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हरियाणा में 21 अक्टूबर को मतदान, जानिए अभी तक के राजनीतिक समीकरण

एक वर्ष पहले
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मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने चुनाव तारीखों की घोषणा की
  • एक ही चरण में सभी 90 सीटों पर मतदान होगा, 24 अक्टूबर को मतगणना

पानीपत. भारतीय निर्वाचन आयोग ने हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। यहां 21 अक्टूबर को सभी 90 सीटों के लिए एक ही चरण में मतदान होगा। चुनाव संबंधी अधिसूचना 27 सितंबर को जारी की जाएगी, जिसके बाद से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 4 अक्टूबर तक नामांकन किए जा सकेंगे। 5 अक्टूबर को स्क्रूटनी होगी। 7 अक्टूबर तक उम्मीदवार नामांकन वापस ले सकते हैं। 21 अक्टूबर को मतदान होगा और 24 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग की इस घोषणा के साथ ही प्रदेशभर में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।
 

1.83 करोड़ वोटर्स मतदान करेंगे
हरियाणा में इस बार करीब 1.83 करोड़ लोग मताधिकार का प्रयोग करेंगे। कुल मतदाताओं की संख्या 1,82,98,714 है। इनमें 97,30,169 पुरुष व 84,60,820 महिलाएं, 239 ट्रांसजेंडर वोटर और सर्विस वोटर की संख्या 107486 है।
 

2014 में 47 सीटें जीतकर भाजपा ने पहली बार अपने दम पर बनाई थी सरकार
हरियाणा में 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है। 2014 में भाजपा ने 47 सीट जीतकर पहली बार अकेले सरकार बनाई थी। सीएम मनोहर लाल मुख्यमंत्री चुने गए थे। इनेलो 19 सीट जीतकर सबसे बड़ा विपक्षी दल बना था। कांग्रेस ने 15 सीटें जीती थी, जबकि आजाद व अन्य उम्मीदवारों ने 9 सीटें जीती थी। 
 

  • इस बार ये है समीकरण

भाजपा 75 पार का नारा दे रही, मौजूदा विधायकों का टिकट कट सकता
भाजपा लोकसभा चुनाव में 10 की 10 सीटें जीतकर विधानसभा में 75 पार का नारा देकर चल रही है। लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार प्रचार अभियान जारी है। सीएम पूरे प्रदेश में घूमकर जनआशीर्वाद यात्रा कर चुके हैं। भाजपा में मौजूदा स्थिति ये है कि एक सीट पर कई-कई दावेदार हैं। दूसरी पार्टियों के नेता अपनी पार्टियां छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में सीटों की दावेदारी ज्यादा बढ़ गई है। खुद सीएम मान चुके हैं कि कुछ मौजूदा विधायकों की टिकट कटना तय है। चाहे जो मर्जी हो लेकिन इस समय सबसे मजबूत स्थिति में भाजपा है। 
 

हुड्डा के आने से रेस में आई कांग्रेस
लोकसभा चुनाव में महज हिसार सीट को छोड़ दें तो कांग्रेस 9 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही। इस चुनाव में भी भाजपा की टक्कर कांग्रेस से मानी जा रही है। तंवर को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटा दिए जाने के बाद सैलजा को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया है और हुड्डा को सीएलपी लीडर का पद दिया गया है। भले ही नेतृत्व परिवर्तन हो गया हो लेकिन गुटबाजी अभी भी कम नहीं हुई है। हां, हुड्डा के आ जाने से कांग्रेस रेस में जरूर आ गई है लेकिन देरी से फैसला होने का नुकसान भी उन्हें उठाना पड़ रहा है। अब इतना समय नहीं बचा है कि वे संगठन मजबूत कर सकें। वे सीधे चुनाव में उतरने जा रहे हैं। वहीं भूपेंद्र हुड्डा और कुलदीप बिश्नोई सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।  
 

इनेलो से मजबूत हुई जेजेपी
2014 में भाजपा के बाद 19 सीटें लेकर दूसरा सबसे बड़ा दल बनने वाली इनेलो अब बिल्कुल बिखर चुकी है। चौटाला परिवार टूटने के बाद जजपा का गठन हुआ। जजपा ने सबसे ज्यादा इनेलो को नुकसान पहुंचाया है। इनेलो के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष से लेकर पार्टी के बड़े नेता और कई मौजूदा विधायक इस्तीफा देकर जजपा, कांग्रेस और भाजपा में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में जजपा मौजूदा समय में इनेलो से मजबूत नजर आ रही है। इनेलो के लिए प्रत्याशी ढूंढना ही इस चुनाव में बड़ी चुनौती होने वाला है। अभय घोषणा कर चुके हैं कि पार्टी 50 प्रतिशत युवाओं को टिकट देगी, पार्टी में पुराने नेता छोड़कर जा चुके हैं। वहीं जजपा का किसी पार्टी से गठबंधन नहीं हो सका है। जजपा 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का दावा कर रही है लेकिन उसके पास भी उम्मीदवारों का टोटा है। ऐसे में इनेलो और जजपा दोनों के लिए चुनौती है। 
 

आप और बसपा का भी किसी से नहीं गठबंधन दोनों उतरेंगे अलग-अलग
आम आदमी पार्टी का लोकसभा चुनाव में जजपा से गठबंधन था लेकिन उनका गठबंधन विधानसभा चुनाव आते-आते टूट गया। वहीं बसपा की बात करें तो बसपा ने पहले इनेलो से जींद उपचुनाव में गठबंधन किया था, हार के बाद वह टूट गया। लोकसभा चुनाव में उन्होंने राजकुमार सैनी की लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी से हाथ मिलाया, हार के बाद वह भी टूट गया। इसके बाद विधानसभा के लिए जजपा से गठबंधन किया था लेकिन वह चुनाव से पहले ही टूट गया है। बसपा भी अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। ऐसे में ये दल भी अकेले चुनाव मैदान में उतरेंगे। इससे स्पष्ट है कि विपक्ष इस समय बिखराव की स्थिति में है। 

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