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स्वयंभू हनुमान मंदिर जहां पानीपत के तीसरे युद्ध के दौरान मराठा सैनिक करते थे पूजा-पाठ, शनिवार को प्रसाद में मिलता है मीठा पान

Panipat News - एशिया की सबसे बड़ा टेक्सटाइल नगरी माना जाना वाला पानीपत न केवल ऐेतिहासिक शहर है, बल्कि यह धार्मिक नगरी भी है।...

Apr 08, 2020, 08:16 AM IST

एशिया की सबसे बड़ा टेक्सटाइल नगरी माना जाना वाला पानीपत न केवल ऐेतिहासिक शहर है, बल्कि यह धार्मिक नगरी भी है। यहां पर श्री हनुमान जी स्वयंभू मंदिर भी है।

बुजुर्गों का दावा है कि यह प्रदेश का पहला स्वयंभू मंदिर है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता शायद कम ही लाेग जानते हैं कि यहां पर अाने वाले भक्तों काे हर शनिवार मीठा पान प्रसाद के रूप में दिया जाता है। जाे पान भक्ताें काे प्रसाद स्वरूप दिए जाते हैं, उन्हें यहां अाने वाले भक्त ही अप्रित करके मन्नते मांगते हैं। यह सिलसिला अनंत काल से जारी है। विकास गाेयल ने बताया कि मंदिर के नीचे एक सुरंग भी थी। सुरंग के बारे में मान्यता थी कि उसमें नाग देवताअाें का वास हाेता था। यह सुरंग ताे अभी कुछ साल पहले ही बंद करवाई है, क्याेंकि उसमें किसी के जाने का खतरा बना रहता था। वहीं पास में ही एक कुअां था। इसका बहुत मीठा पानी हाेता था। जब रस्सियाें से पानी खींचने का दाैर खत्म हाे गया ताे अासपास के लाेगाें ने इसमें नलकूप लगवा लिया था। अब हर घर में पानी के कनेक्शन हाेने से काेई नलकूप प्रयाेग नहीं करता था। इसलिए कुअां भी बंद कर दिया गया।

पानीपत. माॅडल टाउन सनातन धर्म मंदिर में स्थापित हनुमान जी की मूर्ति।

मंदिर पुजारी देश नारायणा उपाध्याय ने बताया कि यह मंदिर स्वयं प्रकट हुअा है। एेसी इसके बारे में मान्यता है। यह शहर के बीचाें बीच पूर्वायन काॅलाेनी में स्थित है। इस काॅलाेनी का पूर्वायन नाम भी इसलिए पड़ा था, क्याेंकि यहां पुराने जमाने में टीले के एेसे मुहाने पर थी, जिसमें सूर्य देश की पानीपत में पहली किरण पड़ती थी। किला पर सेना ठहरती थी। सैनिक देवी मंदिर के साथ-साथ यहां भी नतमस्तक हाेते थे। मंदिर के बारे में मान्यता भी है कि यहां पर शनिवार काे मीठा पान चढ़ाने पर काेई खाली हाथ नहीं जाता।

सूर्य देव यहां सबसे पहले देते थे दर्शन

80 वर्षीय कृष्णा देवी ने बताई मंदिर से जुड़ी बात

बारे में मान्यता थी कि उसमें नाग देवताअाें का वास हाेता था। यह सुरंग ताे अभी कुछ साल पहले ही बंद करवाई है, क्याेंकि उसमें किसी के जाने का खतरा बना रहता था। वहीं पास में ही एक कुअां था। इसका बहुत मीठा पानी हाेता था। जब रस्सियाें से पानी खींचने का दाैर खत्म हाे गया ताे अासपास के लाेगाें ने इसमें नलकूप लगवा लिया था। अब हर घर में पानी के कनेक्शन हाेने से काेई नलकूप प्रयाेग नहीं करता था। इसलिए कुअां भी बंद कर दिया गया।

हनुमान जयंती आज**

पानीपत. प्राचीन स्वयंभू हनुमान मंदिर में विराजमान हनुमान जी का स्वरूप।

मंदिर से संबंधित यह जानकारी सबकाे राेशनी फाउंडेशन के संस्थापक विकास गाेयल व कोषाध्यक्ष हरीश बंसल व 80 वर्षीय कृष्णा देवी ने दी। कृष्णा ने मंदिर से जुड़ी एक गजब बात भी बताई। उन्हाेंने कहा कि उनकी सास बताती थी कि तीसरे युद्ध के मराठा सैनिक भी युद्ध स्थल जाने से पहले इस मंदिर के सामने खड़े हाेकर हनुमान जी काे सेल्यूट करते थे। कृष्णा की सास काे यह बातें उनकी दादी सास बताती थी। बताया जाता है कि जब मराठा सैनिक सेल्यूट करते थे उनके जूतों की अावाज अासपास के घराें सुनाई देती थी।


लाॅकडाउन के कारण भक्त नहीं अाते, पुजारी हर मंगलवार और शनिवार काे करते हैं सिंदूर का लेप

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पानीपत, बुधवार 08 अप्रैल, 2020

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