गेहूं की बालों से पेंटिंग ने दिलाई पानीपत के अशोक को पहचान

Panipat News - अभी तक आपने पेंट-ब्रश लेकर पेंटिंग करते ही कलाकार देखे होंगे, लेकिन पानीपत के गढ़ शरनाई गांव निवासी अशोक कुमार वह...

Feb 15, 2020, 08:20 AM IST
Panipat News - haryana news painting with wheat hair got ashok of panipat recognized

अभी तक आपने पेंट-ब्रश लेकर पेंटिंग करते ही कलाकार देखे होंगे, लेकिन पानीपत के गढ़ शरनाई गांव निवासी अशोक कुमार वह व्यक्ति हैं जो ब्रश का इस्तेमाल अपनी वुड कर्लिंग में नहीं करते। गेहूं के बाल (बालन) से वुड पर शानदार कलाकृति बनाने मे महारथ हासिल है। इसी कला ने इनको कला जगत में विशेष पहचान दिलाई है। दो से डेढ़ माह में एक कलाकृति तैयार होती है। इसकी मार्केट में अच्छी मांग भी है। अशोक बेहतरीन कला के लिए दो बार स्टेट अवाॅर्ड जीत चुके हैं। दाेनों बार इनको 25-25 हजार रुपए नकद पुरस्कार दिया गया। आइफा अवाॅर्ड विजेता भी हैं। अनाज मंडी जगाधरी में राज्य स्तरीय सरस मेले में उन्होंने स्टाल लगाया है। यहां सजावटी फूल व फूलदान प्रदर्शित किए हैं। उनके स्टाल पर अच्छी भीड़ रहती है। अशोक कुमार प्रजापत परिवार में शोभाराम के घर जन्मे हैं। बचपन मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाने में बीता। मिट्‌टी के भी आकर्षक सामान तैयार करते रहे हैं। बड़े होने पर ये हुनर काम आया। मन में कुछ अलग करने की ललक थी।

सपना था कला क्षेत्र में नाम कमाने का. 12वीं पास करने के बाद रोजगार की तलाश में थे, लेकिन नहीं मिला। इस पर कला में ही कुछ अलग करने के लिए यहां-वहां से मार्गदर्शन लिया। दोस्त के कहने पर थाइलैंड निकल गए। वहां जाकर वुड कर्लिंग का कोर्स किया जो कोर्स वहां सीखा वह भारत में नया था। वहां से 2007 में लौट आए। जब यहां आए तो आत्मविश्वास पूरा था। इसी को लेकर बाजार में निकले। पेंटिंग देखी वह भी दूसरे कलाकारों की। मार्केट में कुछ नए की डिमांड थी। इसी सोच में काफी समय बीत गया। नया प्रयोग किया, गेहूं की बालन से वुड कर्लिंग करने का। इस काम को करने में दिक्कत इसलिए नहीं आई क्योंकि इससे मिलता-जुलता कोर्स पहले ही कर चुके थे। जब पहली पेंटिंग की वह डेढ़ माह में बनी। वुड पर बनाई भगवान श्रीगणेश की कलाकृति। इसको लेकर कला बाजार पहुंचे। यहां प्रदर्शित पेंटिंग हाथोंहाथ बिक गई। 2008 में शुरू हुआ ये सफर अब तक निरंतर जारी है। गेहूं की बालन के बाद मक्का के बालों से भी वुड पर पेटिंग की। इस प्रकार के कलाकार प्रदेश में न के बराबर हैं। अब आॅर्डर पर ही पेंटिंग तैयार करते हैं। अशोक की प|ी माेनिका सहयोग करती हैं। बेटी कनिका पहली कक्षा में पढ़ती है।

ये भी है विशेषता. अशाेक कुमार बताते हैं कि पानी में तैरता कछुआ उन्होंने बनाया। ये कला थाइलैंड में सीखी थी। इसके साथ ही दीया तैयार किया जो पानी में बुझता नहीं है। एक बार जला दीया जाए तो कितने भी पानी में डालो नहीं बुझेगा। इसी तरह सुराही ऐसी तैयार की जिसमें पानी डालो कभी गर्म नहीं होता। हमेशा ठंडा रहता है। कितनी भी गर्मी क्यों न हो जाए, पानी ठंडा ही मिलेगा। इनके भाई भी कला में माहिर. अशोक के अनुसार भाई संदीप, कर्मचंद, धर्मवीर इस कला में निपुण हैं। इनका भाई दिलीप कुमार पुलिस पब्लिक स्कूल में कला अध्यापक हैं।

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