बाबा तेरा दरबार अनोखा…, होलिया में उड़े रे गुलाल...भजनाें की प्रस्तुति दी
स्वामी दयानंद सरस्वती और कांता देवी महाराज करेंगे अध्यक्षता
श्री सनातन धर्म संगठन द्वारा 10 मार्च काे निकाली जाने वाली दिव्य होली शोभायात्रा सनाैली राेड स्थित कांशीगिरि मंदिर से शुरू हाेगी। शाेभायात्रा के रूट काे साेमवार काे फाइनल कर लिया गया है।
प्रधान सूरज पहलवान ने बताया कि हाेली के रसिया श्री कान्हा के संग राधा की आरती वंदन कर सभी भक्तों को अबीर चंदन का तिलक लगाकर एवं पगड़ी पहनाकर यात्रा में चलेंगे। यात्रा सनौली रोड, भीम गोडा चौक, सेठी चौक, संत द्वारा हरि मंदिर, अमर भवन चौक, गुड़ मंडी, हलवाई हट्टा, सर्राफा बाजार, सुभाष बाजार, रोशन महल, श्री हिन्दू सत्संग मंदिर के आगे से होती हुई सिंगला मार्केट, सालारगंज बाजार, देवी मंदिर रोड, इंसार चौक में श्री सिद्ध बाबा लाल दयाल मंदिर के आगे से होती हुई इंदिरा बाजार, श्री प्रेम मंदिर बाजार से होती हुई श्री प्रेम मंदिर में कांता देवी महाराज का आशीर्वाद लेकर वार्ड-3 स्थित श्री हनुमान मंदिर में समापन हाेगी।
प्रवक्ता चंद्रभान वर्मा ने बताया कि हाेली महोत्सव के मुख्य अतिथि विधायक प्रमोद विज व राजकुमार खुंगर होंगे। सायंकाल का सत्र श्री राम मंदिर वार्ड नं. 7 में स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज एवं कांता देवी महाराज के सान्निध्य में महापुरुषों द्वारा संकीर्तन होगा।
कागज रंगना पुराना हुआ, अब कोडिंग नया रंग
शायद ही ऐसा कोई बच्चा हो जिसे ड्रॉइंग बुक रंगना या होली के त्योहार के दौरान रंग लगाना पसंद न हो। उन्हें चमकदार रंग बहुत अच्छे लगते हैं। लेकिन यहां छह साल के बच्चों की एक पूरी पीढ़ी कलरिंग की तरह कोडिंग में लगी हुई है, क्योंकि उन्हें इसमें गणित से ज्यादा मजा आ रहा है। आमतौर पर 6 साल की उम्र में बच्चों को कुछ तरह के खेलों के अलावा संगीत, चित्रकला, यहां तक कि नाट्यकला आदि सिखाई जाती है। और वे इन क्लासेस को कोचिंग क्लास कहते हैं। लेकिन नई पीढ़ी अपनी क्लास को ‘कोडिंग क्लास’ कहती है, जहां वे अल्फाबेट नहीं, बल्कि कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग की एबीसी सीखते हैं। ऐसी ही एक कोडिंग क्लास के मालिक अशोक अनंतरमैया को लगता है कि कोडिंग बच्चों की मदद का एक तरीका है, जैसे समस्या पहचानना, उसे चरणों में बांटना और समाधान लायक बनाना, जो कम्प्यूटिंग की आधारभूत प्रक्रिया है। यह बच्चों के लिए आसान इसलिए भी हो पाया क्योंकि वे टेक्नोलॉजी से पहले ही परिचित हैं।
वे यह भी मानते हैं कि कोडिंग दरअसल पाठ्यपुस्तकों की तुलना में गणित सीखने का ज्यादा बेहतर तरीका है क्योंकि इसमें बच्चे सहज रूप से सीखने की इच्छा रखते हैं। इसलिए छह वर्ष की उम्र में कोडिंग अब नई गणित बन चुकी है। कोटा या हिसार या किसी भी टीयर-टू और थ्री शहर की कोचिंग क्लासेस की तरह बेंगलुरु में कई दर्जन कोडिंग क्लास खुल गई हैं। कैम्पके12, स्माउल और मूव फॉर्वर्ड कुछ ऑनलाइन और एजुकेशन टेक स्टार्टअप हैं, जो बच्चों को कोडिंग सिखाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अगर आपका तर्क है कि कोडिंग से दिमाग का केवल बायां भाग विकसित होगा और बच्चों में कलात्मकता विकसित नहीं हो पाएगी तो कैम्पके12 के अंशुल भागी के पास इसका जवाब है। वे कहते हैं कि कोडिंग, हिन्दी, अंग्रेजी या फ्रेंच की तरह ही एक भाषा है। अंशुल के मुताबिक, जैसे भाषा से हम अभिव्यक्ति और कविता जैसे रचनात्मक स्वरूप, दोनों तरह के संवाद कर पाते हैं, कोडिंग में भी कलात्मकता और अभिव्यक्ति की बहुत संभावनाएं हैं।
