2018 में 33 और 2019 में 48 शिकायतें मिलीं, 34 बाल विवाह रुकवाए

Panipat News - जिले में हर साल बाल विवाह के मामले बढ़ रहे हैं। साल 2019 में अन्य सालाें के मुकाबले ज्यादा शिकायतें अाई ताे ज्यादा केस...

Jan 20, 2020, 08:15 AM IST
Panipat News - haryana news 33 complaints received in 2018 and 48 in 2019 34 child marriages halted
जिले में हर साल बाल विवाह के मामले बढ़ रहे हैं। साल 2019 में अन्य सालाें के मुकाबले ज्यादा शिकायतें अाई ताे ज्यादा केस रुकवाएं भी गए हैं। 2018 के 33 मुकाबले 2019 में 48 शिकायतें अाई, इसमें 34 काे माैके पर पहुंच कर रुकवाया भी गया। बाल विवाह मुख्य तीन कारणाें से बढ़ रहे हैं।

लड़कियों की सुरक्षा की चिंता, एक ही खर्चे में दो या तीन शादी और अदला-बदली। जाे 34 केस रुकवाए हैं, करीब 10 केस लड़काें के बाल विवाह के भी हैं। 17 नवंबर 2008 से शुरू हुए विभाग में तब से लेकर 31 दिसंबर 2019 तक यानी 11 सालाें में बाल विवाह की 250 शिकायतें अाई हैं। इनमें 172 बाल विवाह काे माैके पर पहुंचकर अधिकारियाें ने रुकवाया है।

रिकाॅर्ड...17 नवंबर 2008 से जिले में शुरू हुअा विभाग

साल कितने रुकवाएं

2018 से मार्च 2010 तक 1

अप्रैल 2010 से मार्च 2011 1

अप्रैल 2011 से मार्च 2012 11

अप्रैल 2012 से मार्च 2013 12

अप्रैल 2013 से मार्च 2014 18

अप्रैल 2014 से मार्च 2015 12

अप्रैल 2015 से मार्च 2016 13

अप्रैल 2016 से मार्च 2017 24

अप्रैल 2017 से मार्च 2018 33

अप्रैल 2018 से मार्च 2019 24

अप्रैल 2019 से 31 दिसंबर तक 23

नाेट : 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक 48 शिकायत मिली, जिनमें 34 बाल विवाह रुकवाएं।

कारण 1 : लड़कियों की असुरक्षा

जिले में महिला सरंक्षण एवं बाल विवाह निषेध विभाग के पास दर्ज 48 केस में से करीब 34 बाल विवाह केस रुकवाए हैं, इनमें 22 केस में माता-पिता बेटियों को असुरक्षित महसूस कर उनकी शादी करवाते मिले। 65 प्रतिशत केस में बेटियों की असुरक्षा को लेकर ही माता-पिता बाल विवाह करने पर मजबूर हो रहे हैं।

केस : समालखा क्षेत्र के एक गांव में बड़ी बहन के साथ छाेटी नाबालिग बहन की शादी करवाने का मामला अाया था। इसमें पिता ने कहा था कि वाे मजदूरी के लिए काम चला जाता है। पीछे से दाेनाें बेटियां अकेली घर पर रहती थी। एेसे में वाे दाेनाें बहनाें की शादी एक ही मंडप में करवा रहा था। सूचना मिलते ही टीम ने माैके पर बाल विवाह रुकवा दिया था।

कारण 2: एक ही खर्चे में दो शादी

अाज कल इस तरह के केस ज्यादा हाे रहे है। माता-पिता एक ही खर्चे में दाे बहनाें की, एक भाई अाैर एक बहन की या फिर एक साथ तीन शादी कर रहे हैं। ताकि खर्चें काे बचाया जा सके। एेसे मामलाें में ज्यादातर दाे बहनाें की एक ही मंडप में शादी हाे रही है। अक्सर एेसे मामलाें में छाेटी की उम्र शादी के लायक नहीं मिलती।

केस : मतलाैडा क्षेत्र के एक गांव में नवंबर 2019 में एक नाबालिग लड़की की शादी भाई के बेटे के साथ करने वाले थे, शादी से एक दिन पहले टीम ने बाल विवाह रुकवाया। इस केस में लड़की के पिता ने बताया कि उसके भाई की डेढ़ साल पहले मृत्यु हाे गई थी। इस कारण भाई के बेटे अाैर अपनी बेटी की शादी कर रहे थे। लड़की की बारात राेहतक जिले के एक गांव से अानी थी।

कारण 3 : अदला-बदली

इस तरह के हर साल अाैसतन 20-30% केस अाते हैं। इनमें एेसे हाेता है कि लड़के के लिए लड़कियां नहीं मिल रही हाे ताे अदला-बदली से हाेती हैं।

केस : सनाैली ब्लाॅक में एक भाई के लिए लड़की नहीं मिल रही थी। फिर एक जगह से रिश्ता अाया कि उन्हें भी लड़की चाहिए। एेसे सनाैली ब्लाॅक के लाेगाें ने अपने बेटे के लिए बेटी की भी शादी तय करदी। एेसे ही उनके रिश्तेदाराें ने अपनी बेटी के साथ भाई की भी शादी करानी थी। लेकिन टीम ने सूचना मिलते ही उसे रुकवा दिया था।

बाल विवाह से घरेलू हिंसा बढ़ती है : महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने बताया कि बाल विवाह के कारण घरेलू हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं। कम उम्र में बच्चाें की शादी कर देते है उन्हें घर चलाने की समझ नहीं हाेती।

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