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आईटी सेक्टर दूसरों के लिए ग्रोथ का इंजन, इसमें तेजी का दौर बना रहेगा

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:16 AM IST

Panipat News - चुनाव के दौरान घरेलू शेयर बाजार अस्थिर बने हुए हैं। मौजूदा एनडीए सरकार की वापसी की संभावनाओं के बीच बाजार ने नई...

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चुनाव के दौरान घरेलू शेयर बाजार अस्थिर बने हुए हैं। मौजूदा एनडीए सरकार की वापसी की संभावनाओं के बीच बाजार ने नई ऊंचाई को भी छुआ है। आगे विदेशी निवेश, कंपनियों के नतीजे, रुपए की कीमत और ब्याज दरों में कटौती पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी। घरेलू परिस्थितियों पर नजर डालें तो 12 अप्रैल को खत्म हफ्ते में वोलेटिलिटी इंडेक्स 14.2% बढ़ गया। रुपया मार्च में 2.3% मजबूत हुआ और इस लिहाज से एशिया की सबसे अच्छी करेंसी रहा। फरवरी में यह सबसे कमजोर करेंसी में था। खपत और इन्वेस्टमेंट में रिकवरी से आगे इकोनॉमी की ग्रोथ तेज रहने के आसार हैं। विश्व अर्थव्यवस्था पर नजर डालें तो विभिन्न देशों की संरक्षणवादी नीतियों के कारण ग्रोथ कम हुई है। भारतीय आईटी कंपनियों के काफी एच1-बी वीसा आवेदन रद्द किए गए हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान बड़ी कंपनियों को ही हुआ है।

आईटी: इस साल 265 लाख करोड़ रुपए ग्लोबल खर्च का अनुमान : कंसल्टेंसी फर्म गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार 2019 में आईटी पर ग्लोबल खर्च 265 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। हर सेक्टर में इनोवेशन वाली टेक्नोलॉजी कि मांग बढ़ रही है। दुनिया भर में कंपनियां इसी के बल पर ग्रोथ की संभावनाएं तलाश रही हैं। आईटी सेक्टर में इंटरनेट ऑफ थिंग्स और क्लाउड आधारित एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर की मांग ज्यादा है।

दरअसल, आईटी अब बिजनेस बढ़ाने वाला इंजन बन गया है। रिटेल, कम्युनिकेशन और बैंकिंग सेक्टर की कंपनियां डिजिटल सिस्टम को अपना रही हैं। हालांकि ट्रेड वॉर और ब्रेक्जिट जैसी घटनाएं ग्लोबल मार्केट को अस्थिर कर रही हैं, लेकिन अमेरिका में कॉरपोरेट टैक्स में कटौती, भारत में टेलीकॉम सेक्टर में तेजी और 5जी का आना आईटी इंडस्ट्री के लिए अच्छे संकेत हैं।

तेल एवं गैस: बेहतर मार्जिन से कंपनियों के नतीजे अच्छे रहने की उम्मीद : जनवरी-मार्च तिमाही में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 63.9 डॉलर प्रति बैरल रही। तिमाही की शुरुआत में कीमत 55.8 डॉलर थी जो मार्च में 67.6 डॉलर तक पहुंच गई। ओपेक द्वारा जनवरी में उत्पादन 12 लाख बैरल रोजाना घटाने के कारण दाम बढ़े। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध का भी असर रहा। ग्लोबल इकोनॉमी में सुस्ती से तेल की डिमांड में भी कमी आई है। इस वजह से सिंगापुर का बेंचमार्क ग्रॉस रिफाइनरी मार्जिन (जीआरएम) 25% घटकर 3.2 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। दिसंबर तिमाही में यह 4.3 डॉलर था।

कम मांग के कारण एलएनजी की स्पॉट कीमतों में पिछली तिमाही के मुकाबले 30.8% कमी आई है। बेहतर मार्जिन के कारण तेल बेचने वाली भारतीय कंपनियों के नतीजे मार्च तिमाही में अच्छे रहने की उम्मीद है। हालांकि ग्लोबल ट्रेंड के अनुसार जीआरएम कम ही रहेगा। इसके 4.5-5.5 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है। लेकिन बेहतर मार्केटिंग मार्जिन से इसकी भरपाई हो जाएगी।

एलपीजी/गैस में ट्रेडिंग मार्जिन घटने के आसार हैं। इसलिए इनकी ट्रेडिंग करने वाली कंपनियों का प्रदर्शन औसत रहेगा।

- ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।

देवेन आर. चोकसे, एमडी, केआर चोकसे इन्वेस्टमेंट

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