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जेब में पर्स के अंदर रखे एटीएम कार्ड का डाटा भी स्कीमर से चुरा रहे ठग

एक वर्ष पहले
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लिंक पर क्लिक करते ही हैक हाेता है माेबाइल

अगर अाप लेनदेन के लिए माेबाइल में एप का इस्तेमाल करते हैं ताे सावधान हाे जाइए। ठग फायदा पहुंचाने या अन्य तरह के बहाने बनाकर अापकाे एक लिंक भेजकर उसे खुलवा लेता है। अाप जैसे ही लिंक पर क्लिक करते हैं ताे माेबाइल हैक हाे जाता है।

यूं बचें अारएफअाईडी वॉलेट करें इस्तेमाल

स्कीमर टच कर जेब के अंदर पर्स में रखे क्रेडिट-डेबिट कार्ड का डाटा चुराते हैं। फिर उस डाटा से अकाउंट खाली कर देते हैं। पिछले दिनाें नाेएडा में गिरफ्तार हुए एक ठग से यह खुलासा हुअा था। भीड़भाड़ वाली जगहों पर ऐसा करते हैं।

फास्टैग काे एक्टिवेट कर हाे रही है ठगी

ठग फास्टैग पंजीकरण के नाम पर फर्जी संदेशों को बैंक जैसे वास्तविक स्त्रोतों से भेजकर लाेगाें से उनकी व्यक्तिगत या ओटीपी अादि की जानकारी ले लेते हैं। फिर छूट का लालच देकर पैसे ट्रांसफर करने या अपना विवरण सांझा करने के लिए कहते हैं। जानकारी देते ही खाते से रुपए निकाल लेते हैं।

एेसे बचाव करें: बैंक से पता करें कि क्या वह एप पर वाईफाई डिसेबल की फैसिलिटी देते हैं। अगर हां तो इसे एक्टिवेट कर लें। जिससे अाप इस तरह की ठगी से बच सकेंगे। वाईफाई ट्रांजेक्शन की लिमिट काे एप में कस्टमाइज कर मिनिमम कर लें।

स्टील वाले कवर में रखें कार्ड: वाईफाई कार्ड यूज न करें। रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (अारएफअाईडी) सिक्योरिटी वॉलेट यूज करें। या कार्ड काे पर्स की जगह स्टील के कार्ड हाेल्डर्स में रखे अाैर शर्ट की जेब में रखें। इससे बचाव हो सकता है।

इस तरह बचाव करें: फास्टैग केवल स्वीकृत कंपनियों से खरीदे जैसे टोल प्लाजा, पेटीएम और अमेजन अादि। प्रलाेभन से बचें व्यक्तिगत या बैंक से संबंधित काेई भी जानकारी न दें। स्मार्ट फोन में केवल एनएचएआई द्वारा प्रमाणित एप्लिकेशन गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें। जोकि इंडियन हाईवे इंजीनियरिंग कंपनी द्वारा लांच किया हो।

पानीपत | साइबर ठग अब नए पैंतरे से लोगों को शिकार बना रहे हैं। खाताधारक काे कुछ पता ही नहीं चल पाता और पैसे खाते से निकल जाते हैं। डीएसपी हेडक्वार्टर सतीश कुमार वत्स अाैर साइबर सेल इंचार्ज इंस्पेक्टर बलराज ने इस बारे में डिटेल में बातया।
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