सुप्रीम कोर्ट / सिविल जजों के भर्ती मामले में फैसला सुरक्षित, दोबारा मूल्यांकन या परीक्षा संभव

Judgment secured in the case of civil judges recruitment, re-evaluation or examination possible
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Judgment secured in the case of civil judges recruitment, re-evaluation or examination possible

  • 107 पदों की भर्ती में 9 का ही हुआ था चयन, तो शीर्ष कोर्ट पहुंचा मामला 

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2019, 03:31 AM IST

पानीपत/नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा न्यायिक सेवा में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 107 पदों की भर्ती मामले में मंगलवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट दोबारा परीक्षा या दोबारा मूल्यांकन के विकल्पों पर विचार कर रही है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता परीक्षार्थियों की तरफ से सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने दलीलें रखीं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि चयन प्रक्रिया में काफी खामियां हैं और अन्य राज्यस्तरीय परीक्षाओं में चयनित टॉपर उम्मीदवार भी इसमें पास नहीं हो सके।

प्रशांत भूषण ने कहा कि मामले को सुलझाने के लिए अंक विवरण पद्धति वाले ‘स्केलिंग व मोडेरेशन पद्धति’ को अपनाना चाहिए। जजों की बेंच ने पूछा कि क्या किसी न्यायिक परीक्षा में कभी यह पद्धति अपनाई गई है।

भूषण ने जवाब दिया कि यूपीएससी में अपनाई जा रही है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक परीक्षा प्रकृति में पूरी तरह अलग है। ऐसा लगता है कि यहां अंक विवरण पद्धति काम नहीं करेगा। इसलिए अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। 

पूर्व जस्टिस एके सीकरी के सुझाव 

  • सिविल लॉ-1 के पेपर में 9 अभ्यर्थियों ने 33% अंक प्राप्त किए थे। पेपर लंबा था व समय कम था।
  • 5 सवालों के जवाब देने थे, जिनके कुछ हिस्सों के साथ-साथ प्रश्नों की कुल संख्या 18 थी। समय केवल 3 घंटे था।
  • पेपर पढ़ने के लिए दिए 27 मिनट को अलग रखा जाए तो प्रत्येक प्रश्न के लिए मुश्किल से 8.5 मिनट अधिकतम मिल रहे थे।
  • मूल्यांकन भी काफी सख्त हुआ। इसलिए नए सिरे से परीक्षा आयोजित की जाए या दोबारा मूल्यांकन किया जाए।
     
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