आईआईटी दिल्ली से पढ़े, स्माउल के सह-संस्थापक शैलेंद्र धाकड़ मानते हैं कि 12 से 14 साल स्कूल की पढ़ाई उन नए बच्चों को बहुत परफेक्ट बना सकती है और कम्प्यूटर की बेसिक समझ दे सकती है, जो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कॅरिअर बनाना चाहते हैं। और उन्हें लगता है कि स्कूलों को इस नई जरूरत के मुताबिक खुद को ढालना होगा। शैलेंद्र कहते हैं, ‘जैसे बच्चे क्रेयॉन्स से चित्र बनाते हैं, वैसे ही कोडिंग कुछ खूबसूरत और रचनात्मक बनाने के लिए प्रोग्रामिंग का इस्तेमाल करती है।’ माता-पिता भी कोडिंग की इन ऑनलाइन या फिजिकल कोचिंग क्लासेस का साथ दे रहे हैं, उन्हें लगता है कि किसी भी बच्चे के लिए डिग्री के साथ कौशल होना भी जरूरी है। इन मॉड्यूल्स के खत्म होने के बाद ये बच्चे मोबाइल एप्स, छोटे गेम्स और यहां तक कि अपने पैरेंट्स के बिजनेस के लिए जानकारी वाली वेबसाइट्स तक बना पा रहे हैं। वे दिन गए जब मेहमानों के आने पर बच्चों का परिचय यह कहकर करवाते थे कि ‘यह पिआनो या तबला बजा सकता है’। बच्चों का परिचय करवाने का नया तरीका है, ‘ये रंगबिरंगी वेबसाइट्स और मोबाइल एप इसने बनाए हैं।’
हालांकि कोडिंग भविष्य है, लेकिन इसका सबसे बड़ा नुकसान है बच्चों द्वारा स्क्रीन के सामने बिताने वाले समय का बढ़ना। खासतौर पर तब, जब आधुनिक समय में पैरेंटिंग की सबसे बड़ी चुनौती बच्चों के लिए गैजेट्स की उपलब्धता है। शायद माता-पिता को भी बच्चों की जिंदगी रंग-बिरंगी बनाने के लिए संतुलन और निगरानी का नया कोर्स करना पड़ेगा।
अंग्रेजाें ने बंद कराना चाहा, लेकिन नहीं हुए कामयाब
ग्रामीण जसमेर ने बताया की एक बार अंग्रेजी हुकूमत के साथ मतभेद हो गया था। अंग्रेजों ने गांव में फाग बंद करा दिया था। ग्रामीणों का रोष बाहर निकल आया। अंग्रेजों को ग्रामीणों की बात मानने को मजबूर होना पड़ा। कलेक्टर ने एक महीने बाद फाग उत्सव मनवाया। 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान फाग नहीं मनाया गया था। इसके एक महीने बाद गांव में रंगों की डाट लगाई थी।
रंगाें की डाट
नौल्था के सरपंच बलराज जागलान ने बताया कि फाग उत्सव में रंगों की डाट का विशेष महत्व है। फाग के दिन गांव की मुख्य चौपालों पर रंगों के कढाए भर कर रख लेते है फिर इकट्ठे होकर एक के बाद एक सभी चौपालों पर जाते है। ग्रामीण नीचे खड़े हो जाते है और फिर ऊपर से उनके ऊपर रंग बरसाया जाता है।
कान्हा संग भक्ताें ने खेली होली
पानीपत | वार्ड-9 स्थित प्रेम मंदिर के नजदीक होली के कार्यक्रम का अायाेजन किया गया। कार्यक्रम से पहले सत्संग भी किया गया था। फिर कान्हा और राधा सभी के साथ भक्ताें ने होली खेलते हुए नृत्य किया। शशि लूथरा ने कहा कि हमें होली के पवित्र त्योहार में अपने दिलों से नफरत छोड़नी होगी। अपने दिलों में प्यार की भावना इन पवित्र रंगों की तरह लानी होगी। इस मौके पर मधुबाला, रेखा, बबीता, मोना सहित अन्य महिलाएं माैजूद रहीं।
