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स्वाइन फ्लू से ही हुई थी महिला की मौत, स्वैब सैंपल टेस्टिंग रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 04:21 AM IST

Hisar News - सेक्टर-14 निवासी 53 वर्षीय बीमार महिला की मौत स्वाइन फ्लू के एच 1 एन 1 वायरस से हुई थी। सरकारी लैब से आई उसकी स्वैब सैंपल...

Hisar News - haryana news swine flu was caused by the death of the woman revealed in swab sample testing report
सेक्टर-14 निवासी 53 वर्षीय बीमार महिला की मौत स्वाइन फ्लू के एच 1 एन 1 वायरस से हुई थी। सरकारी लैब से आई उसकी स्वैब सैंपल की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। सर्दी के मौसम में स्वाइन फ्लू का प्रकोप जारी है। वहीं जागरूकता के मामले में विभाग की लापरवाही सर्वे टीम उजागर कर चुकी है।

सेक्टर 14 में स्वाइन फ्लू संदिग्ध महिला रोगी की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाही का परिचय देते हुए मृतका के परिजनों को वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया था। इसके परिणाम स्वरूप स्वाइन फ्लू से खौफजदा मृतका के परिजनों ने खुद ही डॉक्टर की सलाह से दवा खरीदकर सेवन किया था। दैनिक भास्कर ने उक्त मामले को प्रकाशित किया था। अब रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद विभाग अफसरों की नींद टूटी। मृतक महिला के घर जाकर उनसे कनेक्टेड लोगों के स्वास्थ्य की जांच देकर संक्रमण से बचाव हेतु दवा दी। बता दें कि बीते बुधवार को 53 वर्षीय महिला को उसके परिजनों ने उपचार के लिए निजी अस्पताल में दाखिल करवाया था। डॉक्टर ने स्वाइन फ्लू होने का अंदेशा जताकर स्वैब सैंपल टेस्टिंग के लिए सरकारी लैब में भिजवाया था। गुरुवार को महिला की मृत्यु हो गई थी। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने मामले में गंभीरता दिखाते हुए बीमारी से बचाव एवं रोकथाम संबंधी कोई एक्टिविटीज नहीं की थी।

लापरवाही : स्वाइन फ्लू संदिग्ध मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में कर रहे दाखिल

स्वास्थ्य विभाग की एक और लापरवाही उजागर हुई है। फिजिशियन स्वाइन फ्लू संदिग्ध मरीजों को आइसोलेटेड रूम की बजाय इमरजेंसी वार्ड में दाखिल कर रहे हैं। इस दौरान मेडिकल ऑफिसर के हस्तक्षेप करने पर कई घंटों बाद मरीजों को आइसोलेटेड रूम में शिफ्ट किया जाता है। मगर वहां जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं न होने पर मरीज नहीं रुकते और उपचार के लिए निजी अस्पताल चले जाते हैं। मेडिकल ऑफिसर की मानें तो अगर इमरजेंसी वार्ड में स्वाइन फ्लू संदिग्ध मरीज दाखिल होंगे तो अन्य मरीजों में संक्रमण फैलने की संभावना कहीं अधिक बढ़ जाएगी। एक तो व्यक्ति पहले से बीमार है और दूसरा उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है। इससे उनके स्वास्थ्य पर वायरस का प्रभाव तेजी से पड़ेगा। बता दें कि सिविल अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में बने आइसोलेटेड रूम में स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। इस रोग में मरीज की सांसें उखड़ने लग जाएं तो उसके लिए कृत्रिम सांस देने के लिए जरूरी वेंटिलेटर नहीं है। यही वजह है कि अभी तक 500 से अधिक लोगों के स्वैन सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे जा चुके हैं। इनमें 99 फीसदी लोगों ने अपना उपचार प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स के पास करवाया है।

इन्हें सबसे ज्यादा खतरा
ये हैं लक्षण :
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