पर्यावरण संरक्षण / हरियाली बढ़ाने के लिए जापानी तकनीकी से मिट्टी के गोलों में बीजों को डालकर अरावली क्षेत्र में फेंका



Japanese technology: put seeds in ceramic balls and thrown them into Aravali area
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Japanese technology: put seeds in ceramic balls and thrown them into Aravali area

  • भारतीय मूल की जापानी महिला नुपूर तिवारी ने किया अनूठा प्रयास

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2019, 06:49 AM IST

गुड़गांव. पर्यावरण संरक्षण के लिए हर कोई अलग-अलग तरीकों से प्रयास करता है। कोई अधिक से अधिक पौधरोपण करता है तो कोई उन रोपे गए पौधों को सहेज कर उन्हें बड़ा करने का प्रयास करता है। ऐसा ही एक प्रयास किया है भारतीय मूल की जापानी नागरिक नुपूर तिवारी ने।

 

उन्होंने अरावली में हरियाली बढ़ाने के लिए जापानी तकनीकी का एक अनूठा प्रयास किया है। उन्होंने मिट्टी के गोले में बीजों के डालकर उन्हें अरावली में फेंका है। जब मानसून की फुहार उन पर पड़ेगी तो वो अंकुरित होंगे और वो हरियाली बढ़ाने के काम करेंगे। इन मिट्टी के गोलों को जापान में बीज बम भी कहा जाता हैं। अब अरावली के संरक्षण को लेकर सिविल सोसायटी के विभिन्न समूह अलग-अलग प्रयास शुरू कर दिए हैं। 


बीज बम : वनों को बढ़ावा देने के लिए इस बीज बम का उपयोग करने का विचार जापानी जैविक किसान मासानोबु फुकुओका ने पिछली शताब्दी में शुरू किया था। इसे मिट्टी के गोले में मानसून की संभावना के तुरंत पहले फेंका जाता है। मिट्टी के गोले में बीज होने से पक्षी या कीड़े उसे नष्ट नहीं कर पाते और मिट्टी में लिपटा खाद बीज के लिए उर्वरक का कार्य करता है। इस अभियान के तहत अरावली में विभिन्न देशी प्रजातियों के लगभग एक लाख बीज बमों के एरियल ड्रॉप का लक्ष्य रखा गया है। 

 

बैंग्लोर में हो चुका प्रयोग 
मिट्टी की गेंदों में बीज को रोल करके उसकी रक्षा के लिए बीज बम एक जापानी अवधारणा है। इसका उपयोग साल 2017 में बैंगलोर में हुआ था उसके बाद गुड़गांव में किया गया है। स्वयंसेवकों ने मिट्टी में बीज बमों को खोदने के लिए अमलतास के बीज की फली भी बिखेर दी। तब इन अमलतास की फली को बंदर, सियार, लकड़बग्घा, नीलगाय और अन्य जानवरों के भोजन के रूप में जंगल में छोड़ दिया गया था।

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