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डिजिटल मीटर से मिलेगी हीमोग्लोबिन की रिपोर्ट, टेस्ट-ट्रीटमेंट-टॉक से एनीमिया का इलाज

Panipat News - एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत अब सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर अर्ली स्टेज पर एनीमिक या खूनी कमी से ग्रस्त...

Dec 11, 2019, 08:10 AM IST
Panipat News - haryana news digital meter will provide hemoglobin report treatment of anemia by test treatment talk
एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत अब सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर अर्ली स्टेज पर एनीमिक या खूनी कमी से ग्रस्त रोगियों का पता लगाने के लिए ट्रू एचबी हिमोमीटर और माइक्रो क्यूट टेस्ट मीटर का सहारा लिया जा रहा है। खून की एक बूंद से महज 3 सेकंड में खून में एचबी की मात्रा का पता लगा लेती है। जिले की सभी सीएचसी, पीएचसी व अन्य स्वास्थ्य केंद्राें के लिए नए ट्रू एचबी हिमोमीटर और माइक्रो क्यूट टेस्ट मीटर उपलब्ध करा दिए हैं। वहीं सभी लैब टेक्नीशियन काे ट्रेनिंग भी दी गई है। अभी तक 56 एचबी हिमाेमीटर एएनएम काे दिए हैं। 200 अगले सप्ताह दिए जाएंगे।

कुपोषित बच्चों व गर्भवती की सेहत पर फाेकस

नाेडल अधिकारी डाॅ. ललित वर्मा ने बताया कि कुपोषित व मध्यवर्ती कुपोषित बच्चों व गर्भवती की सेहत में सुधार पर अब पूरा फोकस है। स्वास्थ्य विभाग अब स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों पर थ्री-टी कैंप यानी टेस्ट, ट्रीटमेंट व टॉक से कुपोषण व एनीमिया को जड़ से मिटाने का काम करेगा। कुपोषण को जड़ से समाप्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार लोगों को जागरूक करेगी साथ ही स्वास्थ्य की जांच भी करेगी।

इसलिए पड़ी जरूरत

पिछले माह अाई राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिवार सर्वेक्षण (एनएचएफएस-4) रिपाेर्ट के अनुसार प्रदेश में 6 माह से 59 माह तक के 72 फीसदी बच्चे, 55 फीसदी गर्भवती महिलाएं, 19 साल तक की 62 फीसदी लड़कियां और स्तनपान करवाने वाली 70 फीसदी महिलाएं खून की कमी से ग्रस्त हैं।

9 टीमें कर रही जांच

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमअाे डॉ. ललित वर्मा ने बताया कि इस अभियान के तहत ट्रेनिंग दी गई है। छोटे बच्चों, किशोरियों व गर्भवती की जांच की जाएगी। हर आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल को कवर किया जाएगा। उनकी करीब 9 टीम जांच करेंगी। इनमें दो डॉक्टर, एएनएम शामिल हैं। लोगों से अपील है कि वह अपने बच्चों की जांच जरूर करवाए। कई बार जांच के दौरान बच्चे नहीं मिलते। ऐसे में आंगनबाड़ी पर रजिस्ट्रेशन करवाएं और वहां मिली रही सुविधा का लाभ उठाए।

एेसे समझिए क्या है थ्री-टी :

पहला टी -टेस्ट : कैंप के अंदर आने वाले बच्चों व गर्भवती की खून की जांच, इंफेक्शन की जांच हो, वेट, हाइट के साथ अन्य जांच होंगी। जबकि गर्भवती की करीब 27 तरह की जांच की जाएगी।

दूसरा टी - ट्रीटमेंट : टेस्ट करने के बाद कुपोषित व मध्यवर्ती कुपोषित बच्चों व गर्भवती का इलाज किया जाएगा। नि:शुल्क दवाएं दी जाएंगी। पूरा हेल्थ डाटा रखा जाएगा।

तीसरा टी- टॉक : ट्रीटमेंट के बाद बच्चे की सेहत पर तो नजर रखी जाएगी, उसके व्यवहार को भी देखा जाएगा। अर्थात वह कितना बोलता है। कद के अनुसार वजन बढ़ रहा है या नहीं।

पानीपत. नए मीटर से खून की जांच करते हुए।

हर ब्लाॅक पर लगेंगे कैंप

थ्री-टी कैंप हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर लगाए जाएंगे। इन कैंप पर आने वाले बच्चों व महिलाओं की विशेष जांच की जाएगी और इलाज शुरू किया जाएगा। एनीमिया मुक्त भारत के लिए जमीनी स्तर पर काम किया जा रहा है। हर कैंप की जानकारी संबंधित क्षेत्र में पहले से दी जाएगी। एनएचएम, महिला कल्याण एवं बाल विकास, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के बैनर तले एनीमिया मुक्त भारत अभियान चल रहा है।

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