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प्रेरक / जापानी युवती को अनजान व्यक्ति ने दी थी श्रीमद्भागवत गीता, माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़कर अब भारतीय दर्शन पढ़ाती हैं

जापान की रीको वाथाबे हमेशा अपने साथ जापानी भाषा की श्रीमद्भागवत गीता रखती हैं। जापान की रीको वाथाबे हमेशा अपने साथ जापानी भाषा की श्रीमद्भागवत गीता रखती हैं।
अपने बेटे अर्जुन और पति मुकेश के साथ रीको वाथाबे। अपने बेटे अर्जुन और पति मुकेश के साथ रीको वाथाबे।
जापानी भाषा में भारतीय धर्म ग्रंथ। जापानी भाषा में भारतीय धर्म ग्रंथ।
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जापान की रीको वाथाबे हमेशा अपने साथ जापानी भाषा की श्रीमद्भागवत गीता रखती हैं।जापान की रीको वाथाबे हमेशा अपने साथ जापानी भाषा की श्रीमद्भागवत गीता रखती हैं।
अपने बेटे अर्जुन और पति मुकेश के साथ रीको वाथाबे।अपने बेटे अर्जुन और पति मुकेश के साथ रीको वाथाबे।
जापानी भाषा में भारतीय धर्म ग्रंथ।जापानी भाषा में भारतीय धर्म ग्रंथ।

  • टोक्यो में रहने वाली रीको वाथाबे ने भारतीय युवक से शादी की और बेटे का नाम अर्जुन रखा
  • गीता और योग को जापान के कई लोग अपनाए हुए हैं

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2019, 11:24 AM IST

कुरुक्षेत्र (मनोज कौशिक). श्रीमद्भागवत गीता ने जापान की एक युवती के जीवन पर ऐसी छाप छोड़ी कि वह माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनी की नौकरी छोड़कर जापान में गीता और भारतीय दर्शन पढ़ाने लगी हैं। वाथाबे को किसी अनजान व्यक्ति ने गीता भेंट की थी। रीको तीन दिन के लिए जापान से कुरुक्षेत्र आईं हैं। यहां उन्होंने श्रीमद्भगवत गीता पर आयोजित संगोष्ठी में जापान में श्रीमद्भागवत गीता पर अपना शोध पत्र पढ़ा।

गीता पढ़कर कृष्ण के बारे में बढ़ी जिज्ञासा

गीता पढ़कर रीको का जीवन पूरी तरह से बदल गया। उन्होंने बताया कि स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद कानागावा कॉलेज ऑफ फॉरेन स्टडीज में पढ़ाई की। फिर अंग्रेजी और कॉमर्स की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चली गईं। वहां पढ़ाई पूरी करने के बाद इंग्लैंड में लोकल गवर्नमेंट के साथ बतौर ट्रेनी जुड़ी। कुछ दिन ट्रेनिंग की और वापस जापान आ गई। जापान में बतौर जापानी और इंग्लिश ट्रांसलेटर की माइक्रोसॉफ्ट और फूजी जैसी कंपनियों के लिए काम किया। इसी दौरान एक दिन टोक्यो रेलवे स्टेशन पर एक अनजान व्यक्ति ने उन्हें गीता दी। गीता जापानी भाषा में थी, इसे पढ़ने के बाद उनके मन में भगवान श्रीकृष्ण और अन्य धार्मिक ग्रंथों के बारे में जानने की इच्छा हुई। 

परिवार के खिलाफ लव मैरिज की
रीको ने बताया कि टोक्यो डिजनी के दौरान उनकी मुलाकात दिल्ली के मुकेश से हुई। मुकेश भारत से कपड़े आयात कर जापान में बेचते थे। इसके बाद दोनों की मुलाकातें होने लगी। मुकेश की जापानी अच्छी नहीं थी, लेकिन रीको ने उसे सिखा दी। मुकेश और रीको ने शादी करने का फैसला किया, लेकिन दोनों के माता-पिता इसके खिलाफ थे। मुकेश ने अपने परिवार वालों को मना लिया, लेकिन रीको के परिवारवाले नहीं माने। इसके बावजूद रीको और मुकेश ने साल 2000 में शादी कर ली। शादी दिल्ली में भारतीय रीति रिवाज से हुई। रीको अकेली भारत आईं। 2005 में उन्हें बेटा हुआ, जिसका नाम उन्होंने अर्जुन रखा। बेटे के पैदा होने के बाद रीको के परिजन ने भी शादी को स्वीकार कर लिया।   

अब जापान में पढ़ा रही
शादी के बाद रीको ने मुकेश से भारतीय दर्शन के बारे में पूछा तो उन्होंने ओडिशा के गुरु एमके पांडा से मिलवाया। रीको ने गुरु पांडा के पास गीता, वेद, योग और भारतीय दर्शन का अध्ययन किया। उसने फैसला किया कि वह जापान में रहकर इसे ही प्रचारित करेगी। इसके बाद रीको ने नौकरी को अलविदा कहा और जापान में गीता, वेद, रामायण का ज्ञान बांटना शुरू किया। अब वे अलग-अलग जगह चल रहे योग इंस्टीट्यूट में गीता और भारतीय दर्शनशास्त्र पढ़ा रही हैं। 

जापान में बहुत लोग जुड़े हैं योग और गीता से
रीको कहती हैं कि जापान में 70 लाख से ज्यादा लोग योग से जुड़े हुए हैं। कई संस्थानों में योग के साथ-साथ गीता, महाभारत, रामायण व अन्य वैदिक ग्रंथों का ज्ञान दिया जाता है। अकेले टोक्यो में करीब 150 योग केंद्र हैं। इस्कॉन जैसी संस्थाएं गीता के प्रचार प्रसार के लिए जापान में भी काम कर रही हैं। गीता का जापानी में सरल अनुवाद महज 200 रुपये में मिल जाता है।

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