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लापता विमान हादसे के 18 दिन बाद आया पंकज सांगवान का पार्थिव शरीर, चचेरे भाई ने दी मुखाग्नि

एक वर्ष पहले
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वायु सैनिक पंकज सांगवान के अंतिम संस्कार के दौरान जुटी भीड़।
  • 3 जून को अरुणाचल के मेनचुका के लिए भरी थी उड़ान, इसके बाद से लापता हो गया था विमान

सोनीपत। अरुणाचल प्रदेश में उड़ान के दौरान लापता विमान में सवार वायु सैनिक पंकज सांगवान का पार्थिव शरीर शुक्रवार को हादसे के 18 दिन बाद उनके गांव कोहला पहुंचा। यहां वायुसेना ने सैनिक सम्मान के साथ पंकज सांगवान को अंतिम सलामी दी गई। भारत माता के जयकारों के बीच पंकज का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान परिवार में बेहद मातम का माहौल था। 
 

पंकज का पार्थिव शरीर दिल्ली से गोहना दोपहर करीब 1 बजे पहुंचा। यहां गांव के सैकड़ों युवाओं का काफिला इंतजार में खड़ा था, जो वायु सेना के काफिले के साथ-साथ चला। भारत माता के जयकारों के बीच करीब 2.30 बजे पार्थिव शरीर गांव कोहला पहुंचा। 
 

गांव में बेहद गमगीन माहौल था। माता-पिता व परिजनों के अंतिम दर्शन के बाद शव यात्रा शुरू हुई। श्मशान घाट में भारतीय वायुसेना के 21 जवानों ने सलामी दी। करीब 3.30 बजे पंकज सांगवान के चचेरे भाई ने मुखाग्नि दी। पंकज के शव के साथ आए वायु सैनिक एसबी कलकल, प्रभात कुमार सिहं, साहिल और सुकिति सिंह ने कहा कि पंकज ने बेहद ईमानदारी से अपनी नौकरी की। इस दौरान जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम आशीष वशिष्ट, डीएसपी, सांसद रमेश कौशिक, सीएम के मीडिया सलाहकार राजीव जैन मौजूद थे। जिन्होंने पंकज को श्रद्धांजलि दी।   
 

अचानक लापता हो गया था पंकज का विमान
गौरतलब है कि वायुसेना के एंटोनी एएन-32 विमान ने 3 जून को असम के जोरहाट से अरुणाचल के मेनचुका के लिए उड़ान भरी थी। इसमें सात अधिकारी और 6 वायु सैनिक थे। उड़ान भरने के करीब 35 मिनट बाद ही एयरबेस से संपर्क टूट गया था। इसके बाद विमान से संपर्क नहीं हुआ। 
 

विमान में कोहला गांव निवासी पंकज सांगवान भी सवार था। विमान लापता होने की सूचना सांगवान के परिजनों को पिछले सोमवार को ही मिल गई थी। सर्च ऑपरेशन के दौरान 11 जून को सेना अधिकारियों को भारतीय सीमा में विमान का मलबा मिला था। दो दिन बाद सेना अधिकारियों ने साफ किया कि विमान में सवार अधिकारी व सैनिक जीवित नहीं है।

 

28 जून को छुट्टी लेकर आना था घर
पंकज के पिता धर्मबीर सांगवान मार्केटिंग बोर्ड में जेई के पद कार्यरत है। परिवार में इकलौता बेटा था। पंकज अविवाहित था। जब भी छुट्टी लेकर घर पर आता तो खेती में भी हाथ बंटवाता था। मार्च माह में होली मनाकर गया था। अब 28 जून को एक माह छुट्टी लेकर आने की कहकर गया था। ताकि छुट्टियों में खेती का कार्य में हाथ बंटवा सके। 

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