‘बच्चे गंदे रंगाें से परहेज करें’
पानीपत | सलारगंज गेट स्थित फादर्स प्राइड प्लेवे में हाेली काे त्याेहार मनाया गया। बच्चाें के साथ माताअाें काे भी स्कूल में बुलाया गया अाैर उनके साथ गुलाल की हाेली खेली गई। वहीं अध्यापकाें के साथ बच्चाें ने फूलाें की भी हाेली खेली। घराैंडा से अाए सुमित सपड़ा ने अपने भजनाें से बच्चाें काे मंत्र मुग्ध कर दिया। स्कूल के डायरेक्टर संजीव परूथी एवं प्रिंसिपल गीतू परूथी ने बताया कि बच्चाें काे गंदे रंगाें से परहेज करना चाहिए। गुलाल व फूलाें से खेले। लड़ाई झगड़ाें से दूर रहकर अापसी भाईचारा कमाएं। इस माैके पर दीक्षा, सीमा, दिव्या, कनिका, ममता, पारूल, पूजा, बरखा, शिल्पा, माेना, ज्याेतिका, रजनी, साेनिया, सुषमा रानी माैजूद रही।
बच्चों को सुनाई होलिका की कथा
थर्मल| आर्यन ग्लोबल पब्लिक स्कूल, शेरा में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। सर्वप्रथम होलिका दहन कर सभी विद्यार्थियों को प्रहलाद और होलिका की कथा सुनाई गई। जिससे विद्यार्थियों को त्योहार से संबंधित इतिहास का ज्ञान हो। तत्पश्चात विद्यार्थियों व अध्यापक गण द्वारा फूलों की होली खेली गई। अंत में प्रिंसिपल शिवानी ने सभी विद्यार्थियों को होली में इको फ्रेंडली रंग व गुलाल इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया। स्कूल प्रबंधक सोहन सिंह जी ने कहा कि हमारे जीवन में पानी का महत्व सबसे अधिक है।
जीजीएस पब्लिक स्कूल में खेली हाेली
पानीपत | असंध रोड स्थित गुरु गोबिंद सिंह पब्लिक स्कूल में साेमवार काे होली त्याेहार मनाया गया। जूनियर विंग के सभी छात्रों ने फूलाें की हाेली खेली। छात्रों ने विभिन्न गानों पर नृत्य किया व एक दूसरे को तिलक लगाया।
विद्यालय के निदेशक मनोज धमीजा तथा प्रिंसिपल पूजा जुनेजा ने होली का महत्व बताते हुए कहा कि हमें प्रत्येक त्योहार की पवित्रता व गरिमा को बनाये रखने के लिए अपनी संस्कृति व सभ्यता का परिचय देना चाहिए। होली के रंग फूलों के संग स्लोगन के साथ कार्यक्रम का समापन हुअा।
अवनीश और कविता बेस्ट कार्यकर्ता चुने गए
मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें
होलिया में उड़े रे गुलाल... गीत पर झूमे बच्चे
महिलाओं को किया सम्मानित
आज कांशीगिरि मंदिर से निकाली जाएगी दिव्य होली मिलन शोभायात्रा
902 साल सेे आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश दे रहा नौल्था का होली और फाग उत्सव
‘जरूरतमंदाें की सेवा भगवान की सेवा के बराबर’
सिंगला मार्केट एसाेसिएशन ने मनाया हाेली पर्व
अजय बाेहत | इसराना
गांव नाैल्था में अाज 902वां फाग खेला जाएगा। नौल्था की डाट होली देशभर में प्रसिद्ध है। यहां की डाट होली देखने और खेलने के लिए दूर-दूर से रिश्तेदार आते हैं। यहां पर अनोखी ही होली मनाई गई। कहानी बरसों पुरानी है। अंग्रेज भी इनके त्योहार को मनाने से रोक नहीं सके थे। फाग के एक सप्ताह पहले ही सूखी डाट लगाकर इसकी शुरुअात हाे जाती है, पहले दिन गांव के एक हिस्से में डाट लगाई जाती है।
