सुझाव / दो भाषाओं में राशन कार्ड जारी करने की सलाह, दिल्ली मानवाधिकार आयोग ने सभी राज्यों से मांगी रिपोर्ट

haryana news human rights commission suggest every state to make Rashan card in two language
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  • अन्य शहरों में जाकर उपचाकर करवाने में नहीं आएगी राशन कार्ड धारक को दिक्कत

दैनिक भास्कर

Aug 31, 2019, 12:28 PM IST

चंडीगढ़। दूसरे राज्यों में राशन कार्ड को लेकर आ रही परेशानी के चलते दिल्ली मानवाधिकार आयोग ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से दो भाषाओं में राशन कार्ड बनाने को लेकर रिपोर्ट मांगी है। 
 

आयोग ने याचिका पर सुनवाई के बाद कहा है कि देश के किसी भी राज्य से जारी होने वाले बीपीएल राशन कार्ड को दो भाषाओं में जारी किया जाना चाहिए। पहला उस राज्य की अपनी भाषा और दूसरी सरल भाषा (अंग्रेजी) होनी चाहिए ताकि किसी भी बीपीएल परिवार को अन्य शहरों (खासकर महानगरों) में निशुल्क उपचार के दौरान दिक्कत न हो। 
 

दिल्ली मानवाधिकार आयोग ने भारत सरकार के केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सचिव, सभी राज्यों के मुख्य सचिव व केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र जारी करके रिपोर्ट मांगी है। साथ ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव को दिल्ली के सभी कार्ड केंद्रों के अलावा केंद्र सरकार के अस्पतालों में बीपीएल कार्ड धारकों के लिए एक समर्पित काउंटर खोलने के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करने बारे कहा है। 
 

आयोग का फरमान मिलने के बाद हरियाणा सरकार ने विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। साथ ही उस पर सुझावों को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है ताकि जल्द ही अपनी रिपोर्ट आयोग के पास भेजी जा सके।
 

इलाज में बीपीएल परिवारों को आ रही दिक्कत
दरअसल, सभी राज्यों के बीपीएल राशन कार्ड दो भाषाओं में जारी किए जाने को लेकर फरीदाबाद के शैलेंद्र सिंह नेगी ने दिल्ली मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि अगर कोई बीपीएल कार्ड धारक किसी अन्य राज्य के अस्पताल या दिल्ली जैसे महानगर के सरकारी अस्पताल में अपना इलाज करवाने जाता है तो उसे निशुल्क उपचार के लिए सबसे पहले बीपीएल राशन कार्ड की फोटो कापी देनी होती है। जो एक बुनियादी जरूरत होती है। 
 

क्योंकि अस्पताल पर काम करने वाले व्यक्ति को संबंधित बीपीएल कार्ड में दर्ज क्षेत्रीय भाषा की जानकारी नहीं होती, इसलिए वह उसे वापिस भेज देते हैं या फिर उसका उपचार करने से इंकार कर देते हैं। ऐसे में उन्हें बार-बार फरियाद करने पर कानूनी झंझट में धकेल दिया जाता है। ऐसा भी कोई साधन या केंद्र नहीं है, जहां जाकर वह अपने कार्ड की प्रामाणिकता साबित कर पाए। जिस कारण प्रभावित व्यक्ति को इलाज लेने में दिक्कत आती है। 

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