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रेखा और मीनाक्षी के पास न शिक्षा अाैर न खेती की जमीन, फिर भी इनसे प्रेरणा ले 220 महिलाएं घराें में उगा रहीं मशरूम

एक वर्ष पहले
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मजदूरी छुड़वा किसान की प|ी ने बनाया िबक्री व लाभ में हिस्सेदार


सिवाह की महिला किसान शीला प|ी रामप्रताप ने अपने खेत में मजदूरी करने वाली 10 महिलाअाें काे सब्जी की फसलाें की िबक्री व लाभ में हिस्सेदार बना लिया है। ये सभी महिलाएं दाेपहर तक खेत में 200 रुपए तक मजदूरी करती थी। अब सभी दिनभर काम करके राेजाना 500 रुपए से ज्यादा कमा रही हैं। शीला 5 एकड़ से ज्यादा खेत में इजराइली तकनीक से सब्जी उगाती हैं। सभी महिलाअाें के साथ लेकर दिनभर खेत में मेहनत करती हैं। अभी हाल के दिनाें में मटर, अालू, खीरा, बैंगन व चप्पल टिंडा की बंपर पैदावार चल रही है। शीला ने बताया कि उनके साथ खेत में अनीता, बिरताे, संताेष, रीना, अंजू, पिंकी, उझा, संगीता, साेनिया व बाला काे बिक्री में 5वीं हिस्से बनाया है।

 महिलाओं की पसंद

ट्रेनिंग लेकर शुरू किया व्यवसाय, 20 हजार खर्च करके 1.20 लाख रुपए कमाए

20 गांवाें में महिलाअाें ने चलाया अभियान

कृषि वैज्ञानिक डाॅ. सतपाल ने बताया कि केंद्र में प्रशिक्षण पाकर अब गांव रसलापुर, उझा, रिसालु, पसीना, गाेयला कलां, वैसर, सिंहपुरा, सिठाना, शहर मालपुर, जलालपुर व बहरामपुर समेत 20 गांवाें की महिलाएं घराें में महिलाएं मशरूम पैदा कर रही हैं। इनमें रसलापुर की ममता, बहरामपुर की सुरेशाे व ऊझा की सीमा इनमें प्रमुख हैं। प्लास्टिक बैग में जैविक खाद भरकर उसमें मशरूम उगाई जाती है। नवंबर के पहले सप्ताह में लगी मशरूम ने 15वें दिन उत्पादन देना शुरू कर दिया था।

लापुर की रेखा व ऊझा की मीनाक्षी के पास न ताे शिक्षा अाैर न ही खेतीहर जमीन। फिर भी ये वैज्ञानिक पद्धति से घराें में ही बेडरूम व ड्राइंग रूम में प्लास्टिक बैग रखकर मशरूम पैदा कर रही हैं। इनसे प्रेरणा पाकर 20 गांवाें की 220 से ज्यादा महिलाएं यही तकनीक अपना रही हैं। ऊझा कृषि विज्ञान केंद्र में ट्रेनिंग पाकर इन्हाेंने मशरूम पैदा करने की तकनीक ताे सीख ली, लेकिन जमीन नहीं हाेने पर चिंता बढ़ गई। एक बार ताे साेचा की ट्रेनिंग लेकर भी काेई फायदा नहीं हुअा। फिर कृषि वैज्ञानिकाें के सहयाेग से घराें में प्लास्टिक बैग में मशरूम उगाई। 20 हजार खर्च करके 1.20 लाख रुपए तक कमाई हुई ताे इसे अपना लिया। अब कृषि विज्ञान केंद्र ऊझा के प्रभारी डाॅ. राजबीर व वैज्ञानिक डाॅ. सतपाल इन्हें प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
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