36 बिरादरी के लोग फाग उत्सव में शामिल होकर आपसी सौहार्द व भाईचारे का संदेश देते आ रहे है। करीब 100 साल पहले गांव के धुमन जेलदार के बेटे की फाग के दिन सुबह अचानक मौत हो गई थी। ग्रामीणों ने फाग न मनाने का फैसला किया। लेकिन धूमन ने परंपरा को बनाए रखने के लिए खुद अागे जाकर रंग की पिचकारी भरकर अपने मृतक पुत्र को मारी, फिर ग्रामीणों ने फाग खेला।
पानीपत | एसडी कॉलेज में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की ओर से एनएसएस पाठ्यक्रम के अनुसार 7 दिवसीय एनएसएस कैंप का साेमवार काे समापन किया गया। काॅलेज प्रधान डॉ. एसएन गुप्ता और प्रिंसिपल डॉ. अनुपम अरोड़ा ने प्रतिभागी एनएसएस कार्यकर्ताओं को उनके उत्कृष्ठ कार्य और सेवा भाव के लिए सम्मानित किया गया। पुरुषों में बेस्ट कार्यकर्ता का प्रथम स्थान अवनीश ने और दूसरा स्थान सूरज ने हासिल किया। वहीं महिलाओं में प्रथम स्थान कविता ने और दूसरा स्थान रमा बजाज ने प्राप्त किया। एनएसएस प्रभारी डॉ. राकेश गर्ग, डॉ. संतोष कुमारी, प्रो. सुरेंद्र कुमार वर्मा और प्रो. मनोज कुमार ने बताया कि इस कैंप में काबड़ी गांव को गोद लिया गया था जहां पर जाकर कॉलेज के युवाओं ने जागरूक किया। छात्राें ने सूखे रंगों और फूलों से जमकर होली खेली।
पानीपत. सलारगंज गेट स्थित फादर्स प्राइड प्लेवे में होली मनाया गया।
पानीपत. गुरु गोबिंद सिंह पब्लिक स्कूल में फूलाें की हाेली खेलते हुए।
पानीपत. श्री कृष्ण सुदामा मित्र मंडल द्वारा अायाेजित सत्संग में भाग लेते श्रद्धालु।
फंडा यह है कि  रंगों के त्योहार होली पर यह समझें कि बच्चों के युवा मन को कौन-से विषय रंगों से भरते हैं। फिलहाल कोडिंग उनके लिए सबसे रंगीन विषय लग रहा है। इनका भविष्य परफेक्ट बनाने के लिए आने वाले शैक्षणिक सत्र में कोडिंग का ये रंग जोड़ सकते हैं।
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एन. रघुरामन
मैनेजमेंट गुरु
raghu@dbcorp.in
 
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, पानीपत, मंगलवार 10 मार्च, 2020
समालखा| चंदन बाल विकास पब्लिक स्कूल आट्टा में सोमवार को होली महोत्सव बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया। कार्यक्रम में बच्चों ने नाटक भाषण, कविताएं, गीत, नृत्य आदि प्रस्तुत किए। होलिया में उड़े रे गुलाल नृत्य ने सबका मन मोह लिया। बरसाने की होली राधा, कृष्ण के नृत्य से दर्शायी गई। विद्यार्थियों के द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। भक्त प्रहलाद की दृढ़ता नाटक के द्वारा प्रस्तुत की गई।
समालखा | गांधी स्मारक निधि पब्लिक स्कूल आश्रम पट्टी कल्याणा में वार्षिक उत्सव एवं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्री कंवर सिंह छौक्कर, डॉ. नरेश गुलाटी, कृष्ण कुमार शारदा अध्यक्ष गांधी स्मारक निधि, अंजू बाजपेई अन्य सभी विशिष्ट अतिथियों ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। बच्चों के रंग बिरंगे कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। वहीं महिला दिवस पर जागरूक महिलाओं को सम्मानित किया गया। सरपंच पट्टी कल्याणा निशा चोकर, कोमल ने खेलकूद में देश का नाम रोशन करने वाली 15 वर्ष की लड़की जो चार बार विदेश में अपने देश का गौरव बढ़ा चुकी है और आंगनवाड़ी वर्कर आशा वर्कर को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया।
