महावीर जयंती पर विशेष अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले मुकेश जैन की कहानी

Panipat News - रात को छोटे कीड़े कहीं भोजन में न पड़ जाएं, इसलिए जैन समाज के बहुत से लोग रात का खाना भी सूरज ढलने से पहले ही खा लेते...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:15 AM IST
Panipat News - haryana news the story of mukesh jain who taught a lesson on mahavir jayanti
रात को छोटे कीड़े कहीं भोजन में न पड़ जाएं, इसलिए जैन समाज के बहुत से लोग रात का खाना भी सूरज ढलने से पहले ही खा लेते हैं। ऐसे तो बहुत से लोग मिल जाएंगे, लेकिन कोई उन कीड़े-मकोड़ाें की जान की परवाह करते हुए अपना उद्योग बंद कर दे। ऐसे बहुत कम ही लोग मिलेंगे। परमहंस कुटिया देव नगर में रहने वाले पूर्व पार्षद मुकेश जैन के परिवार ने अहिंसा को कारोबार पर इस तरह से तरजीह दी कि दो-दाे ईंट भट्ठे इसलिए बंद कर दिए कि मान्यता है कि ईंट-भट्ठे में कीड़े-मकोड़ों की जान जाती है। कीड़े-मकोड़े की जान की भी परवाह करने वाले मुकेश जैन कहते हैं कि यह सब निष्ठा की बात है।

मुकेश जैन

अहिंसा परमो धर्म : भट्‌ठे की तपिश में कीड़े-मकोड़े मरते हैं इसलिए पूर्व पार्षद मुकेश जैन के परिवार ने लगे-लगाए ईंट के भट्ठे तक बंद कर दिए


1000 किलाेमीटर तक मुनि के साथ पैदल यात्रा कर लौटे तो मिली शांति

60 साल के मुकेश जैन ने बताया कि 1997 में पहली बार मुनि सौरभ सागर महाराज हरियाणा के दौरे पर आए। लौटते वक्त उनके साथ पानीपत से इंदौर तक की पैदल यात्रा की। 23 नवंबर को यात्रा शुरू की, 15 जनवरी को समाप्त हुई। जैन ने कहा कि यात्रा से लौटने के बाद जीवन में वह शांति मिली, जिसकी तलाश थी। पैसों से शांति नहीं मिलती।

एक त्याग ये भी; चमड़े के कारोबार की तैयारी थी, उसे भी छोड़ा

मुकेश जैन ने बताया कि एक बार तो चमड़े का कारोबार करने की पूरी प्लानिंग हो गई। फैक्ट्री देखने करनाल भी गया, लेकिन वहां से लौटा तो मन नहीं माना। दिल ने गवाही नहीं दी कि जिस अहिंसा की हम बात करते हैं, हिंसा तो इस चमड़े के कारोबार से भी जुड़ा है। इस तरह से चमड़े का कारोबार करने की प्लानिंग भी छोड़ दी। जैन आज सर्राफा कारोबार से जुड़े हुए हैं।

पहनावा केवल सिल्क

जिनवाणी विद्या भारती स्कूल के फाउंडर मेंबर रहे मुकेश जैन 33 साल से जैन स्कूल सोसायटी के सदस्य हैं। दूसरे जैनियों की तरह चमड़े के जूते नहीं पहनते। शहद का उपयोग नहीं करते। सिल्क के कपड़े नहीं पहनते।

4 साल पार्षद रहे, मीट मार्केट का हमेश विरोध किया

मुकेश जैन 1987 में नगर पालिका के पार्षद बने। अपने चार साल के कार्यकाल में हमेशा मीट मार्केट का विरोध करते रहे। जैन ने कहा कि हमारा एक ही पाइंट पर फोकस रहा कि मीट मार्केट बेशक बंद न हो, लेकिन कम से कम दुकानें एक जगह ही रहे। ऐसा नहीं कि गली-गली में दुकानें खुलें।

जरूरतमंदों के लिए बना रहे जीवन आशा अस्पताल

सौरव सागर सेवा संस्थान से जुड़े मुकेश जैन ने कहा कि यूपी के मुरादनगर में संस्था की ओर से जीवन आशा अस्पताल बनाया जा रहा है। जो मई में शुरू हो रहा है। इस अस्पताल में दिव्यांग को फ्री में अंग लगाए जाएंगे, वह भी विदेशी मॉडल पर आधारित होगा। साथ ही ऐसे लोगों को जीवन-यापन को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

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