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भाजपा की दूसरी लिस्ट जारी, दिल्ली के रहने वाले दुष्यंत गौतम और महम के रामचंद्र जागड़ा होंगे हरियाणा से उम्मीदवार

एक वर्ष पहले
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भाजपा के उम्मीदवार दुष्यंत गौतम। - Dainik Bhaskar
भाजपा के उम्मीदवार दुष्यंत गौतम।
  • भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं दुष्यंत गौतम
  • 2014 में विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं रामचंद्र जांगड़ा

पानीपत। भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए दूसरी लिस्ट जारी कर दी। इसमें हरियाणा की 2 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिल्ली के रहने वाले दुष्यंत गौतम व रोहतक के महम से रामचंद्र जांगड़ा को टिकट दिया गया है। हालांकि अभी उपचुनाव की सीट पर किसी नाम की घोषणा नहीं की है। बता दें कि कांग्रेस की कुमारी सैलजा और इनेलो के रामकुमार कश्यप की सीट पर राज्यसभा का सामान्य चुनाव हो रहा है जबकि भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के इस्तीफे के बाद एक सीट पर उपचुनाव हो रहा है। 

जाटलैंड से हैं रामचंद्र जांगड़ा
रामचंद्र जांगड़ा जाटलैंड रोहतक के महम कस्बे के रहने वाले हैं। वे 2014 में गोहाना विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की सीट पर विधानसभा चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे। वे आज तक कोई विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाए हैं। उनकी शुरुआत लोकदल (बहुगुणा) के साथ हुई थी। वह 1987 में सफीदों से उम्मीदवार बनाए गए लेकिन हार गए। हरियाणा विकास पार्टी के टिकट पर वर्ष 1991 में महम और फिर करनाल से वर्ष 2004 में विधानसभा चुनाव में उतारे गए। फिर उन्होंने भाजपा का दामन थामा। भाजपा में उन्हें तीन बार प्रदेश उपाध्यक्ष और दो बार ओबीसी मोर्चे का उपाध्यक्ष बनाया गया। वह पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे। करीब 11 साल तक भाजपा के साथ जुड़े रहने के बाद पार्टी ने वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में जांगड़ा को सोनीपत जिले की गोहाना सीट से उम्मीदवार बनाया। यहां जयसिंह ठेकेदार का टिकट काटकर जांगड़ा को आगे किया गया था। यहां से कांग्रेस के टिकट पर जगबीर मलिक चुनाव जीते थे।

दिल्ली के रहने वाले हैं दुष्यंत गौतम 
दिल्ली के मलका गंज में 29 सितंबर 1957 को पैदा हुए दुष्यंत कुमार गौतम मौजूदा समय में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर हैं। वे भाजपा संगठन के अलग-अलग पदों पर रह चुके हैं। वे दिल्ली विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। पढ़ते वक्त छात्र राजनीति में सक्रिय रहे और एबीवीपी के सदस्य बने। पढ़ाई खत्म कर वे एवीबीपी के मंडल अध्यक्ष बने। वे तीन बार भाजपा अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष बने। 1997 में दुष्यंत पहली बार जिला पार्षद का चुनाव लड़ा जिसमें उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।