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सेक्टर-13/17 में एक ऐसा स्कूल, जहां कूड़ा बीनने वाले बच्चों को फ्री में मिल रही शिक्षा

एक वर्ष पहले
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पिता ने 13 साल पहले जमीन खरीदकर दी तो डॉ. वंदना पाहूजा ने कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए बनवाया स्कूल

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रेस में सब भागे जा रहे, हमें कमजोर का ख्याल भी रखना होगा

कमजोर वर्ग के वे बच्चे जो बड़े स्कूलों में नहीं पढ़ पाते, उन्हें शिक्षा मिल रही है। हमें खुशी है कि आज हमारे बच्चे बिजनेस भी कर रहे हैं। ऐसा ही एक युवक जब मेरे सामने आया तो मुझे कितनी खुशी हुई, शब्दों में बयां नहीं कर सकती। आज हम इसे हैप्पी स्कूल कहते हैं।
-डॉ. वंदना पाहूजा, चेयरमैन, आईएमए मिशन पिंक हेल्थ

दगी की रेस में सब भागे जा रहे हैं। अमीर को और अमीर बनना है। बहुत कम लोग हैं जो कमजोर वर्ग का ख्याल रखते हैं। इसी में शामिल हैं डॉ. वंदना पाहूजा, जो कूड़ा बीनने वाले बच्चों के लिए स्कूल चला रहीं हैं। पिता ने 13 साल पहले 8 लाख रुपए में जमीन खरीदकर दी, तो उस पर गरीब बच्चों को फ्री में पढ़ाने के लिए स्कूल खड़ा कर दिया। स्कूल में लगभग 95 बच्चे चौथी कक्षा तक की शिक्षा ले रहे हैं। जहां पर प्रारंभिक शिक्षा के साथ ही स्वरोजगार के हुनर भी सिखाए जाते हैं। मसलन- सिलाई, पेपर बैग आदि बनाना। स्कूल से निकलकर कई बच्चे आज जीवन में सफल हैं। एक बच्चा बिजनेसमैन बन गया। डॉ. पाहूजा का धन्यवाद करने पहुंचा तो वह बोलीं- जीवन में इससे बड़ी संतुष्टि कोई और नहीं मिल सकती। अाइए उन्हीं से जानते हैं गरीब बच्चों का स्कूल बनाने के लिए पाहूजा के संघर्ष की कहानी...

मालिक ने प्लॉट खाली कराया तो रोना आया, फिर पिताजी ने दिलाया स्कूल के लिए प्लॉट: 18 साल पहले ऐसी स्थिति नहीं थी। 2002 में उन बच्चों के लिए स्कूल खोलने का निर्णय लिया, जो मेन स्टीम में पढ़ नहीं पाते। सेक्टर-13/17 के साथ लगती ज्योति कॉलोनी में एक व्यक्ति से 100 वर्ग गज का तालाब रूपी प्लाॅट 300 रुपए महीना किराए पर लिया। पति डॉ. नरेश पाहूजा ने 10 हजार दिए तो मिट्‌टी डलवाकर कच्चा घर बनवाया। 5 साल के बाद जमीन के मालिक ने प्लॉट खाली करवा लिया। उस वक्त स्कूल में 70 बच्चे थे। उस दिन मैं अपने घर में रो रही थी। सोच रही थी, बच्चे अब कहां जाएंगे। मां और पिताजी ने कहा कि रोते नहीं, अच्छा काम कर रही हो तो कोई न कोई रास्ता निकल ही आएगा। फिर, पिताजी ने 8 लाख रुपए में 200 वर्ग गज का प्लॉट उसी कॉलोनी में दिला दिया। जहां मैंने फिर से स्कूल खड़ा किया। जिसे अपनी दादी विद्या और दादा डॉ. नारायण दत्त का नाम दिया- विद्या नारायण चेतना स्कूल।
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