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पानीपत का एक गांव ऐसा भी, जहां टीवी देखने की मनाही

9 महीने पहले
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घर में डिब्बे के अंदर पैक करके रखे गए टीवी को दिखाते हुए मजाहिर।
  • हरियाणा में पानीपत का मुस्लिम बाहुल्य जलालपुर-2 ऐसा गांव हैं, जहां आज भी टीवी देखना गलत माना जाता है
  • सरपंच ने चुनावी वादा निभाने को पंचायत भवन में पहला टीवी लगवाया, पर चलवा नहीं पाए

पानीपत (गोविंद सैनी). आज विश्व टेलीविजन (21 नवंबर) दिवस है। पहले ब्लैक एंड वाइट, फिर रंगीन टेलीविजन आए और अब लोग एलसीडी से एलईडी व स्मार्ट टीवी के दौर आ में आए, लेकिन हरियाणा में पानीपत का मुस्लिम बाहुल्य जलालपुर-2 एक ऐसा गांव हैं, जहां आज भी टीवी देखना गलत माना जाता है। गांव के 150 घरों में सिर्फ 4 टीवी हैं। प्रभावशाली व्यक्तियों ने 3 घरों में यह कहकर टीवी बंद करा दिए कि युवा बिगड़ते हैं और हमारे इस्लाम में इसे देखने की इजाजत नहीं है। 

1) सिर्फ आंगनबाड़ी वर्कर आबीदा के घर में टीवी

2015 में सरपंच के चुनाव हुए तो प्रत्याशी मजाहिर ने वादा किया कि अगर वह चुनाव जीता तो गांव में पहला टीवी लाएगा। वह चुनाव जीता और पंचायत भवन में टीवी भी लगवाया, लेकिन कुछ दिन बाद बंद करा दिया गया। अब टीवी जिस बॉक्स में आया था, उसी में बंद कर सरपंच परिवार ने कमरे की रेक पर रख दिया। अब सिर्फ आंगनबाड़ी वर्कर आबीदा के घर में टीवी चलता है। आबीदा कहती है कि टीवी तो सिर्फ मंनोरंजन और सूचनाएं लेने का साधन है। इससे कोई बिगड़ता नहीं है। सिर्फ सोच का फर्क है।

गांव की आंगनबाड़ी वर्कर आबीदा गांव में अकेली ऐसी महिला है, जो 10वीं तक पढ़ी है। आबीदा ने बताया कि उसकी शादी 2000 में हुई थी, तब वो 9वीं कक्षा में थी, शादी होने के बाद वापस घर जाकर 10वीं की परीक्षा दी और पास हुई। 2006 में आंगनबाड़ी में नौकरी लगी थी। 2009 में सबसे पहले उसने ही गांव के बाहर स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ने भेजा। 2014 के चुनाव से पहले टीवी भी ले आए थे, लेकिन छुप-छुपकर देखते थे। अब भी कभी-कभार ही देखते हैं।

गांव में एक भी व्यक्ति सरकारी नौकरी पर नहीं है और न किसी ने कॉलेज की पढ़ाई की है। गांव में 5वीं तक स्कूल है। इसमें मात्र 70-80 बच्चे जाते हैं। इनमें लड़कियां सिर्फ 4 हैं। 5वीं के बाद बच्चे ज्यादा पढ़ते भी नहीं है। दूसरा बड़ा कारण है कि गांव के बुजुर्ग लोग मानते हैं इस्लाम में टीवी, फोटो को हराम माना जाता है। इसलिए वो इसका प्रयोग नहीं करते।

मुस्लिस बाहुल्य गांव में 150 घर हैं। 2015 में सरंपची के चुनाव में मजाहीर जीते। वादे के अनुसार गांव में पहला एलईडी टीवी पंचायत के लिए लाए। पंचायत भवन में इसे लगाया तो न्यूज देखी। सरपंच के पिता कहते हैं कि गांव के मौजिज लोगों ने यह कहकर टीवी बंद करा दिया कि इससे बच्चे बिगड़ते हैं और यह इस्लाम धर्म के खिलाफ है। दबाव में टीवी बंद करना पड़ा। इससे पहले 2009 के पूर्व सरपंच काला को सरकार ने टीवी उपहार में दिया था, लेकिन मौजिज व्यक्तियों के दबाव में एक दिन भी नहीं चला। वहीं गांव के कुछ बुजुर्गों का कहना है कि जिले या देश में क्या हो रहा है, उन्हें पता ही नहीं चलता। युवाओं के पास मोबाइल है, वो मोबाइल पर सब देख लेते हैं।

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