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हुकूमत राय शाह की ट्रांसपोर्ट का 11 हजार प्रॉपर्टी टैक्स था, खुद उनके पास गया, कहा- सर टैक्स बकाया है, उन्होंने हाथों-हाथ दिया

Panipat News - जैसा कि सीनियर भाजपा नेता एवं नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन नीति सेन भाटिया ने बताया... अ सल में प्रॉपर्टी टैक्स ही...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 03:25 AM IST
Panipat News - hukumat rai shah had 11 thousand property tax for the transport he himself went to him said sir tax is outstanding he handed hands
जैसा कि सीनियर भाजपा नेता एवं नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन नीति सेन भाटिया ने बताया...

अ सल में प्रॉपर्टी टैक्स ही नगर निगम की प्रॉपर्टी है। जितना अधिक जमा होगा, उतना विकास होगा। लेकिन यहां तो कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं, तभी तो 2017-18 में प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में सिर्फ 4 करोड़ जमा हुए। पहली बार 1968 में नगर पालिका का सदस्य बना, तब हुकूमत राय शाह चेयरमैन हुआ करते थे। मैं, सबसे यंग मेंबर था। उसकी कहानी तो ज्यादा याद नहीं। 20 साल बाद 1987 में दोबारा नगर परिषद का सदस्य बना और फिर चेयरमैन, वह भी बिना चुनाव। तब 31 पार्षद हुआ करते थे। सभी ने एकमत पानी का बिल माफ करने का फैसला लिया। सरकार हिल गई। उस वक्त अम्बाला मंडल हुआ करता था। वहां से कमिश्नर पानीपत आ गए। पूछा कि रेवेन्यू कहां से लाओगे। मैंने- एक ही शब्द कहा, चिंता न करें। हमने प्रॉपर्टी टैक्स जमा करना शुरू किया। मुझे याद है। जीटी रोड पर हुकूमत राय शाह (बलबीर व बुल्ले शाह के पिता व पूर्व विधायक) का रायल ट्रांसपोर्ट था। उनके पास मैं खुद गया। कहा, सर- ट्रांसपोर्ट का 11 हजार रुपए टैक्स बकाया है। उन्होंने हाथों-हाथ पैसे दे दिए।

चुंगी का भ्रष्टाचार बंद कराया। पहले रोजाना 12 हजार चुंगी आती थी। हमने 44 हजार पहुंचाई। रेवेन्यू बढ़ाने के लिए काम करना होगा। प्रॉपर्टी टैक्स तो अभी भी मिलेगा। लोग देने को तैयार भी हैं, लेकिन भ्रष्टाचार से फुर्सत मिले तब इस बारे में सोचें ना। इन लोगों ने पांच सालों में पूरे नगर निगम को लूट लिया। जिस पार्क में 30 लाख खर्च होने थे, वहां के लिए 1.30 करोड़ रुपए का एस्टीमेट बना दिया, क्योंकि सब मिल-बांटकर खाते हैं। पोस्ट उतरने दो, सबकी जांच होगी। नाम लेना जरूरी नहीं, सब जानते हैं कि इसका मुखिया कौन है। संगठन विरोधी एक नेता ने सब कुछ कराया, लेकिन कभी भी राजनीतिक आदमी जिम्मेदार नहीं होता, अफसर ही जिम्मेदार होते हैं।

नगर निगम सरकार के आदेश को मानने के लिए बाध्य नहीं है। बशर्ते, वह पब्लिक हित में हो। मुझे याद है, सरकार ने कहा टैक्स बढ़ाओ। हमने कहा कि अभी स्थिति ठीक नहीं है। मेयर और पार्षद चाहें तो सरकार के नियम के विपरीत पब्लिक हित में अच्छे काम कर सकते हैं।

1987 में परिषद के चेयरमैन रहे भाटिया ने पानी का बिल माफ किया, पर रेवेन्यू का संकट नहीं होने दिया क्योंकि वसूल करने वे खुद पहुंच गए थे पूर्व चेरयमैन के पास

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