फरीदाबाद / सुरजकुंड मेले में मिनी भारत का अहसास करा रहे हैं अलग-अलग राज्यों के प्रवेश द्वार

हैदराबाद की चारमीनार गोलगुंबद की अनुकृति। हैदराबाद की चारमीनार गोलगुंबद की अनुकृति।
दिल्ली की ओर से मेला आने वाले रास्ते में बना छत्तीसगढ़ द्वार। दिल्ली की ओर से मेला आने वाले रास्ते में बना छत्तीसगढ़ द्वार।
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हैदराबाद की चारमीनार गोलगुंबद की अनुकृति।हैदराबाद की चारमीनार गोलगुंबद की अनुकृति।
दिल्ली की ओर से मेला आने वाले रास्ते में बना छत्तीसगढ़ द्वार।दिल्ली की ओर से मेला आने वाले रास्ते में बना छत्तीसगढ़ द्वार।

  • महरौली रोड पर मेले के लिए बने हैं पांच मुख्य प्रवेश द्वार, हर गेट पर किसी न किसी राज्य का प्रतीक द्वार बना
  • तीन नंबर गेट से पर्यटक प्रवेश करेंगे तो केरल का कोट्टायलांबा द्वार स्वागत करता प्रतीत होगा

दैनिक भास्कर

Feb 06, 2020, 08:29 AM IST

फरीदाबाद. अरावली की पहाड़ियों  में बसा सूरजकुंड अपने 34 साल के सफर में मिनी भारत बन चुका है। हर साल किसी न किसी प्रदेश को थीम स्टेट के रूप में चुना जाता है। ये सभी राज्य मेला परिसर में बनाए गए विभिन्न द्वारों की वजह से आज भी अपनी उपस्थिति यहां दर्शा रहे हैं। सूरजकुंड मेला ग्राउंड में आने के लिए महरौली रोड पर पांच मुख्य प्रवेश द्वार बने हैं। हर गेट पर कोई न कोई स्टेट का प्रतीक द्वार बना है।

वीआईपी तीन नंबर गेट से पर्यटक प्रवेश करेंगे तो केरल का कोट्टायलांबा द्वार आपका स्वागत करता प्रतीत होगा। इस राज्य को वर्ष 1991 में थीम स्टेट बनाया गया था। इसी प्रकार गेट नंबर पांच पर हिमाचल का चंडी देवी और माता ज्वाला देवी द्वार पर्यटकों का अभिनंदन करते प्रतीत होगा। इससे थोड़ा आगे हैदराबाद की चारमीनार गोल गुंबद की अनुकृति बनी हुई है।

 

उत्तराखंड के द्वार पर गढ़वाल की यादें
वर्ष 1995 में सूरजकुंड मेले के थीम स्टेट रहे पंजाब के रामबाग की कलाकृति भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। वर्ष 2003 में मेले का प्रमुख सहयोगी उत्तराखंड अपने स्टेट के द्वार से गढ़वाल की याद ताजा बनाए हुए हैं।

तेलंगाना के गेट द्वार पर राज्य संस्कृति, हिमाचल में भीमा काली मंदिर की अनुकृति

साल 2016 में थीम स्टेट रहे तेलंगाना का प्रवेश द्वार राज्य की संस्कृति को दर्शा रहा है। इस बार का थीम स्टेट हिमाचल सुप्रसिद्ध भीमा काली मंदिर की हूबहू अनुकृति बनाकर पर्यटकों को हिमाचल की देवभूमि का अनुभव करा रहा है। वर्ष 1996  में भी यही राज्य सूरजकुंड का प्रमुख प्रदेश था। उस समय का 24 साल पुराना हिमाचल द्वार देखकर लगता है जैसे इसे चार दिन पहले ही बनाया गया है। पर्यटकों को भी इन द्वारों और प्रतीकात्मक इमारतों के सामने खड़े होकर सेल्फ या फोटो लेने में काफी खुशी का अहसास हो रहा है।

झारखंड, पं. बंगाला, मप्र, छत्तीसगढ़ के भी द्वार

अन्य द्वारों में शाक्य तंगयुंग मोंटेसरी, उज्बेकिस्तान, मारूति टेंपल झारखंड, विष्णुपुर द्वार पं. बंगाल, दंतेश्वरी देवी मंदिर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ द्वार, गोआ स्वागत द्वार पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र तो हैं ही  साथ ही इन राज्यों से आने वाले पर्यटकों को भी उनकी भूमि की स्मृति कराते हैं। कुल मिलाकर सूरजकुंड आने पर लगता है कि हम एक ही परिसर में बनाए गए मिनी भारत में आ गए हैं। इसे देखकर भारत देश की एकता,  अखंडता और हमारी विविध संस्कृति का अहसास होता है।

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