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इनके पास है आत्मविश्वास का वो चटख रंग जिससे खुद को बनाया संबल और बनी स्वावलंबी, दूसरों को दी प्रेरणा

एक वर्ष पहले
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अंशुल पांडेय }इन दिनाें प्रकृति फागुन के रंगों से सराबोर है, चाराें अाेर फिजाओं में गुलाल की खुशबू महक रही है। इन्हीं रंगों के बीच खुशियों के कुछ ऐसे रंग भी हैं जो महिलाओं के हिस्से के हैं। ये आत्मविश्वास का वो चटख रंग हैं जिनके जरिए महिलाएं खुद को सशक्त बना पर रही हैं । आज अंतराष्ट्रीय महिला दिवस है, ऐसे में हमने शहर की कुछ महिलाओं से बात की जिन्होंने संघर्ष कर ना सिर्फ खुद को संवारा बल्कि समाज में भी अपनी सोच जागरूकता की अलख जगा रही हैं।

स्वरोजगार समूह बना 15000 को दिया रोजगार

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शादी केे बाद कोर्ट की नौकरी छ़ूटी तो खुद काे बनाया स्वावलंबी



2008 में पति से अलग हुई तो बेटियों के करिअर को संवारने में जुट गई

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12 साल पहले सेवानिवृत्त हो साेसायटी चेंज के लिए बन गईं मोटिवेशनल गुरु

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गाली गांव की सुमित्रा ने बताया कि उन्हें अक्सर यहीं लगता था कि महिलाएं अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर करती है। ऐेसे में सुमित्रा ने 10 महिलाओं के साथ जुड़कर स्वरोजगार समूह बनाया और इन महिलाओं को सस्ते दरों पर बैंक लोन दिलवाया। इसके बाद सभी महिलाओं को अचार-पापड़, मणके और चूड़ा बनाने की ट्रेनिंग दी। जिससे महिलाअों को रोजगार मिल सका। सुमित्रा के इस मुहिम के कारण अब तक 15000 महिलाओं को रोजगार दिलाने में सफल रही हैं।

सुमित्रा मंगाली

र्षा बताती हैं कि 2008 में हिसार कोर्ट में जॉब करती थी, मगर जैसे ही शादी हुई ताे पति ने जॉब करने से साफ मना कर दिया। जिससे कोर्ट की नौकरी भी हाथ से निकल गई। मगर इस बीच हर समय मन में एक ही सवाल उठता रहा कि मैं एक साथ घर और परिवार नहीं संभाल सकती और फिर धीरे-धीरे मैंने खुद को संबल बनाने की ठानी और लाहौरिया चौक पर स्टेनो मास्टर के नाम से सेंटर खोला। वर्षा ने बताया कि 6 साल से मैं इस सेंटर को चला रही हूं, अब तक मेरे सेंटर से निकल कर बहुत से बच्चे सरकारी नौकरी हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में लुवास,एचएयू और कोर्ट कॉम्पलैक्स में उनके सेंटर से निकले बच्चों को नौकरी मिली है।

वर्षा मेहता आंत्रप्रेन्योर

क्टर-14 में अपना ब्यूटी सैलून चला रही भावना ने बताया कि 2008 में आपसी मतभेदों के कारण वो अपने पति से अलग हो गई थी, उस समय उनके पास दो बेटियों के साथ एक बेटा भी था। मगर पति ने बेटे को अपने पास रखा और बेटियां भावना के पास रह गई। उस समय भावना ने यह निश्चय लिया कि अब वो अपनी बेटियों को उनके पैरों पर खड़ा करेंगी और उन्होंने दोनों बेटियों का एडमिशन कोस्टोमोलोजी में एडमिशन करवाया और आज उनकी मेहनत के कारण उनकी दोनों बेटियां पल्लवी और अमीना ब्यूटी वर्ल्ड में जाना माना नाम बनकर उभर रही हैं। दोनों ही बेटियों ने फैशन एक्सपो में पार्टिसिपेट किया और टॉप-3 में जगह बनाई। इसके साथ ही ब्राइडल मेकअप कम्पीटिशन में भी रजामुराद से अवार्ड मिला।

भावना
ब्यूटी एक्सपर्ट


रू हसीजा ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में बतौर सीनियर मैनेजर के पद पर 23 साल तक काम किया। वो अक्सर बैंक में बैठे-बैठे लोगाें को अॉब्जर्व करती तो उन्हेें हर चेहरे किसी न किसी इनसिक्योरिटी में दबा हुआ भय नजर आता। लोगों के माथे की इस शिकन ने नीरू हसीजा को कुछ अलग सोचने को मजबूर किया और उन्होंने 12 साल पहले ही ऐच्छिक सेवानिवृत्त ले ली और मोटिवेशनल स्पीकर बन काम करना शुरू किया। इसी समय नीरू ने महसूस किया कि सोसायटी में चेंज लाने के लिए सबसे पहले यूथ पर काम करने की जरूरत है और इस तरह से एक के बाद एक यंगस्टर्स के लिए मोटिवेशनल सेशन आॅर्गेनाइज किए। नीरू 2019 में इंडियन लीजेंड अवार्ड आैर 2018 में 15 मोस्ट इंफ्लुंसर वुमन के रूप में भी चुनी गईं। नीरू कहती हैं कि अगर आप के जीने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा तो आपको यहां खुद में बदलाव लाने की जरूरत है ताकि आप के बाद भी लोग आपको याद कर सके।

नीरू हसीजा माइंड पॉवर कोच
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