गुड़गांव / रैपिड मेट्रो पर हाईकोर्ट का फैसला, प्रदेश सरकार 16 तक टेक ओवर करेगी गुड़गांव मेट्रो



Haryana Government to takeover Gurgaon Metro
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Haryana Government to takeover Gurgaon Metro

  • कोर्ट के आदेशानुसार अगले 25 दिन तक यानि 15 अक्टूबर तक इसका परिचालन पहले की तरह ही आरएमजीएल करेगी
  • रैपिड मेट्रो रेल को लेकर आरएमजीएल और हरियाणा सरकार के बीच तीन महीने से चल रहीं खींचतान चल रही थी

Dainik Bhaskar

Sep 21, 2019, 04:51 AM IST

गुड़गांव (उमाशंकर). नए शहरी क्षेत्र में 11.7 किलोमीटर रैपिड मेट्रो रेल के परिचालन को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट के आदेशानुसार अगले 25 दिन तक यानि 15 अक्टूबर तक इसका परिचालन पहले की तरह ही आरएमजीएल करेगी। प्रदेश सरकार 16 अक्टूबर तक इसका टेकओवर करेगी और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के माध्यम से इसका परिचालन करेगी। टेकओवर की प्रक्रिया सोमवार 23 सितंबर से शुरू हो जाएगी। पूरी प्रक्रिया हाई कोर्ट के दो जजों की निगरानी में होगी। एक जज सरकार की तरफ और दूसरा जज आरएमजीएल की तरफ से टेकओवर प्रक्रिया पर नजर रखेंगे।  दूसरी तरफ, रैपिड मेट्रो रेल गुड़गांव लिमिटेड (आरएमजीएल) के अकाउंट की फॉरेंसिक ऑडिट केंद्र सरकार इसकी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) करेगी। कैग की रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार लंबित ब्याज की 80 फीसदी राशि का भुगतान करेगी। 


रैपिड मेट्रो रेल को लेकर आरएमजीएल और हरियाणा सरकार के बीच तीन महीने से चल रहीं खींचतान का शुक्रवार को पटाक्षेप हो गया।  6 वर्षों से चल रही रैपिड मेट्रो रेल के परिचालन की जिम्मेदारी लेने के लिए सरकार तैयार हो गई। रैपिड मेट्रो रेल परियोजना को टेकओवर करने के लिए हाईकोर्ट ने सरकार को 16 अक्टूबर तक का समय दिया है। टेकओवर की प्रकिया पूरी होने के बाद 16 अक्टूबर से पूरी व्यवस्था सरकार के अधीन हो जाएगी और सरकार की निगरानी में डीएमआरसी इसका परिचालन करेगी। इसके लिए हरियाणा सरकार की कंपनी हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एचएमआरटीसी) और आरएमजीएल के बीच 5 साल के लिए समझौता हुआ है। 

 

60 दिन में करेगी लंबित कर्ज के 80% का भुगतान
रैपिड मेट्रो रेल परियोजना को लेकर आरएमजीएल और एचएसवीपी के बीच समझौते रद्द होने के बाद आरएमजीएल इस परियोजना के लिए बैंकों से लिए कर्ज का 80 फीसदी हिस्सा देने के लिए सरकार पर दबाव बना रही है। समझौते के अनुसार इस राशि का भुगतान करने के लिए बाध्य है। सरकार ने कंपनी के अबतक की पूरे लेखा-जोखा का कैग से जांच कराने की मांग की थी। कोर्ट ने कंपनी के अकाउंट्स का फॉरेंसिक ऑडिट के लिए सरकार को 30 दिन की मोहलत दी है। इसके बाद लंबित राशि के भुगतान के लिए कोर्ट ने सरकार को आगे 30 दिन का समय दिया है। इससे कुल 60 दिनों में सरकार कंपनी को लंबित राशि का भुगतान करेगी। 
 

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