दो डीएसपी की जांच हो चुकी,अब एसपी ने फिर से एसआईटी बनाई

Panipat News - कष्ट निवारण समिति की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने उग्राखेड़ी के संदीप मलिक की शिकायत पर एएसअाई सतपाल काे...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:15 AM IST
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कष्ट निवारण समिति की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने उग्राखेड़ी के संदीप मलिक की शिकायत पर एएसअाई सतपाल काे सस्पेंड कर अाराेपियाें काे गिरफ्तार करने के निर्देश दिए थे। एसपी सुमित कुमार ने इस मामले में डीएसपी हेड क्वार्टर सतीश कुमार वत्स के नेतृत्व में एसअाईटी बनाई है। एसअाईटी जांच करेगी। उसके बाद ही तय हाेगा कि अाराेपियाें की गिरफ्तारी हाेगी या नहीं।

पुलिस की नीयत मामले को लटकाने की ही है। यहीं कारण है कि जिस केस की जांच दो बार दो-दो डीएसपी कर चुके हैं। तीसरी बार एक और डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी बनाई गई है। बड़ी बात यह है कि जांच के लिए कोई समय-सीमा नहीं तय की गई है। एसपी सुमित कुमार ने कहा कि एसअाईटी में डीएसपी के अलावा चांदनी बाग थाना के एसएचअाे संदीप व दाे अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। इस केस में एएसअाई सतपाल पर पहले ही विभागीय कार्रवाई हाे चुकी है।

मंत्री विज का आदेश था, पीड़ित का बयान दर्ज कर एफआईआर में धारा जोड़ आरोपियों को गिरफ्तार करो, कांग्रेस की सरकार के समय का है केस

संदीप ने दी थी शिकायत

उग्राखेड़ी के संदीप मलिक की शिकायत थी कि 16 अप्रैल 2014 काे कांग्रेस के प्रदेश महासचिव जगदेव मलिक के भाई जगदीप मलिक सहित 5 लाेगाें ने मारपीट कर उसे अधमरा कर दिया था। अग्रसेन अस्पताल में चांदनी बाग थाने के एएसअाई सतपाल ने बयान लिया, लेकिन राजनीतिक दबाव में बयान फाड़कर लिख दिया कि पीड़ित ने बयान नहीं दिया अाैर अपने बयान के अाधार पर हल्का केस दर्ज किया। यह केस अनट्रेस है।

आरोपियों को कर दिया था बरी

पुलिस ने पीड़ित का बयान लेकर भी उस आधार पर केस दर्ज नहीं किया। पुलिस ने अपनी ओर से एफआईआर दर्ज कर ली। बाद में जिसकी जांच बाद डीएसपी सफीदों से कराई। तो पुलिस की लापरवाही सामने आई थी।

सीधी बात सुमित कुमार, एसपी

प्रश्न : मंत्री के आदेश का क्या हुआ?

एसपी : डीएसपी मुख्यालय के नेतृत्व में एसआईटी बना दी है, जांच में सामने आने पर एक्शन लेंगे।

प्रश्न : दो-दो डीएसपी केस की जांच कर चुके हैं, फिर एक डीएसपी की निगरानी में जांच क्यों?

एसपी : एक जांच तो मैंने की थी, उसमें कुछ नहीं आया था क्योंकि एफआईआर में पीड़ित का बयान नहीं था। बाद में दूसरे डीएसपी की जांच में आईओ की लापरवाही सामने आई तो उस पर विभागीय कार्रवाई की गई। डीएसपी ने कोई फाइंडिंग नहीं दी थी। जिस लिए एसआईटी बनाई है।

प्रश्न : एसआईटी को कितने दिनों में जांच का आदेश दिया है?

एसपी : कोई टाइम बाउंड नहीं किया है। जांच करने को कहा है।

मंत्री ने दिए थे निर्देश

मंत्री ने कहा था कि एएसअाई ने अपराध किया है, लापरवाही नहीं, उसे सस्पेंड कराे। जिला अटाॅर्नी से सलाह लेने के बाद अाराेपियाें काे गिरफ्तार करने के निर्देश दिए थे।

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