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छत्रपति हत्याकांड / रामचंद्र के इस अखबार ने कर दी थी बाबा की नींद हराम, पिता की मौत के बाद बेटे ने संभाली थी कमान

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2019, 07:17 PM IST


पूरा सच की इस खबर के बाद हुआ था धमकियों का सिलसिला शुरु। पूरा सच की इस खबर के बाद हुआ था धमकियों का सिलसिला शुरु।
ram rahim verdict ramchandra chatrapati newspapwer pura sach
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  • पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने रामचंद्र केस में राम रहीम समेत चार को ठहराया है दोषी
     

सिरसा (मनोज कौशिक)। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति केस में शुक्रवार को पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और किशन लाल को दोषी करार दिया है। रामचंद्र के अखबार पूरा सच में छपी साध्वियों की खबर के बाद राम रहीम ने दुश्मनी पाल ली थी। रामचंद्र को पहले धमकियों का सिलसिला शुरू हुआ लेकिन वे यहीं नहीं रुके, उन्होंने परत दर परत राम रहीम के मामलों पर खबरें छापी, जिसके बाद उन पर हमला हुआ। 

2014 में बंद हुआ है पूरा सच का प्रकाशन

  1. रामचंद्र के बेटे अंशुल छत्रपति बताते हैं कि 30 मई 2002 को पूरा सच में धर्म के नाम पर किए जा रहे हैं साध्वियों के जीवन बर्बाद इस शीर्षक से खबर छपी थी। इस खबर ने डेरे में खलबली मचा दी थी। इसके बाद फतेहाबाद के एक दूसरे साध्य अखबार ने डेरे की खबर छापी तो वहां डेरा अनुयायियों ने तोड़फोड़ की। 
     

  2. रामचंद्र ने इस खबर को भी प्रमुखता से अपने अखबार में छापा। उन्होंने साध्वियों द्वारा प्रधानमंत्री और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लिखी गई चिट्ठी को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके चलते 24 अक्टूबर 2002 को रामचंद्र पर हमला हो गया। हमले के दिन भी अखबार छपा। 
     

  3. उनके साथियों ने अखबार का प्रकाशन बंद नहीं किया। रामचंद्र को सिरसा से रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया गया। रोहतक पीजीआई में उनका आप्रेशन हुआ। 26 अक्टूबर को रामचंद्र को होश आया। उन्होंने अपने बेटे को अखबार के दफ्तर में फोन लगाने को कहा। अखबार में उनके साथियों ने फोन उठाया और बातचीत की। 
     

  4. रामचंद्र की मौत के बाद उनके बेटे अंशुल ने अखबार को चलाया। अंशुल बताते हैं कि उन्होंने अपनी जेब से पैसे खर्च कर पिता के अखबार को चलाया। इस दौरान काफी कर्ज भी हो गया। 2014 में उन्होंने अखबार के प्रकाशन को बंद कर दिया। लेकिन रामचंद्र के अखबार ने बाबा के गलत कामों को उजागर करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

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