सेवा सुखों की खान है, बंद द्वारों को भी खोल देती है: निरंकारी

Hisar News - कार्यक्रम में ईश्वर की भक्ति कर जीवन सफल बनाने किया आह्वान भास्कर न्यूज | मंडी आदमपुर सिटी साधु भूखा भाव का धन...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:25 AM IST
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कार्यक्रम में ईश्वर की भक्ति कर जीवन सफल बनाने किया आह्वान

भास्कर न्यूज | मंडी आदमपुर सिटी

साधु भूखा भाव का धन का भूखा नाही, जो साधू धन का भूखा वो तो साधु नाहीं। दुनिया में दो तरह के साधू है एक वो जिन्होंने मन को साध लिया है खुद भी ईश्वर की भक्ति करते है और दूसरों को भी ईश्वर की भक्ति के लिए प्रेरणा देते हैं दूसरें वे हैं जो शिष्य के तन-मन-धन पर नजर रखते हैं। वे सिर्फ संग्रह ही करते हैं वो सच्चे साधु नहीं हैं।

रावण ने भगवे रंग के वस्त्र पहनकर सीता जी का हरण किया था और कालनेमी ने भी भगवे वस्त्र धारण कर हनुमान जी को संजीवनी बूंटी लाने से रोकना चाहा था। ऐसे लोगों को साधु नहीं कहा जा सकता। उक्त विचार निरंकारी मिशन के प्रचारक बलदेव निरंकारी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहे। सेवा, सिमरण और सत्संग पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सेवा सुखों की खान है, बंद द्वारों को भी सेवा खोल देती है और बड़े से बड़ा अधिकार भी सेवा से मिलता है। सिमरण से मनुष्य की आत्मा कुन्दन बनती है और रिद्धि-सिद्धि प्राप्त होती है एवं सत्संग वो गंगा है जिसमें कौआ स्नान करें तो वह हंस और हंस स्नान करें तो वह परमहंस बन जाता है। जन्म और मृत्यु के बीच के समय को ही जीवन कहा गया है।

जीवन को राख का ढ़ेर बनने से पहले ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए ताकि उसे आवागमन और चौरासी के बंधन से मुक्ति मिल सके।

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