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आढ़तियों के कमीशन, फुटकर वालों की मुनाफाखोरी से 7 किमी में ही 4 गुना बढ़ जाते हैं सब्जियों के दाम

एक वर्ष पहले
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{किसान को फायदा नहीं, लोग 4 गुना महंगी खरीद रहे सब्जी

आढ़तियों के कमीशन और फड़ी-रेहड़ी वालों की मुनाफाखोरी से 7 किलोमीटर (उदाहरण के लिए - उग्राखेड़ी से अाठ मरला चाैक तक) में ही सब्जियों के दाम 4 गुणा बढ़ जाते हैं। बड़ी बात यह है कि इससे न ताे किसान को कोई फायदा हाे रहा अाैर न ही पब्लिक काे। कोरोना वायरस के कारण सरकार ने तीन दिन पहले अपनी सब्जी मंडी बंद करने का आदेश क्या दिया, आढ़तियों और फड़ी-रेहड़ी वालों की चांदी हो गई। 19 मार्च की शाम से ही सब्जी के दाम में आग लगी है। चौक-चौराहों पर 20 रुपए प्रति किलो बिकने वाला आलू आज 40 रुपए किलो बिक रहा है। सरकार ने साफ कर दिया कि आढ़तियों वाली स्थाई सब्जी मंडी बंद नहीं होगी, लेकिन दाम कम नहीं हुए क्योंकि जिस पर दाम को लगाम लगाने की जिम्मेदारी है, वह मार्केट कमेटी इसकी सुपरवाइजरी कर रही है।

3 सीन से जानिए...मंडी में कैसे बढ़ते हैं सब्जी रेट

1 - किसान से आढ़ती : उग्राखेड़ी, निंबरी, छाजपुर, छाजपुर कला, कुराड़, सनौली, यमुना किनारे के गांव नवादा अार व नवादा पार सहित आसनकलां आदि के किसान सब्जी बेचने मंडी आते हैं। सुबह 5 बजे से ही किसान आने लगते हैं। सुबह 6 बजे के बाद आढ़ती मंडी पहुंचते हैं और सब्जियों की बोली शुरू होती है।


2. आढ़ती से फड़ी वाला : किसान से खरीदी सब्जी आढ़ती अब फड़ी वालों को बेचता है। यहां पर ही डेढ़ से दोगुना कीमत वसूली जाती है। यह बोली सुबह 8-9 बजे तक चलती है।


3. फड़ी वाले से छोटे दुकानदार व रेहड़ी वाले : फिर फड़ी वाले छोटे दुकानदार और रेहड़ी वालों को माल बेचते हैं। यहां भी डेढ़ से दोगुना दाम वसूला जाता है। यहां से चौक-चौराहों पर पहुंची सब्जी चार गुणी महंगी हो जाती है।

हर स्तर पर बढ़ रहे दाम

भास्कर ने शनिवार सुबह 6 बजे से 11 बजे के बीच सनौली रोड सब्जी मंडी में सब्जी की महंगाई की असलियत जानी तो हकीकत चौंकाने वाली निकली। असल में हर स्तर पर मुनाफाखोरी हो रही है। आढ़ती तो किसान से खरीदकर मौके पर ही फड़ी वालों को बचने में सब्जी दोगुना महंगी कर देता है। ऊपर से किसान और फड़ी वाले से कमीशन अलग। फड़ी वाला आगे रेहड़ी वालों को डेढ़ गुणा कीमत पर बेचता है। रही-सही कसर रेहड़ी वाला आम आदमी से निकाल लेता है।

खिलाफ भास्कर
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