जींद / विभाग का दावा: अस्पताल में नहीं किसी भी चीज की कमी, फिर भी 13 दिन में 118 मरीज पीजीआई रेफर

पीजीआई रोहतक (फाइल फोटो)। पीजीआई रोहतक (फाइल फोटो)।
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पीजीआई रोहतक (फाइल फोटो)।पीजीआई रोहतक (फाइल फोटो)।

  • सिविल अस्पताल का इमरजेंसी बना रेफरल सेवा केंद्र, रोजाना 20-25 मरीज होते हैं रेफर
  • अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कितने मरीज किए जाते हैं रेफर इसका भी रजिस्टर में रिकाॅर्ड नहीं

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2020, 03:42 AM IST

जींद. सिविल अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड इन दिनों रेफरल सेवा केंद्र बन गया है। यदि मरीज को थोड़ी सी भी ज्यादा दिक्कत है तो उसे चिकित्सक दाखिल करने की बजाय पीजीआई रेफर करना ही उचित समझते हैं। सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पिछले दिनों में रेफर हुए मरीजों को लेकर दैनिक भास्कर ने मंगलवार को पड़ताल की तो सामने आया कि रोजाना इमरजेंसी से 20 से 25 मरीजों को पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। यह सब हालात तब हैं जब स्वास्थ्य विभाग द्वारा दावा किया जाता है कि अस्पताल में दवाओं से लेकर किसी चीज की कोई कमी नहीं है। 

मरीज को दाखिल करने की बजाय रेफर को दे रहे तवज्जो

1 जनवरी से लेकर 13 जनवरी तक सरकारी एंबुलेंस ही रेफर हुए 118 मरीजों को पीजीआई रोहतक लेकर गई। जबकि प्राइवेट एंबुलेंस या फिर अन्य व्हीकल से पीजीआई या फिर दूसरे शहरों के अस्पतालों में जाने वाले मरीजों की संख्या इससे भी कहीं ज्यादा है। खास बात यह है कि इमरजेंसी से रेफर हुए मरीजों की यह सब संख्या तब है जब जिले में इस दौरान कोई ऐसी बड़ी घटना नहीं हुई कि एक साथ ही काफी संख्या में मरीज गंभीर रूप से घायल हो गए हों और उन्हें पीजीआई रेफर करना पड़ गया हो। मरीज को यहां दाखिल करने की बजाय चिकित्सकों द्वारा रेफर करने को ज्यादा तवज्जो दी जाती है। 

मरीज की एमएलसी कटती है और रेफर करते हैं तभी होती है एंट्री

सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में रोजाना कितने मरीज आते हैं इसका रिकाॅर्ड मेनटेन किया जाता है। आए हुए मरीजों में से कितने दाखिल किए गए इसका भी रिकाॅर्ड है। लेकिन कितने मरीज इमरजेंसी से रेफर किए गए। इसका कोई भी रिकाॅर्ड नहीं होता। मरीज की पर्ची पर ही चिकित्सक द्वारा रेफर लिख दिया जाता है। रेफर होने की रजिस्टर में कोई एंट्री दर्ज नहीं की जाती। इमरजेंसी में आए किसी मरीज की एमएलसी कटती है और फिर उसको रेफर किया जाता है तभी रजिस्टर में एंट्री दर्ज की जाती है।
 

विशेषज्ञ चिकित्सक फिर भी रेफर क्यों?

अस्पताल में कई रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हैं। दवाएं व अधिकतर सुविधाएं भी उपलब्ध होने का दावा किया जाता है। इन सबके बाद भी इमरजेंसी में आए मरीजों को दाखिल करने की बजाय उन्हें पीजीआई ही रेफर किया जाता है। 

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