कश्मीर की डल झील से 5 गुना गहरी और चंडीगढ़ की सुखना से बड़ी थर्मल की राखी झील

Panipat News - प्रदूषण फैलाने और कैंसर सहित अन्य बीमारियों का कारण बन रही कोयले की राख नहीं उठाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल...

Dec 06, 2019, 08:31 AM IST
प्रदूषण फैलाने और कैंसर सहित अन्य बीमारियों का कारण बन रही कोयले की राख नहीं उठाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पानीपत थर्मल पावर प्लांट पर 3 करोड़ रुपए का हर्जाना ठोका है। एनजीटी के चेयरमैन आदर्श कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सिर्फ पर्यावरण के लिए घातक ही नहीं बल्कि क्रिमिनल ऑफेंस भी है। थर्मल प्रशासन ने राख उठाने में भारी लापरवाही की। थर्मल की बनाई राखी झील में आज भी 332 लाख मीट्रिक टन राख जमा है। 40 साल में राख नहीं उठाकर थर्मल प्लांट ने पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचाया, अब इसका भी आकलन होगा। इसके लिए एनजीटी ने पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय की निगरानी में एक कमेटी बनाई है।

इसकी रिपोर्ट पर एनजीटी और भारी हर्जाना लगा सकता है। पानीपत थर्मल प्लांट के खिलाफ जाटल गांव की पंचायत की लगाई शिकायत पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने यह फैसला दिया है। थर्मल पावर प्लांट की वर्तमान क्षमता 920 मेगावाट है। इसलिए, इस पर 3 करोड़ रुपए का हर्जाना लगेगा। पानीपत में 210 मेगावाट वाली दो यूनिट-5 व 6 और 250 मेगावाट वाली दो यूनिट-7 व 8 है। एनजीटी ने 25 जनवरी 2016 को नोटिफिकेशन जारी कर 31 दिसंबर 2017 तक 100 फीसदी राख डिस्पोजल का आदेश दिया था।

राख नहीं उठाने पर एनजीटी ने ठोका 3 करोड़ हर्जाना, इस झील से सीमेंट प्लांट अभी रोज 2 हजार टन राख उठा रहा... 50 साल उठाए तो भी नहीं होगी खाली

40 साल पहले बनी थी झील

राखी झील, थर्मल



सुखना झील, चंडीगढ़

3 वर्ग किलोमीटर एरिया में फैली है चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील।

डल झील, कश्मीर

6 मीटर गहरी है कश्मीर की विश्व प्रसिद्ध डल झील।

907 एकड़ में फैली झील में 332 लाख टन राख

असंध रोड खुखराना के पास स्थित सीमेंट प्लांट थर्मल की 2 हजार टन राख रोज यूज करता है। इस हिसाब से झील की 332 लाख टन राख खपत करने में करीब 50 साल लगेंगे।

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