हरियाणा / विज ने कहा- गृह विभाग से अलग करने पर सीआईडी बिना कान, आंख, नाक वाले आदमी जैसा होगा; पार्टी हाईकमान तक पहुंचाया मामला

गृहमंत्री अनिल विज ने पार्टी हाईकमान में मामला रखा है। दिल्ली चुनाव बाद इसके समाधान की संभावना है। गृहमंत्री अनिल विज ने पार्टी हाईकमान में मामला रखा है। दिल्ली चुनाव बाद इसके समाधान की संभावना है।
X
गृहमंत्री अनिल विज ने पार्टी हाईकमान में मामला रखा है। दिल्ली चुनाव बाद इसके समाधान की संभावना है।गृहमंत्री अनिल विज ने पार्टी हाईकमान में मामला रखा है। दिल्ली चुनाव बाद इसके समाधान की संभावना है।

  • सीएम मनोहरलाल और गृहमंत्री अनिल विज के बीच सीआईडी पर अधिकार को लेकर बढ़ती जा रही कंट्रोवर्सी
  • विज का कहना- वे पार्टी नेतृत्व को इस बारे में अवगत करा चुके हैं; पार्टी का जो फैसला होगा, उन्हें मंजूर होगा

दैनिक भास्कर

Jan 16, 2020, 07:55 AM IST

राजधानी हरियाणा. प्रदेश में सीआईडी को लेकर सीएम मनोहर लाल और गृहमंत्री अनिल विज के बीच कंट्रोवर्सी बढ़ती ही जा रही है। अब मामला भाजपा हाईकमान के पास पहुंच गया है। विज का कहना है कि वे पार्टी नेतृत्व को इस बारे में अवगत करा चुके हैं। पार्टी का जो फैसला होगा, वह उन्हें मंजूर होगा। सूत्रों का कहना है कि इस कंट्रोवर्सी का खात्मा अब हाईकमान ही कराएगा। दिल्ली चुनाव के बाद कोई फैसला लिया जा सकता है। 


विज ने बुधवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री सुप्रीम हैं। वे कुछ भी कर सकते हैं। वे सीआईडी तो क्या, चाहें तो गृह विभाग भी उनसे ले सकते हैं। उन्होंने पत्रकारों को एक्ट की कॉपी भी दिखाई। उन्होंने कहा कि 1974 के कानून में स्पष्ट लिखा है कि सीआईडी, गृह विभाग का ही पार्ट है। सीआईडी को गृह विभाग से अलग कर दिया गया तो यह बिना कान, आंख और नाक वाले आदमी जैसा होगा। उल्लेखनीय है कि सीआईडी की रिपोर्ट फिलहाल गृहमंत्री अनिल विज के अलावा सीएम मनोहर लाल और चीफ सेक्रेटरी केशनी आनंद अरोड़ा को जा रही है। सूत्रों के अनुसार सीआईडी को गृह विभाग से अलग करने की कवायद शुरू हो चुकी है। संभावना जताई जा रही है कि कानून में संशोधन के लिए प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधानसभा में पास कराया जा सकता है।

दूसरे विभागों में काम कर रहे 4 पुलिस अफसरों को वापस मांगा

गृह मंत्री अनिल विज ने कहा है कि पुलिस के चार बड़े अफसर इस समय दूसरे विभागों में कार्यरत हैं। इन अफसरों को पुलिस विभाग की सेवा में होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) को पत्र लिखा है।

इधर, गृहमंत्री के नोटिस के 24 दिन बाद भी 11 जिलों के एसपी-कमिश्नर ने नहीं भेजी पेंडिंग केसों की रिपोर्ट
गृहमंत्री अनिल विज के आदेशों पर आईपीएस अधिकारी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। प्रदेश में पुलिस विभाग में करीब 29 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग हैं। विज ने 1000 से ज्यादा पेंडिंग केसों वाले जिलों के एसपी को 23 दिसंबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 11 जिलों के एसपी-पुलिस कमिश्नरों ने 24 दिन बाद भी जवाब नहीं दिया है। अब रिमाइंडर भेजा गया है। विज ने गृह विभाग के एसीएस व डीजीपी से कहा है कि वे मामले में कड़ी कार्यवाही करें। कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, पानीपत, सिरसा, जींद, करनाल, हिसार, फतेहाबाद, रोहतक, सोनीपत, भिवानी, फरीदाबाद, गुड़गांव के एसपी-कमिश्नरों से जवाब मांगा गया था।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना