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सेहत के लिए यंगस्टर्स चल रहे मेंढक और केकड़ा चाल

एक वर्ष पहले
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{ बंदर चाल : बंदर की तरह फुदकने से भी पैराें पर खिचाव पड़ता है। जिससे पैराें की मांसपेशियां लचीली होती हैं।

{ मेंढक चाल : मेंढक की तरह फूदककर चलने से पूरा शरीर हरकत करता है। इससे रक्त चाप संतुलन में मदद मिलती है।

{ मगरमच्छ चाल : मगरमच्छ चाल चलने से शरीर के ऊपर का भाग मजबूत और लचीला बना रहता है। साथ ही घोड़े की तरह चलना भी सम्पूर्ण शरीर को स्वस्थ रखता है।

{ हाथी चाल : हाथी की चाल चलने से सम्पूर्ण शरीर की मांसपेशियां हरकत करती है और मजबूत होती हैं।

{ छिपकली चाल : छिपकली की तरह रेंगने से भी शरीर सही आकार देता है।

{ कीड़ा चाल : कीड़े की तरह रेंगने से पेट पर विषेश रूप से दबाव पड़ता है जो वजन कम करने में मददगार है।

{ खरगोश चाल : खरगोश की तरह कूदने से पूरा शरीर हिलता है। इससे शरीर में फुर्ती बढ़ती है।

{ मकड़ी चाल : मकड़ी की काॅपी करने से हाथ पैर और पेट पर जोर पड़ता है। इससे कोर स्ट्रेन्थ बढ़ाता है।

केकड़ा चाल

बत्तख चाल

कोर स्ट्रेंथ बढ़ती है, वजन कम होता है साथ ही शरीर में लचीलापन और फुर्ती बढ़ती है**

नैन्सी दलीप } बचपन में हम सब दादा की पीठ पर घोड़े की सवारी करते थे। इससे बच्चों के मजे तो हाेते ही साथ ही दादा अपनी सेहत का ख्याल भी रख लेते थे। एकल परिवार में पल रहे साेशल मीडिया के दौर में बच्चे एेसी जिद करना शायद भूल गए हैं। लेकिन घोड़ा और हाथी बनने का रिवाज हिसार की कई जिम में नजर आ रहा है। जिम ट्रेनर अमन वर्मा ने बताया कि इसने लोग अलग-अलग जानवरों की चाल की कॉपी करते हैं। इससे कोर स्ट्रेन्थ बढ़ती है। वजन कम होता है। शरीर में लचीलापन और फुर्ती बढ़ती है, अाैर तनाव दूर होता है।

{ केकड़ा चाल : केकड़े की तरह अकड़कर चलने में पैराें और हिप बोन पर दबाव पड़ता है। जिससे पैरों की हड्डियां और हिप बोन मजबूत होती हैं।

{ बत्तख चाल : बत्तख की चाल चलते समय पैराें पर जोर पड़ता है जिससे टांगें मजबूत होती हैं।

मकड़ी चाल
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