समस्याएं सब के पास हैं, इनके जालों से बाहर निकलो : सुधांशु महाराज

Panipat News - जैसा कि सुधांशु महाराज ने दैनिक भास्कर के आग्रह पर लिखित में भेजे प्रवचन... व्यक्ति अपनी शक्तियां पहचान लेता है...

Mar 31, 2020, 08:15 AM IST

जैसा कि सुधांशु महाराज ने दैनिक भास्कर के आग्रह पर लिखित में भेजे प्रवचन...

व्यक्ति अपनी शक्तियां पहचान लेता है तो विकास हाेता है। अपनी शक्तियां न पहचानने का मतलब है आप स्वयं के शत्रु हैं। जाे शक्तियां-क्षमताएं पहचानते हैं, वह जीवन में कमाल कर जाते हैं। समस्याएं सब के पास हैं, इनके जालों से बाहर निकलो। आपकी क्षमता से समस्याएं भागने लग जाएंगी।

हर व्यक्ति को अपना सर्वश्रष्ठ मित्र बनाएं। अपने को शाबासी भी देनी चाहिए, आत्म-हीनता नहीं आने देनी चाहिए। दीन-हीन बन कर जीवन मत जिओ। जब स्वयं को नहीं पहचानोगे, दुनिया में दुःख चिंताएं, समस्याएं सताएंगी। जब स्वयं की पहचान कर लोगे, चिंता डर कर दूर भागेगी। साहस रख कर भीड़ से हट कर, लगातार प्रयास द्वारा आप सफलता प्राप्त करते हैं। आप जागरूक हैं तो स्वयं के मित्र हैं, नहीं तो स्वयं के शत्रु हैं। स्वयं के मित्र बनो-शत्रु नहीं। सफलता के लिए सौ साथ-विफलता अनाथ है।’ दुःख व्यक्ति को अकेला कर देता है। रिश्ताें की भीड़ में काेई साथ नहीं देता, दर्द नहीं पहचानता, काेई अपना दिखाई नहीं देता। जब आंखों में आंसू हाें, बदनसीबी साथ हाे, तो उस समय में काेई सहारा नहीं देता है। काेई उम्मीद की किरण है ताे आपका सतगुरु है।

बेबसी से जीवन जीने के लिए दुनिया में नहीं आए

निर्वाह नहीं करना, जीवन जीना है। बेबसी से जीवन जीने के लिए दुनिया में नहीं आए, बेहतर जीवन जीने के लिए आप आए हैं। इसके लिए अपने को मार्ग निर्देशक से जाेड़ कर रखें, वह प्रेरणा स्रोत ही आपका गुरु है, तभी आप आगे बढ़ते हैं।


भक्त सत्संग सुनने पहुंच नहीं पा रहे इसलिए उन तक प्रवचन पहुंचा रहा है भास्कर

सुधांशु महाराज

शक्तियां पहचानें, सकारात्मक सोच रखें : अपनी शक्तियां पहचानें, सकारात्मक सोच रखें। विश्वास परमात्मा का, सदगुरु का, स्वयं का और बुजुर्गों का आशीर्वाद सब काम करता है। अपने अंदर की ज्योति का सहारा लो कभी भी हार मानना नहीं, हार मान गए तो हार जाओगे। सफल हाेना है, जरूर हाेना है, निराशा-उदासी नहीं आने देना क्याेंकि उदासी नकारात्मक रूप है और आशा सकारात्मक रूप है। सबसे बड़ी सकारात्मक शक्ति है आपकी मुस्कुराहट है। चेहरे पर मुस्कान लाएं, लंबे गहरे श्वास लें, प्रभु का नाम लेकर, प्रणाम करके उससे पूछे अागे क्या करूं।

भगवान की कृपा याद करो : अापका सदगुरु, आपका परमात्मा, उस महान के दरवाजे सबके लिए सदा खुले रहते हैं। उसके दर पे जाकर स्वयं को पवित्र करना है। प्रभु के चरणों में बैठना है। भगवान की कृपा याद करो, निश्चय करो आत्मनिर्भरता के साथ मैंने नेतृत्व देना है। आपको दुनिया में रहना, जीना आ जाएगा।

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