आरटीआई में खुलासा / जींद के कृषि विभाग ने जागरूकता अभियान में 4 महीने में लड्डू, समोसों पर खर्च किए 40 लाख रुपए

कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सुरेंद्र मलिक। कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सुरेंद्र मलिक।
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कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सुरेंद्र मलिक।कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सुरेंद्र मलिक।

  • विभाग का कहना किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया गया
  • किसानों को 2 समोसे, 2 लड्डू और 2 गुलाब जामुन का 57 रुपये खर्च दिखाया

दैनिक भास्कर

Mar 06, 2020, 05:51 PM IST

जींद। जिले के किसानों को पराली न जलाने को लेकर जागरूक के लिए कृषि विभाग ने 40 लाख रुपए का खर्च सिर्फ नाश्ता में किया है। विभाग का दावा है- हर गांव में 2 बार मीटिंग की गई। टैंट लगवाया, किसानों को इकट्ठा किया। किसान को एक समोसा, 2 लड्डू और 2 गुलाब जामुन खिलाए गए, जिन पर प्रति किसान 57 रुपये खर्चा किया गया। किसान को 120 रुपए प्रति थाली के हिसाब से खाना भी खिलाया गया। कृषि विभाग ने यह जानकारी आरटीआई के जवाब में दी है। इतने प्रयास के बावजूद जींद अब भी दुनिया का 17वां सबसे प्रदूषित शहर है।

आरटीआई कार्यकर्ता का आरोप विभाग ने फर्जी बिल बनाए
आरटीआई कार्यकर्ता सूरजमल नैन का आरोप है कि विभाग ने फर्जी बिल बनाए हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत गृह मंत्री अनिल विज को भी की है। उन्होंने बताया है कि एक ही दुकान के नाम से दो-दो बिल काटे गए हैं जबकि दोनों में से कोई दुकान है ही नहीं। इतना ही नहीं एक कार्यक्रम जुलाना में आयोजित किया गया था लेकिन उसके लिए टेंट जींद से 40 किलोमीटर की दूरी से लाया गया, जो सवाल खड़े करता है।

टेंट पर 5 लाख से ज्यादा किया गया खर्च
सूरजमल नैन ने कहा कि एक छोटे से ढाबे में 4 कुर्सियां रखी गई है और उसका खाने के बिल 40,000 से ज्यादा दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग ने कैम्प के दिखाए है उनसे पता चलता है कि किसी भी गांव में टेंट नहीं लगाया गया है जबकि इसका खर्चा 5 लाख से ज्यादा दिखाया गया है।

विभाग का कहना भ्रष्टाचार का आरोप निराधार
कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सुरेंद्र मलिक का कहना है कि आरोप निराधार हैं। हम किसानों के लिए अच्छी योजनाएं पहले भी लाते रहे हैं, उसी के तहत किसानों का ये जागरुकता कार्यक्रम था। हर गांव में यह दो बार आयोजित किया गया था। इस तरीके से 612 कैंप आयोजित किए गए थे। आरोप गलत हैं।

सबसे प्रदूषित शहरों में 17वें स्थान पर पहुंचा जींद
कृषि भाग ने ये खर्चा जुलाई 2018 से लेकर अक्टूबर 2018 तक किया। उस समय प्रदूषित शहरों में जींद विश्व भर में 20 वे स्थान पर था। एक तरफ विभाग प्रदूषण कम करने के लिए किसानों को गुलाब जामुन खिला रहा था तो दूसरी और जींद प्रदूषित शहरों में छलांग लगाते हुए इस साल 17वें स्थान पर पहुंच गया है।

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