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महत्वपूर्ण ये नहीं कि अापका घर छाेेटा या बड़ा है त्याग व इज्जत ही सुख-शांति लाएगी : सुधांशु

Panipat News - जैसा कि सुधांशु महाराज ने भास्कर के अाग्रह पर लिखित में भेजे संदेश महत्वपूर्ण ये नहीं कि अापका घर छाेेटा है या...

Mar 27, 2020, 08:15 AM IST
Panipat News - haryana news it is not important that your house is full or big sacrifice and respect will bring happiness and peace sudhanshu

जैसा कि सुधांशु महाराज ने भास्कर के अाग्रह पर लिखित में भेजे संदेश

महत्वपूर्ण ये नहीं कि अापका घर छाेेटा है या बड़ा। अगर पूरे परिवार में त्याग, भावना व इज्जत है ताे ही सुख-शांति अाएगी। हमारा घर किसी हिल स्टेशन से कम नहीं है। प्राचीन घरों में नैतिकता व त्याग भावना दिखाई देती थी। लोग कहते थे कि इज्जत की रोटी कमाओ, इज्जत की रोटी खाओ। इज्जत ही तुम्हारी सबसे बड़ी कमाई है। परिवार छाेटा ही सही मगर अच्छा हाे।

जिस घर में प्यार नहीं है, एक दूसरे के प्रति समर्पण भाव नहीं, वह घर ताे नरक समान हाेता है। ऐसी बातों पर कभी ध्यान नहीं दिया जाता कि परिवार में कितने सदस्य हैं। उनमें आनंद कितना है, यही ध्यान दिया जाता है।

प|ी-पति की बात मानने काे तैयार नहींं हाेती

प|ी-पति की बात मानने काे तैयार नहींं हाेती, बल्कि मायके से पैसे लाने तक की बात करती है। पति कहता है कि मायके से पैसे मंगवाएगी तो यह मेरे लिए लानत है। ये सब बातें सुन सास कि मेरे बच्चे घूमने जाना चाहते हैं तो इसके लिए मुझे थाेड़ा-सा त्याग करना पड़ेगा। बेटे को बुलाकर बाेली, बेटा बहू जहां कह रही है उसे ले जा। पूरी जिंदगी समस्याओं के घेरे में घूमते रहोगे ताे रिश्ताें में खटास हाेगी। बाहर जाओगे तो एक-दूसरे को समझोगे। अभी बहू काे घर के तौर-तरीकाें के बारे में पता नहीं है। मां ने अपने कंगन उतारकर देते हुए कहा कि इन्हें बेचकर किसी हिल स्टेशन पर घूमने चले जाओ। बहू भी इन सब बाताें काे खिड़की के पास कान लगा ये साेच सुन रही थी कि मां-बेटे में उसके खिलाफ क्या खुसुर-पुसर हो रही है। लेकिन सास की बात सुन बहू का हृदय रो पड़ा। सवेरे उठ पति के आगे हाथ जाेड़ बाेली हमें कहीं घूमने-फिरने या फिजूल खर्ची करने की जरूरत नहीं है। हमारा हिल स्टेशन हमारा घर है।


सास का त्याग बहू काे भी दिखना जरूरी


एक मां ने अपने बच्चे को गरीबी में भी जीने का ढंग सिखाती है। त्याग व कर्तव्य का पाठ पढ़ाती है। बेटे की शादी के बाद बहू ने घर में आते पति से घूमने की जिद करती है। पति समझाता है कि पिता के गुजरने के बाद मां ने मुझे बड़ी मुश्किल से पाला है। कपड़े सीकर मुझे पढ़ाया। हम दाेनाें काे मां की खूब सेवा करनी चाहिए। बेटा प|ी काे समझाता है कि मेरे पास इतने ही पैसे जितने में अापका तन ढांप सकूं। पेट भर खिलाऊ। हम सैर काे जाएंगे ताे कर्ज लेना पड़ेगा।

सभी को सम्मान दें घर स्वर्ग बन जाएगा

सास जब बुजुर्ग हाे जाती है ताे वह भी चार धाम यात्रा की न साेचे। उसकी नजर में ताे पाेते पाेती ही बाल गाेपाल स्वरूप हाेने चाहिए। सास भी छाेटे-छाेटे पाेते को भगवान स्वरूप मानकर लालन पालन करेगी ताे यह भी किसी तीर्थ यात्रा से कम नहीं है। मंदिराें में भगवान दर्शन करने से पहले सास अपने बच्चाें काे अाैर बेटे बहू अपने माता पिता व सास ससुर काे भगवान स्वरूप ही मागेंगे ताे घर अपने अाप स्वर्ग बन जाएगा।

जिस घर में एक दूसरे के प्रति प्रेम और त्याग की भावना नहीं वो घर नरक के समान

सुधांशु महाराज

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