एेसे शुरू हुई परंपरा
ग्रामीण चंद्रसिंह जागलान ने बताया कि नौल्था गांव में डाट होली यह बाबा लाठेवाले की देन है। वे एक बार अपने साथियों के साथ ब्रज में गए थे। वहां की होली से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अगले वर्ष नौल्था गांव में होली मनानी शुरू कर दी। असल में ताे डाट का सही अर्थ सपाेर्ट देना होता है। यहां डाट में युवाओं के दो ग्रुप बन जाते हैं। रस्साकशी खेल की तरह आमने-सामने होते हैं। फिर दाेनाें ग्रुप के लाेग सीने से एक-दूसरे को धक्का देते हैं। जिस भी पाने के लोग जीत जाते है फाग वाले पहले रंग लगाने का हक उन्हीं का होता है। यह सिलसिला एक सप्ताह तक लगातार जारी रहता है। इसे सूखी डाट कहते हैं।
जाे जीता उसे पहले मिलता है रंग लगाने का माैका
ग्रामीणों ने बताया-902 साल पहले बाबा लाठेवाले मथुरा से लाए थे डाट होली की परंपरा
पानीपत | समाज सेवा संगठन की ओर से मदर टेरेसा आश्रम के बच्चों के साथ हाेली पर्व मनाया गया। समाज सेवा संगठन अध्यक्ष प्रवीन जैन ने बताया कि संगठन ऑफिस अग्रवाल मंडी में बच्चाें काे प्रसाद बनाकर खिलाया गया। जैन ने बताया हम होटलों में पार्टी कर एन्जॉय करते है लेकिन अगर हम जरूरतमंदों के साथ त्योहार मनाते हैं तो जरूरतमंद की सेवा होती है। अपने मन को शांति मिलती है। जरूरतमंदों की सेवा करना भगवान की सेवा के बराबर हैं। पुराणों में भी वर्णन है नर सेवा ही नारायण सेवा है। इस माैके पर गुलशन कटारिया, काजल जैन, मनीष गोस्वामी माैजूद रहे।
भास्कर न्यूज | पानीपत
किला स्थित हाफिजाबादी राम नाटक क्लब में साेमवार काे श्री कृष्ण सुदामा मित्र मंडल की अाेर से 16वीं फूलाें की हाेली महाेत्सव एवं संकीर्तन रस प्रवाह का अायाेजन किया गया। कार्यक्रम प्रेम मंदिर की परमाध्यक्ष कांता देवी महाराज की अध्यक्षता में मनाया गया। इसमें भजन संकीर्तन सम्राट पवन, रविश मिश्रा ने हाेली के भजनाें की प्रस्तुति दी। उन्हाेंने बाबा तेरा दरबार अनोखा…, होलिया में उड़े रे गुलाल…। उन्हाेंने कहा कि लाेगाें काे त्याेहार अापसी भेदभाव काे मिटाकर प्रेम भाव से मनानी चाहिए। इस माैके पर अशाेक नारंग, प्रदीप भराड़ा, सुशील भराडा, एडवाेकेट अरविंद, सुरेंद्र चाैहान, राेहित वर्मा, अनुज, कर्ण, सन्नी, डिंपल शर्मा, संतलाल, राम अाहुजा, राजेश सहगल माैजूद रहे।
पानीपत | सलारगंज गेट स्थित सिंगला मार्केट एसाेसिएशन की ओर से साेमवार काे एक मीटिंग का अायाेजन किया गया। मीटिंग में प्रधान नरेश हांडा का एक वर्ष का कार्यकाल पूरा हाेने पर उनका सभी दुकानदाराें ने सम्मानित किया गया। दुकानदाराें ने मिलकर हाेली का पर्व भी मनाया। इस माैके पर हरकेश शाम, विनाेद, रमेश मल्हाेत्रा, दीवानचंद, संदीप जैन, राधे शाम गुप्ता, साैरव मल्हाैत्रा, राजकुमार जुनेजा, लक्की चुघ माैजूद रहे।