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खांसी और सांस लेने में दिक्कत झेल रही महिला दो घंटे तक परिसर में इलाज के लिए भटकती रही

एक वर्ष पहले
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काेराेना वायरस महामारी घाेषित हाे चुकी है, लेकिन अस्पताल प्रशासन अभी तक नहीं जागा। शुक्रवार काे लापरवाही सामने अाई। सिविल अस्पताल की दूसरी मंजिल पर डॉक्टरों व स्टाफ की मीटिंग चल रही थी कि.. कोरोना का शक लेकर कोई आए तो तुरंत अटैंड करना, 101 नंबर कमरे में व्यक्ति की ट्रैवल हिस्ट्री पूछना, फिर इलाज शुरू करना। वहीं, नीचे अस्पताल परिसर में कोरोना के शक में 45 साल की एक महिला दो घंटे तक इलाज के लिए भटकती रही। महिला खांसी और सांस न ले पाने से परेशान थी। इमरजेंसी वार्ड में स्ट्रेचर पर भी महिला ठीक से बैठ नहीं पा रही थी। मीडियाकर्मी पहुंचे तो महिला के बेटे ने बताया कि दो घंटे से अस्पताल के स्टाफ को बता रहा हूं कि मां को कोरोना वायरस के लक्षण हैं, लेकिन कोई सुन नहीं रहा है। इमरजेंसी में मीडियाकर्मी जब महिला की फोटो खींचने लगे तो अस्पताल वाले जागे। फिर महिला की जांच शुरू हो गई। महिला का एक्स-रे कराया गया। जांच के लिए ब्लड लिए गए। एक्सरे देखने के बाद डॉक्टरों ने महिला को बताया कि कोरोना के लक्षण नहीं हैं।

5 बार तो कॉल उठाई ही नहीं, छठी बार में बात हुई तो जवाब मिला- कोरोना की जानकारी नहीं मिल सकती

विभाग ने कई दिनाें से काेराेना वायरस के बारे में जानकारी लेने के लिए 108, 0180-2640255, 0180-2645454 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। शुक्रवार काे भास्कर ने इसकी भी पड़ताल की।

108 नंबर: लगातार 5 बार तो कॉल उठाई ही नहीं, छठी बार में बात हुई

रिपाेर्टर: काेराेना वायरस के लक्षणाें व उपाय के बारे में जानकारी चाहिए।

फोन उठाने वाले कर्मचारी: यह नंबर एंबुलेंस कंट्राेल का है। कोरोना के बारे में अस्पताल की इमरजेंसी में ही पता लगेगा।

रिपाेर्टर: विभाग ने तो नंबर यही जारी किया है।

कर्मचारी: इसलिए यह नंबर दिया है कि काेई मरीज हाेगा ताे उसे घर से लाएंगे।

0180-2640255: किसी ने फोन उठाया ही नहीं।

काेराेना वायरस की पहली गाइडलाइन अाई थी ताे स्वास्थ्य विभाग ने सबसे पहले इसी नंबर काे जारी किया था। रिपाेर्टर ने इस पर 5 बार फोन किया, एक बार भी नहीं उठा।

0180-2645454: महिला बोली- यह इमरजेंसी का नंबर है, कोई जानकारी नहीं मिलेगी।

इस पर रिपाेर्टर ने फोन किया। रिपाेर्टर ने दोपहर दोपहर 12.33 बजे फोन कर पूछा कि कई दिनाें से खांसी-जुकाम है, इसलिए काेराेना के लक्षणाें के बारे में बताएंगे क्या? फोन पर महिला ने कहा यह इमरजेंसी है, यहां कुछ पता नहीं चलेगा अाैर फाेन काट दिया गया। हालांकि, इसके बाद रात 7:55 पर काॅल की। तो एक डॉक्टर ने पूछा कि क्या अाप विदेश से अाए थे। मना करने पर डाॅक्टर बाेला- फिर अापकाे घबराने की जरूरत नहीं है। अाप शनिवार काे अस्पताल में अाकर जांच कराएं।

सीधी बात: डाॅ. संतलाल वर्मा, सीएमअाे

Q. ढाई घंटे तक महिला की काेराेना के लक्षणाें की जांच नहीं हुई, क्याें?

A. डाॅक्टराें की ट्रेनिंग थी, जानकारी अाई ताे डाॅक्टराें काे भेज दिया था।

Q. क्या अब व्यवस्था सुधरेगी?

A. जरूर, सबकाे अलर्ट किया है कि कैसे जांच करनी है, कैसे सैंपल लेने हैं।

Q. अब क्या सिस्टम से जांच हाेगी?

A. हां, 101 नंबर अाेपीडी स्पेशल काेराेना वायरस की जांच के लिए बनाई है।

यहां...सीएमओ साहब ने 4 घंटे दी डॉक्टरों को ट्रेनिंग

{वायरस की जांच के लिए प्रदेश में दाे लैब बनाई: शुक्रवार काे डाॅक्टर, फार्मासिस्ट, लैब टेक्निशियिन व स्टाफ नर्सों सहित सभी काे करीब 4 घंटे ट्रेनिग दी गई। सीएमअाे डाॅ. संतलाल व नाेडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमअाे डाॅ. शशि गर्ग ने स्टाफ काे बताया कि काेराेना वायरस के सैंपलाें की जांच के लिए हरियाणा में दाे लैब बनाई गई हैं। बीपीएस खानपुर, पीजीअाई राेहतक में काेराेना वायरस के मरीजाें के सैंपल भेज सकते हैं। वहां से 3 दिन में रिपाेर्ट अाएगी।

{मरीज पाॅजिटिव मिले ताे उससे दूरी बनाकर रखें: सीएमअाे डाॅ. संतलाल ने बताया कि सैंपल भेजने के बाद मरीज की रिपाेर्ट पाॅजिटिव अाती है, ताे निगरानी में रखा जाएगा। अगर उसके घर में बंद रखा जाएगा ताे परिजन उसकी वस्तुएं न छुए। अगर छू ले ताे अपने हाथाें काे अच्छी तरह से धाे लें। घर से बाहर जाएं तो मास्क लगाएं या चेहरा रूमाल से ढकें।

फिर से दाे नए नंबर जारी: सीएमअाे डाॅ. संतलाल ने कहा कि ये पहले तीन नंबर है, तीनाें पर जानकारी दी जाती है, किन्हीं कारणाें से फाेन नहीं लगता ताे उसके लिए दाे नए नंबर है, जिनपर संपर्क कर सकते हैं। इसमें 70278-58102 अाैर 7404592936 माेबाइल नंबर जारी किए हैं।

दूसरी मंजिल पर सीएमअाे दे रहे थे स्टाफ को निर्देश- कोरोना के संदिग्ध मरीजों को तुरंत अटैंड करें

हेल्पलाइन भी हेल्पलेस

इधर... उपचार तो दूर की बात, महिला को कोई पूछने तक नहीं आया

सिविल अस्पताल में अपनी मां को लेकर आया बेटा। जब अस्पताल में मीडिया कर्मियों ने महिला के फोटो खींचने शुरू किए तो स्टाफ हरकत में आया और महिला की जांच शुरू की।

बड़ा सवाल; प्रोटोकॉल के तहत मीटिंग करना तो ठीक है। मगर जब कोई मरीज अस्पताल में इलाज या जांच के लिए भटक रहा है तो उसे अटैंड करने के लिए कोई बंदोबस्त क्यों नहीं है।
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