना देने लगे। आवेदन करने पर पड़ोसियों ने परिवार के सदस्याें काे रेलवे में नाैकरी नहीं करने देने की बात कहीं। कहा कि लड़की कभी रेलवे में नाैकरी नहीं कर सकती है। मगर उसने जिद नहीं छाेड़ी। वर्ष 2017 काे वह सहायक लाेकाे पायलट के पद पर तैनात हाे गई।

बीटेक की पर नहीं की नाैकरी, साेच बदलने काे सहायक लाेकाे पायलट बनी

हिसार रेलवे स्टेशन से ट्रेन काे लेकर भिवानी के लिए लेकर जाती हिसार की सहायक लाेकाे पायलट इंदू सैनी

भाेपाल की रहने वाली कामिनी सिंह चाैहान भिवानी रेलवे स्टेशन पर डिप्टी एसएस के पद पर तैनात हैं। बताया कि वर्ष 1994 में वह कुछ अलग करना चाहती थी। डिप्टी एसएस के पद के लिए आवेदन िकया। डिप्टी एसएस पद पर उसका सलेक्शन हाे गया। उसकी पहली पाेस्टिंग वर्ष 1995 में दिल्ली में हुई। कहा कि शुरूआत में उसे थाेड़ी परेशानी जरूर अाई। ड्यूटी के साथ-साथ घर काे संभालना चुनाैती था। मगर स्टाफ के सहयाेग के कारण वह सही से ड्यूटी करने में सफल रही।

पड़ाेसी देते थे ताने, कुछ अलग करने की ठानी बन गई डिप्टी एसएस

भिवानी रेलवे स्टेशन पर काम करती डिप्टी एसएस कामिनी सिंह चाैहान।
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