हरियाणा / भाजपा ने 33 मौजूदा विधायकों को चुनाव में उतारा था, 19 हारे; कांग्रेस के 14 में से 8 जीते

महेंद्रगढ़ विधानसभा से चुनाव लड़ रहे भाजपा के मंभी रामबिलास शर्मा सिर झुकाकर हार स्वीकार करते हुए। महेंद्रगढ़ विधानसभा से चुनाव लड़ रहे भाजपा के मंभी रामबिलास शर्मा सिर झुकाकर हार स्वीकार करते हुए।
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महेंद्रगढ़ विधानसभा से चुनाव लड़ रहे भाजपा के मंभी रामबिलास शर्मा सिर झुकाकर हार स्वीकार करते हुए।महेंद्रगढ़ विधानसभा से चुनाव लड़ रहे भाजपा के मंभी रामबिलास शर्मा सिर झुकाकर हार स्वीकार करते हुए।

  • भाजपा के 16 विधायक ही दोबारा दोहरा पाए जीत, वहीं कांग्रेस के 6 विधायक हारे
  • दोबारा चुनाव लड़ने वाले 50% से ज्यादा विधायक चुनाव हार जाते हैं, 1977 से चला आ रहा यह सिलसिला

दैनिक भास्कर

Oct 25, 2019, 12:41 PM IST

पानीपत (मनोज कौशिक)। हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं। भाजपा ने 40 सीटों पर तो कांग्रेस ने 31 सीट जीती हैं। 2014 के विधायकों की बात करें तो भाजपा ने 33 मौजूदा विधायकों को इस बार टिकट दिया था। इन विधायकों में से महज 16 विधायक जीत पाए जबकि 19 विधायक हार गए हैं। इनमें मनोहर लाल खट्टर के 10 मंत्रियों में से 8 हार गए। वहीं कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस ने 14 मौजूदा विधायकों को टिकट दिया था, इनमें से 8 ने जीत दर्ज की जबकि 6 हार गए।

दोबारा चुनाव लड़ने वाले 50 प्रतिशत से ज्यादा विधायक हर बार हार जाते हैं चुनाव

दोबारा चुनाव लड़ने वाले 50 प्रतिशत से ज्यादा विधायक हर बार चुनाव हार जाते हैं। यह सिलसिला 1977 से चला आ रहा है। जबकि 1972 के चुनाव में भी 41 प्रतिशत मौजूदा विधायक चुनाव हार गए थे। बात 1977 की करें तो इस चुनाव में 1972 विधानसभा चुनाव में जीते 26 विधायकों को टिकट दी गई थी। इनमें से महज 2 विधायक जीत दर्ज कर पाए थे जबकि 24 विधायक हार गए थे। इंदिरा विरोधी लहर और जनता पार्टी के चुनाव निशान पर अभी तक के इतिहास में सबसे ज्यादा 92.3 प्रतिशत विधायकों को हार का मुंह देखना पड़ा था।

वहीं इसके उलट 1982 के 5वें विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने फिर से वापसी की। इस चुनाव में जनता पार्टी की टिकट पर 1977 में चुनाव जीतने वाले बहुत से उम्मीदवारों ने चुनाव नहीं लड़ा। कुछ भाजपा में चले गए। उस समय के मौजूदा विधायकों में से 55 ने चुनाव लड़ा। इनमें से 56.3 प्रतिशत विधायक चुनाव हार गए। महज 24 ही चुनाव जीत पाए।

1987 के चुनाव में 66 मौजूदा विधायकों ने चुनाव लड़ा। इस चुनाव में 46 चुनाव हार गए जबकि 20 ही चुनाव जीत पाए। ऐसे में 69 प्रतिशत मौजूदा विधायकों को हार का मुंह देखना पड़ा। 1987 में लोकदल की सीट पर चुनाव लड़ने वाले 34 उम्मीदवारो ने 1991 में चुनाव नहीं लड़ा। 1991 में 46 मौजूदा विधायक चुनाव में उतरे। इनमें से 33 हार गए महज 13 चुनाव जीत पाए। यानि 71 फीसदी से ज्यादा को हार का सामना करना पड़ा।

रुझान 1996 में भी नहीं बदले। इस चुनाव में 58 मौजूदा विधायक भाग्य आजमाने दोबारा मैदान में आए लेकिन 81 प्रतिशत यानि 47 विधायक चुनाव हार गए। महज 11 ने जीत दर्ज की। वर्ष 2000 में 65 मौजूदा विधायक ने चुनाव लड़ा महज 30 जीत पाए और 35 हार गए। इस वर्ष भी 53 प्रतिशत से ज्यादा हारे। 2005 में 58 ने चुनाव में ताल ठोकी लेकिन 19 ही जीत पाए। 39 उम्मीदवार चुनाव हार गए।

2009 में 42 मौजूदा विधायकों ने चुनाव लड़ा। इस चुनाव में 24 विधायकों को शिकस्त हासिल हुई जबकि 18 जीते। आंकड़ा फिर 57 फीसदी से ज्यादा रहा। वर्ष 2014 में मोदी लहर का असर था। इस चुनाव में 64 उम्मीदवार ऐसे थे जो 2009 में विधायक चुने गए थे। इनमें से 43 उम्मीदवार चुनाव हार गए। यानि 67.2 प्रतिशत उम्मीदवार चुनाव हारे। महज 21 उम्मीदवार चुनाव जीत सके।

भजनलाल ऐसे विधायकों में से एक हैं जो कभी आदमपुर से नहीं हारे। उन्होंने 1968 में इस सीट से चुनाव लड़ना शुरू किया। इसके बाद 1972, 1977, 1982, 1991, 1996, 2000, 2005 और 2008 के बाइ इलेक्शन में इस सीट से जीत दर्ज की। 1987 में भी उनकी पत्नी जस्मा देवी ने इस सीट पर चुनाव लड़ा था, उन्होंने भी जीत दर्ज की थी। उनके बाद इस सीट पर तीसरी बार कुलदीप बिश्नोई चुनकर आए हैं। वहीं एक बार रेणुका बिश्नोई भी विधायक बन चुकी हैं। 

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