हरियाणा / टिकट के लिए 58 नेताओं ने छोड़ी पार्टी, 34 दूसरे दलों से तो 24 निर्दलीय मैदान में उतरे



58 leaders left party for ticket in Haryana
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58 leaders left party for ticket in Haryana

  • भाजपा ने इनेलो से आए 11, कांग्रेस से आए 3 और शिअद के एक नेता समेत 15 को उतारा
  • कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले 28 नेताओं में से  16 विभिन्न पार्टियों और शेष निर्दलीय मैदान में

Dainik Bhaskar

Oct 08, 2019, 11:26 AM IST

पानीपत. टिकटों के वितरण के दौर में ही सबसे ज्यादा नेता पार्टी छोड़ते हैं। नेताओं को जिससे से टिकट की आस दिखती है, उसी के हो लेते हैं। इस बार भी विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। लोकसभा चुनाव के आसपास और अब तक टिकट की चाह में बड़ी पार्टियों से 100 से ज्यादा नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है, जिसमें विधायकों से लेकर पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री आदि शामिल हैं।

 

इनमें से 58 ऐसे नेता हैं जो अभी चुनाव मैदान में हैं। कुल 34 नेता ऐसे हैं, जिन्हें दूसरी पार्टियों ने मौका पाकर टिकट देकर मैदान में उतार दिया। 24 नेता भाजपा और कांग्रेस में निकल कर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं प्रदेश के 50 से ज्यादा नेता ऐसे हैं, जिन्हें कहीं से टिकट नहीं मिला और वे  निर्दलीय चुनाव में भी नहीं उतर पाए। ऐसा केवल इस चुनाव में नहीं हुआ है इससे पहले 2014 में भी काफी नेताओं ने टिकट की चाह में पार्टी बदली थी, लेकिन अरमान कम के ही पूरे हो पाए थे। बहरहाल, बगावत पर उतारू नेताओं काे पार्टियां लगातार मना रही हैं। इसके लिए दलों ने अभियान चला रखा है। नतीजा यह है कि करीब पांच नेता नाम वापस लेने पर राजी हो गए हैं, पर कई अब भी डट हुए हैं। 

 

इनेलो-कांग्रेस से गए और बीजेपी-जजपा से लड़ रहे

 

  • सबसे ज्यादा नेता इनेलो और कांग्रेस से छोड़कर दूसरी पार्टियों में गए और सबसे ज्यादा भाजपा और जजपा में ऐसे नेताओं को टिकट मिला है।
  • भाजपा ने इनेलो से आए 11, कांग्रेस से आए 3 और शिअद के एक नेता समेत 15 को मैदान में उतारा है।
  • जजपा ने कांग्रेस से आए 10, भाजपा से 3 और आप से आए एक नेता समेत 14 ऐसे नेताओं को टिकट दिया है।
  • कांग्रेस ने इनेलो से आए 2 नेताओं को टिकट दिया है।
  • कांग्रेस से जाने वाले कुल 28 नेता चुनाव लड़ रहे हैं जिनमें से 16 नेता विभिन्न पार्टियों से और शेष निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
  • भाजपा से जाने वाले 13 नेता मैदान में हैं, जिनमें से 5 नेता विभिन्न पार्टियों से तो शेष निर्दलीय मैदान में हैं।
  • इनेलो से जाने वाले 17 नेता चुनाव मैदान में हैं, जिनमें से 13 विभिन्न पार्टियों से तो शेष निर्दलीय मैदान में हैं।

जानिए.... कौन से नेता पार्टी बदल कर किस दल से लड़ रहा चुनाव

 

 

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2014 के विधानसभा चुनावों में 61 ऐसे नेता थे जिन्होनें दलबदल कर टिकट प्राप्त किया था। ऐसे कुछ चेहरों का जिक्र।

 

  • 3 बार पाला बदला: तीन प्रदेशों से मंत्री रहे मरहूम तैयब हुसैन के बेटे जाकिर हुसैन ने तीन बार पार्टी बदली। 2000 में कांग्रेस के टिकट पर जीते, 2005 में बसपा में गए और 2009 में बसपा के टिकट से लोकसभा चुनाव हारे और 2014 में इनेलो में गए।
  • चुनाव से पहले पाला बदलते हैं: पूर्व सांसद डॉ सुशील इंदौरा इनेलो से दो बार सांसद रहे, 2009 में टिकट मिलता नहीं दिखा तो कांग्रेस में गए। 2014 में लोकसभा चुनाव में हजकां में गए और विधानसभा में आजाद चुनाव लड़े।
  • टिकट के साथ चलते हैं: रिटायर्ड अफसर बाहदुर सिंह 2000 में इनेलो की सरकार में शिक्षा मंत्री थे। 2009 में टिकट कटा तो कांग्रेसी बने। लोकसभा चुनाव में भाजपा के हुए। टिकट कटा तो हजकां से उम्मीदवार हुए।
  • 6 बार पाला बदला: इनेलो में थे, फिर हविपा में मंत्री रहे। भाजपा में गए और बाद में हजकां में गए। फिर कांग्रेसी हुए। पुन: हजकां में गए और 2014 में भाजपा से दावेदारी कर दी।
  • टिकट की चाह: केयू में वीसी रहे डॉ एमएल रंगा 2000 में इनेलो में रहे। 2009 में चुनाव के समय कांग्रेसी हुए। जीजेयू के वीसी बने। फिर 2014 में भाजपा से दावेदारी कर दी।
  • पांच दलों में घूमे: देवेंद्र शर्मा 1977 में जनता पार्टी से विधायक बने। फिर कांग्रेस, हजकां के हुए। 2009 में बसपा से लड़े। फिर कांग्रेस में लौटे और 2014 में चुनाव पूर्व भाजपाई बने।

स्रोत. दिलबदल हरियाणा, राजनीतिक किताब।

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