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छत्रपति हत्याकांड / मातम में बदल गई थी करवाचौथ की रात, घर के बाहर बुलाकर मार दी थी रामचंद्र को गोलियां

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2019, 04:50 PM IST


अंतिम संस्कार के दौरान रामचंद्र छत्रपति का शव। (फाइल) अंतिम संस्कार के दौरान रामचंद्र छत्रपति का शव। (फाइल)
छत्रपति की मौत के बाद पूरे हरियाणा में हुए थे विरोध प्रदर्शन। (फाइल) छत्रपति की मौत के बाद पूरे हरियाणा में हुए थे विरोध प्रदर्शन। (फाइल)
आरोपी कुलदीप को पुलिस ने उसी दिन कर लिया था गिरफ्तार। (फाइल) आरोपी कुलदीप को पुलिस ने उसी दिन कर लिया था गिरफ्तार। (फाइल)
परिवार को शांतवना देने पहुंचे थे तात्कालीन सीएम ओमप्रकाश चौटाला। (फाइल) परिवार को शांतवना देने पहुंचे थे तात्कालीन सीएम ओमप्रकाश चौटाला। (फाइल)
रामचंद्र की याद में आयोजित शोक सभा। (फाइल) रामचंद्र की याद में आयोजित शोक सभा। (फाइल)
पूरा सिरसा शहर रहा था बंद। (फाइल) पूरा सिरसा शहर रहा था बंद। (फाइल)
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अंतिम संस्कार के दौरान रामचंद्र छत्रपति का शव। (फाइल)अंतिम संस्कार के दौरान रामचंद्र छत्रपति का शव। (फाइल)
छत्रपति की मौत के बाद पूरे हरियाणा में हुए थे विरोध प्रदर्शन। (फाइल)छत्रपति की मौत के बाद पूरे हरियाणा में हुए थे विरोध प्रदर्शन। (फाइल)
आरोपी कुलदीप को पुलिस ने उसी दिन कर लिया था गिरफ्तार। (फाइल)आरोपी कुलदीप को पुलिस ने उसी दिन कर लिया था गिरफ्तार। (फाइल)
परिवार को शांतवना देने पहुंचे थे तात्कालीन सीएम ओमप्रकाश चौटाला। (फाइल)परिवार को शांतवना देने पहुंचे थे तात्कालीन सीएम ओमप्रकाश चौटाला। (फाइल)
रामचंद्र की याद में आयोजित शोक सभा। (फाइल)रामचंद्र की याद में आयोजित शोक सभा। (फाइल)
पूरा सिरसा शहर रहा था बंद। (फाइल)पूरा सिरसा शहर रहा था बंद। (फाइल)

  • 24 अक्टूबर 2002 की रात घर में खाने की हो रही थी तैयारी
  • तभी घर के बाहर बुलाकर दिया था घटना को अंजाम

सिरसा (मनोज कौशिक/कुलदीप शर्मा)। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति बताते हैं कि आज भी उस घटना को याद करके पूरे परिवार की आंखें नम हो जाती हैं। उस दिन करवाचौथ था, मां घर में थी नहीं। पापा और दिनों के अपेक्षा जल्दी घर आ गए थे। लेकिन, हमारी ये खुशी ज्यादा देर तक नहीं रही, राम रहीम के गुर्गों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। शुक्रवार को गुरमीत राम रहीम समेत तीन अन्य आरोपियों को सीबीआई कोर्ट ने दोषी ठहरा दिया। छत्रपति का परिवार को 16 साल से इसका इंतजार कर रहा था। उस रात का पूरा वाकया, अंशुल छत्रपति की जुबानी...

हमले की रात रामचंद्र आम दिनों की अपेक्षा जल्दी पहुंच गए थे घर

  1. अंशुल ने बताया कि 24 अक्टूबर 2002 को करवाचौथ था, लेकिन मेरी मां घर नहीं थी। उनके मायके में किसी की मौत हो गई थी, इस वजह से उन्हें पंजाब जाना पड़ा था। पापा हर रोज अखबार का काम निपटाकर 10 बजे तक घर आते थे, लेकिन उस दिन मां घर नहीं थी तो छोटे भाई-बहन ने पापा को घर जल्दी बुला लिया।

  2. पापा 7.30 बजे तक घर आ गए। वे हमारे साथ बैठे हुए थे। लगभग पौने 8 बजे हम खाना खाने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच घर के बाहर से आवाज आई, उसमें मेरे पापा को नाम लेकर बुलाया गया। घर के एक हिस्से में प्लॉट खाली पड़ा था, जिसमें मिट्टी डाली जा रही थी। उस हिस्से की दीवार तोड़ी गई थी, ताकि ट्रैक्टर-ट्रॉली आसानी से अंदर आ सके।

  3. उसी टूटी दीवार की तरफ से आवाज आई थी। पापा भी वहीं से गली में गए। हम भी पीछे-पीछे चल दिए। बाहर दो युवक खड़े थे। जब तक कोई बात होती, उससे पहले ही पीछे खड़े युवक ने कहा कि कुलदीप गोली मार, इतना सुनते ही कुलदीप ने फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग कर दोनों फरार हो गए।

  4. हम भाई खड़े-खड़े इस घटना को देख रहे थे। पापा गोली लगते ही नीचे गिर गए। वो एक बार उठे और फिर घर के बाहर आकर गिर गए। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां से उन्हें बाद में रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया गया। यहां से कुछ दिनों के बाद दिल्ली के अपोलो अस्पताल में रेफर किया गया। जहां 28 दिन के बाद उनकी मौत हो गई। अंशुल कहते हैं कि करवाचौथ की वो रात उनके लिए मातम में बदल गई।

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