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चीन से कारोबार बंद हुआ तो उद्यमी ने खुद ही बना ली रुई बनाने की मशीन

एक वर्ष पहले
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सच कहा जाता है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। मतलब कि जरूरत पड़ने पर ही खोज होती है। जैसा कि अभी कोरोना वायरस से बचने के लिए वैक्सीन की खोज हो रही है। खोज का नया मामला काेरोना से ही जुड़ा हुआ है, लेकिन मशीनरी से। पानीपत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री में 90 फीसदी मशीनरी चीन निर्मित है। कुछ मशीनरी कोरोना प्रभावित दक्षिण कोरिया की भी है। चूंकि तीन माह से मशीनरी आ नहीं रही है। इसलिए, उद्यमी ने खुद ही रुई बनाने की मशीनें बना ली। बड़ी बात यह है कि चीनी माल से इस मशीन की क्वालिटी दोगुनी अच्छी है। शहर के उद्यमी व उत्तर भारत रोटर्स स्पिनर्स एसोसिएशन के चेयरमैन प्रीतम सिंह सचदेवा ने यह मशीन बनाई है। जिसे रिसाइकिलिंग मशीन नाम दिया है। जिस मशीन से कपड़ों की कतरन से रुई बनाई जाती है। साथ ही नेचुरल रुई की सफाई की जाती है।

कहां-कहां यूज होती है मशीन?


{रुई बनाने में : कपड़ों की कतरन को ब्लीचिंग हाउस में रंगहीन करने के पानीपत में सैकड़ों यूनिट हैं। रंगीन कतरन को सफेद किया जाता है। फिर, उस कतरन की रुई बनाई जाती है। जो नेचुरल कॉटन की रुई के समान होती है। इस मशीन से ऐसी रुई बनाई जाती है जिसे आम आदमी दोनों में फर्क नहीं कर सकता।

{रुई की सफाई में : नेचुरल रुई की सफाई इसी रिसाइकिलिंग मशीन में की जाती है। नेचुरल रुई में काले-काले छोटे दाने होते हैं। जिसे इस मशीन में डालकर साफ किया जाता है।

{कारपेट के रॉ-मटेरियल के रूप में : टेंट हाउस के कारपेट के बीच जो मटेरियल डाला जाता है, वह भी इसी मशीन से तैयार की जाती है। जो कॉटन वेस्ट से बनता है।

मॉडल चीन का, मशीन हमारी


उद्यमी प्रीतम सचदेवा ने कहा कि रिसाइकिलिंग मशीन नहीं मिल रही थी। इसलिए, हमने चीन के मॉडल को अपनाकर अपनी मशीनरी खड़ी कर दी। इसके लिए कुछ पार्ट्स दिल्ली से तो कुछ यहां पानीपत से ही उपलब्ध कराए। जिससे अपनी मशीनरी खड़ी कर दी। सचदेवा ने दावा किया कि हमारी मशीन की क्वालिटी चीन के मुकाबले कहीं बेहतर है।

जहां तक कीमत की बात है। सचदेवा ने कहा कि एक मशीन सेट में सात ड्रम लगते हैं। जिसके लिए हमें 11 लाख देने पड़ते थे। यहीं मशीन बनने में हमें 12.50 लाख के करीब खर्च आया है। चूंकि क्वालिटी बहुत अच्छी है, इसलिए मेंटीनेंस पर बहुत कम खर्च आएगा। इसलिए, चीन से हमारी मशीन बेहतर है।

पानीपत. रिसाइकिलिंग मशीन काे देखते हुए उद्यमी प्रीतम सिंह सचदेवा।
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