एएन-32 हादसा  / वायुसेना ने कहा- विमान में सवार किसी के भी जिंदा होने के सबूत नहीं मिले, हरियाणा के दो जवान थे सवार



IAF AN 32 crash site did not find any survivors two haryana Jawans Sahid
आशीष तंवर अपनी पत्नी संध्या जोरहाट के साथ। (फाइल) आशीष तंवर अपनी पत्नी संध्या जोरहाट के साथ। (फाइल)
पंकजा सांगवान। (फाइल) पंकजा सांगवान। (फाइल)
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IAF AN 32 crash site did not find any survivors two haryana Jawans Sahid
आशीष तंवर अपनी पत्नी संध्या जोरहाट के साथ। (फाइल)आशीष तंवर अपनी पत्नी संध्या जोरहाट के साथ। (फाइल)
पंकजा सांगवान। (फाइल)पंकजा सांगवान। (फाइल)

  • जवानों के परिवारों को उनके मृत होने की सूचना पहुंचाई गई
  • एएन-32 ने 3 जून को असम के एयरबेस से उड़ान भरी थी, यह अरुणाचल में लापता हो गया था

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 01:55 PM IST

ईटानगर. वायुसेना की टीम दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान की जांच में जुटी है। वायुसेना ने गुरुवार को कहा कि टीम को दुर्घटना स्थल से किसी भी व्यक्ति के जिंदा न होने के सबूत मिले। विमान में 13 जवान सवार थे। इन सभी के परिवारों को सूचना दे दी गई है। इस विमान में हरियाणा के दो जवान एयर ट्रैफिक सर्विस में तैनात सोनीपत के पंकज सांगवान व पलवल के पायलेट आशीष तंवर शामिल थे। 

 

वायुसेना ने तलाशी अभियान के दौरान मंगलवार को 3 जून से लापता एएन-32 का मलबा अरुणाचल के सियांग जिले के जंगल में मिलने की पुष्टि की थी। इसके बाद बुधवार को दो हेलिकॉप्टर के जरिए 15 जवान और पर्वतारोही की टीम दुर्घटना वाली जगह के पास उतारी थी। टीम ने 12 हजार फीट की ऊंचाई पर जंगल में गिरे मलबे और इसमें सवार लोगों की तलाश की।

 

8 दिन तक बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया
एएन-32 ने 3 जून को असम के एयरबेस से उड़ान भरी थी। यह अरुणाचल में लापता हो गया था। इसमें वायुसेना के 8 क्रू समेत 13 लोग सवार थे। तीनों सेनाओं की मदद से आठ दिन तक बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान एमआई-17 हेलिकॉप्टर को अरुणाचल के जंगल में विमान का मलबा दिखाई दिया था।

 

तलाश में सुखोई, सी-130, पी-8 के अलावा ड्रोन भी लगे थे
वायुसेना ने सुखोई-30, सी130 जे सुपर हर्क्युलिस, पी8आई एयरक्राफ्ट, ड्रोन और सैटेलाइट्स के जरिए विमान का पता लगाने की कोशिश की। इस मिशन में वायुसेना के अलावा नौसेना, सेना, खुफिया एजेंसियां, आईटीबीपी और पुलिस के जवान लगे हुए थे। खोजी विमानों ने कई घंटे की इमेजिंग की फुटेज हासिल की और नौसेना के टोही विमान पी8आई को भी सर्च अभियान में लगाए रखा। इसरों के सैटेलाइट्स और मानवरहित यानों ने भी तलाश की।

 

इस इलाके में ज्यादा टर्बुलेंस, इसलिए उड़ान मुश्किल
कई रिसर्च में एक बात सामने आई कि अरुणाचल के इस इलाके में बहुत ज्यादा वायुमंडलीय हलचल रहती है। 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवा यहां की घाटियों के संपर्क में आने पर ऐसी स्थितियां बनाती है कि उड़ान मुश्किल हो जाती है। दूर-दूर तक जंगल और आबादी नहीं होने से लापता विमानों की तलाश करना बेहद कठिन होता है। इसमें कई बार दशकों लग जाते हैं।

 

माता-पिता का अकेला बेटा था आशीष तंवर
फ्लाइट लेफ्टिनेंट आशीष तंवर अपने माता-पिता का अकेला बेटा था। आशीष ने सेंट्रल स्कूल मेरठ से 12वीं की पढ़ाई की थी। इसके बाद वह कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की। बीटेक करते ही तंवर वायु सेना में भर्ती हो गए। आशीष की मां सरोज का कहना है कि उसका बेटा लोकसभा चुनावों में अपना वोट देने छुट्टी लेकर घर आए थे और वापस चले गए। तंवर की पत्नी संध्या जोरहाट एयरबेस पर बतौर रडार ऑपरेटर तैनात है। 


4 साल पहले एयर फोर्स में भर्ती हुए थे पंकज
एयर ट्रैफिक सर्विस में तैनात पंकज सांगवान भी विमान में मौजूद थे। 22 वर्षीय पंकज सोनीपत के गांव कोहला के रहने वाले थे। पंकज करीब 4 साल पहले एयरफोर्स में भर्ती हुआ था। तभी से असम के जोरहाट में एयर ट्रैफिक सर्विस में तैनात था। 

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