एनालिसिस / हरियाणा में 52 साल में अधिकतम 6% निर्दलीय उम्मीदवार ही विधानसभा पहुंचने में सफल रहे



analysis for the winners as well as losers Independent assembly election candidates
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analysis for the winners as well as losers Independent assembly election candidates

  • 1968 में सबसे कम 161 तो 1996 में सबसे ज्यादा 2022 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतरे
  • 1966 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में 16 निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत हुई, यह सबसे बड़ा आंकड़ा रहा
  • 1982 में निर्दलीय प्रत्याशियों ने ही बिगाड़ा था लोकदल नेता चौ. देवीलाल का खेल, भजन लाल खेमे में जाकर बन गए मंत्री

Dainik Bhaskar

Oct 11, 2019, 12:52 PM IST

पानीपत (बलराज सिंह). हरियाणा में 1967 से अब तक 12 विधानसभा चुनाव हुए हैं। हर चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार भी बड़ी संख्या में उतरते हैं। लेकिन, जीत बहुत कम को मिली है। चुनाव परिणामों के विश्लेषण में यह सामने आया कि अब तक निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत का आंकड़ा अधिकतम 6 प्रतिशत तक ही सिमटकर रहा है। इसके उलट जमानत जब्त कराने वाले आंकड़े भी चौंकाने वाले रहे।

 

घटती-बढ़ती रही निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या

 

चुनावी साल कुल निर्दलीय प्रत्याशी विजयी प्रत्याशी जो जमानत भी नहीं बचा सके
1967 260 16 196
1968 161 6 129
1972 207 11 170
1977 439 7 390
1982 835 16 796
1987 1045 7 1017
1991 1412 5 1397
1996 2022 10 2001
2000 519 11 483
2005 442 10 411
2009 513 7 413
2014 603 5 587

 

 

निर्दलीयों के पाला बदल का सबसे बड़ा उदाहरण

1982 में इंडियन नेशनल कांग्रेस को 35, लोकदल को 31 सीटें मिली, वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों का समूह तीसरे नंबर पर था। इनमें से 6 को साथ मिलाने के अलावा अपने सहयोगियों के दम पर चौ. देवी लाल ने सरकार बनाने के लिए दावा पेश कर दिया, लेकिन हैरानी उस वक्त हुई, वो सभी निर्दलीय भजन लाल के खेमे में जा खड़े हो गए और सरकार में मंत्री बन बैठे। दलबदल की राजनीति का राज्य में अब तक यह सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है।

 

एक रोचक पहलू यह भी

एक रोचक पहलू यह भी है कि वर्ष 2000 में पहली बार किसी क्षेत्रीय पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला, जब ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में इंडियन नेशनल लोकदल की सरकार बनी थी। इसके बाद 2005 और 2009 में कांग्रेस से भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा मुख्यमंत्री रहे। वहीं, अगर बात करें हाल ही में खत्म हुए हरियाणा की भाजपा सरकार के कार्यकाल की तो यह भी राष्ट्रीय पार्टी का नेतृत्व ही है। इससे पहले एक मौका ऐसा भी रहा, जब क्षेत्रीय पार्टी आईसीजे (बीजी) के 19 प्रत्याशियों में से एक भी जमानत बचाने में कामयाब नहीं हो पाया।

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