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फ्लैशबैक / गिरफ्तारी से बचने के लिए रामपाल ने महिला समर्थकों को बनाया था ढाल, झड़प में हुई थी 6 मौतें



पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव के दौरान की फोटो। (फाइल) पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव के दौरान की फोटो। (फाइल)
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पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव के दौरान की फोटो। (फाइल)पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव के दौरान की फोटो। (फाइल)

 

  • दो बार पेश न होने पर हाईकोर्ट ने डीजीपी और मुख्य सचिव को दिए थे गिरफ्तार करने के आदेश
  • 18 नंवबर 2014 को पुलिस ने रामपाल की गिरफ्तारी के लिए शुरू किया था ऑपरेशन 
  • पुलिस और समर्थकों की भिड़त में 200 से ज्यादा लोग हुए थे घायल
  • 2006 में आश्रम के बाहर हुई फायरिंग में एक युवक की मौत से शुरू हुआ था मामला 

Dainik Bhaskar

Oct 16, 2018, 01:36 PM IST

हिसार.   सतलोक आश्रम प्रकरण मामले में दोषी ठहराए गए संचालक रामपाल और उसके बेटे वीरेंद्र समेत 15 को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। सितंबर 2014 में रामपाल की गिरफ्तारी के दौरान हुए बवाल में आश्रम में छह की मौत हो गई थी। इसमें हत्या के दो मामले दर्ज किए गए थे। एफआईअार नंबर 429 में चार महिलाओं और एक बच्चे की हत्या का मामला दर्ज किया था। इस मामले में कोर्ट ने गुरुवार को रामपाल समेत सभी को दोषी ठहराया था। दूसरे मामले में कल यानी 17 अक्टूबर को कोर्ट सजा सुनाएगा। एक महिला की मौत के इस मामले में कोर्ट रामपाल को पहले ही दोषी ठहरा चुकी है। 

गिरफ्तारी को देखते ही जुटने शुरू हुए थे अनुयायी

  1. रात में सरेंडर करने के बाद रामपाल। (फाइल)

     

    2014 में हुए इस प्रकरण की शुरुआत पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के गैर जमानती वारंट के बाद हुई थी। लगातार दो बार कोर्ट में रामपाल के पेश न होने पर हाईकोर्ट ने 5 नवंबर 2014 को डीजीपी और गृह सचिव को आदेश दिए थे कि वह सुनिश्चित करें कि 10 नवंबर 2014 को रामपाल कोर्ट में पेश हो। बस यहीं से शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि उसने रामपाल को जेल की सलाखों के पीछे तक पहुंचा दिया। 

  2. हाईकोर्ट के गैरजमानती वारंट जारी होते ही अगले दिन 6 नवंबर 2014 को रामपाल के हिसार (बरवाला) स्थित आश्रम में अनुयायी जुटने शुरू हो गए। महज दो दिनों में 8 हजार के लगभग अनुयायी जुट गए। सुनवाई के दिन यानि 10 नवंबर 2014 तक अनुयायियों की संख्या बढ़कर 70 हजार तक पहुंच गई। 8 नवंबर को रामपाल के निजी कमांडो ने आश्रम के बाहर सुरक्षा संभाल ली। वे हाथों में डंडे और सुरक्षा कवच लेकर तैनात हो गए। हालात देखते हुए पुलिस ने भी पैरामिलिट्री की 10 कंपनियां और हरियाणा पुलिस की 25 कंपनियां तैनात कर दी थी। हालात बेहद तनावपूर्ण होने के बाद भी रामपाल ने कोर्ट में पेश होने का निर्णय नहीं लिया। 

  3. रामपाल के निजी गार्ड इस तरह से थे तैनात। (फाइल)

    9 नवंबर 2014 को आश्रम के प्रवक्ता ने बयान दिया कि रामपाल तक पहुंचने के लिए पुलिस को अनुयायियों की लाशों के ऊपर से गुजरना होगा। हम पुलिस से टकराने के लिए नहीं खड़े, मरने के लिए खड़े हैं। हजारों अनुयायी आश्रम के बाहर लाठी और सफेद डंडे लेकर खड़े हो गए। 

  4. 10 नवंबर 2014 को वारंट के बाद भी पुलिस रामपाल को गिरफ्तार नहीं कर पाई तो हाईकोर्ट ने पुलिस और सरकार को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि 17 नवंबर तक रामपाल को कोर्ट में पेश करना ही होगा। कोर्ट ने कहा कि यदि रामपाल किसी बंकर में छिपा है तो वहां से गिरफ्तार करके लाए।

  5. पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव के बाद मोर्चा संभाले हुए पुलिस। (फाइल)

    कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) रोशनलाल ने बयान दिया कि 17 नवंबर 2014 को हर हालत में रामपाल को कोर्ट में पेश करेंगे, भले ही कैसी भी स्थिति हो। 14 नवंबर को पुलिस- प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए आश्रम की बिजली काट दी। दूध, सब्जी और खाने पीने की सामग्री की सप्लाई बंद कर दी। 

  6. इससे पहले 15 नवंबर 2014 को बरवाला में 40 हजार जवान तैनात हो गए। ऑपरेशन से पहले राहत व बचाव कार्य के लिए अस्पताल दुरुस्त करवाए गए। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने अपील किया कि वे अदालती आदेश का सम्मान करें और सरेंडर कर दें। 17 नवंबर 2014 को भी रामपाल हाईकोर्ट में पेश नहीं हुआ तो कोर्ट ने सरकार और पुलिस को फिर से फटकार लगाई। कोर्ट ने नई सीमा 21 नवंबर 2014 तय की। 

  7. 18 नवंबर 2014 को आखिरकार पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। इस कार्रवाई में रामपाल समर्थकों और पुलिस के बीच सीधे टकराव हुआ। इसमें 200 से ज्यादा लोग जख्मी हुए। 19 नवंबर 2014 को 60 घंटे तक की घेराबंदी और करीब 56 घंटे की कार्रवाई के बाद रामपाल ने रात में सरेंडर किया। 
     

  8. इस पूरी घटना में 6 की मौत हुई। इसमें एक बच्चे और तीन महिलाओं की मौत आश्रम में हुई। वहीं दो महिलाओं ने मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद रामपाल पर हत्या के दो मामले दर्ज हुए थे।

  9. 2006 के एक मामले में हाईकोर्ट ने जारी किया था वारंट

    2006 में करौंथा के सतलोक आश्रम के बाहर फायरिंग में एक युवक की मौत हो गई थी। इसमें रामपाल और उसके 37 अनुयायियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। बाद में रामपाल को जमानत मिल गई। केस की सुनवाई रोहतक जिला अदालत में चल रही थी। मामले में हिसार कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रामपाल की पेशी थी, जहां रामपाल समर्थकों ने बवाल किया था। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संत रामपाल व उसके अनुयायी राम कुंवर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। जिस पर वह कोर्ट में पेश नहीं हुए और फिर यह सारा विवाद हुआ। 

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